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Bhiwani News: मनीषा मौत मामले में सीबीआई कोर्ट ने 31 अक्तूबर तक टाला फैसला
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भिवानी। शिक्षिका मनीषा की मौत के मामले में बुधवार को सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ दायर विरोध याचिका पर पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई। हालांकि फैसला 31 अक्तूबर तक टाल दिया।
बीती 15 अक्तूबर को मनीषा के परिजन की ओर से दाखिल विरोध याचिका पर सीबीआई अदालत में करीब साढ़े तीन घंटे तक बहस हुई थी। पीडि़त पक्ष के अधिवक्ता सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में मनीषा की मौत जहर से होने के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि सीबीआई की जांच रिपोर्ट में मनीषा से जुड़े दो सुसाइड नोट का उल्लेख किया गया है। इनमें से एक 13 अगस्त 2025 को मनीषा के शव के पास मिला जबकि दूसरा सुसाइड नोट मनीषा के एक रिश्तेदार ने डीएसपी को सौंपा था। शव के पास मिले सुसाइड नोट को पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में बरामद नहीं किया था। दोनों मामलों में फोरेंसिक जांच में भी सुसाइड नोट के हस्तलेख का मनीषा के हस्तलेख से मिलान नहीं हुआ। सीबीआई ने उस रिश्तेदार का बयान भी दर्ज नहीं किया जिससे डीएसपी को दूसरा सुसाइड नोट मिला था। इसे केवल डीएसपी के बयान के आधार पर जांच में शामिल किया गया। इन तर्कों के बाद अदालत ने फैसले के लिए 28 अक्तूबर की तारीख दी थी। गौरतलब है कि 11 अगस्त 2025 को गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 13 अगस्त 2025 को मनीषा का शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था और पुलिस जांच के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। एजेंसी ने जांच पूरी करने के बाद 12 अगस्त 2026 को पंचकूला की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। इसमें मनीषा की मौत को हत्या के बजाय आत्महत्या करार दिया था।
बीती 15 अक्तूबर को मनीषा के परिजन की ओर से दाखिल विरोध याचिका पर सीबीआई अदालत में करीब साढ़े तीन घंटे तक बहस हुई थी। पीडि़त पक्ष के अधिवक्ता सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में मनीषा की मौत जहर से होने के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि सीबीआई की जांच रिपोर्ट में मनीषा से जुड़े दो सुसाइड नोट का उल्लेख किया गया है। इनमें से एक 13 अगस्त 2025 को मनीषा के शव के पास मिला जबकि दूसरा सुसाइड नोट मनीषा के एक रिश्तेदार ने डीएसपी को सौंपा था। शव के पास मिले सुसाइड नोट को पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में बरामद नहीं किया था। दोनों मामलों में फोरेंसिक जांच में भी सुसाइड नोट के हस्तलेख का मनीषा के हस्तलेख से मिलान नहीं हुआ। सीबीआई ने उस रिश्तेदार का बयान भी दर्ज नहीं किया जिससे डीएसपी को दूसरा सुसाइड नोट मिला था। इसे केवल डीएसपी के बयान के आधार पर जांच में शामिल किया गया। इन तर्कों के बाद अदालत ने फैसले के लिए 28 अक्तूबर की तारीख दी थी। गौरतलब है कि 11 अगस्त 2025 को गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 13 अगस्त 2025 को मनीषा का शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था और पुलिस जांच के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। एजेंसी ने जांच पूरी करने के बाद 12 अगस्त 2026 को पंचकूला की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। इसमें मनीषा की मौत को हत्या के बजाय आत्महत्या करार दिया था।
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