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Bhiwani News: माकपा ने मनरेगा योजना में बदलाव के विरोध में ढाणा नरसान में किया प्रदर्शन
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गांव ढाणा नरसान में नारेबाजी करती महिलाएं।
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भिवानी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मनरेगा योजना में बदलाव के विरोध में ढाणा नरसान गांव में प्रदर्शन किया। इसके तहत माकपा जिला कमेटी की ओर से संत रविदास मंदिर में मनरेगा मजदूरों की सभा आयोजित की गई जिसमें अधिकतर महिला मजदूरों ने भाग लिया।
सभा की अध्यक्षता मनरेगा मजदूर सुलोचना ने की जबकि जिला अध्यक्ष अशोक ढाणीमाहु मुख्य रूप से उपस्थित रहे। माकपा जिला सचिव कामरेड ओम प्रकाश ने बताया कि ढाणा नरसान और धिराना के 40 मजदूरों ने जून 2025 में कितलाना रजबाहे की सफाई की थी जिसमें अधिकतर महिलाएं काम कर रही थीं। इसके बावजूद अब तक मजदूरों को उस काम की दिहाड़ी नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी समस्या को लेकर समाधान शिविर गई थीं लेकिन उन्हें वहां ध्यानपूर्वक नहीं सुना गया और उच्च अधिकारियों ने उन्हें टरका दिया। कामरेड ओम प्रकाश ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, दोषियों को पकड़ा जाए और मजदूरों को उनके किए हुए काम की पूरी दिहाड़ी दी जाए।
कामरेड ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर मनरेगा योजना को बदल दिया और उसकी 40 प्रतिशत आर्थिक जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी गई है। अब यह राज्य सरकार की मर्जी पर निर्भर है कि वह काम कराए या नहीं। प्रदर्शन में किसान नेता महाबीर फौजी, कृष्णा, सन्तरा, ओमपति, बनारसी भी शामिल रहे।
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सभा की अध्यक्षता मनरेगा मजदूर सुलोचना ने की जबकि जिला अध्यक्ष अशोक ढाणीमाहु मुख्य रूप से उपस्थित रहे। माकपा जिला सचिव कामरेड ओम प्रकाश ने बताया कि ढाणा नरसान और धिराना के 40 मजदूरों ने जून 2025 में कितलाना रजबाहे की सफाई की थी जिसमें अधिकतर महिलाएं काम कर रही थीं। इसके बावजूद अब तक मजदूरों को उस काम की दिहाड़ी नहीं दी गई।
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उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी समस्या को लेकर समाधान शिविर गई थीं लेकिन उन्हें वहां ध्यानपूर्वक नहीं सुना गया और उच्च अधिकारियों ने उन्हें टरका दिया। कामरेड ओम प्रकाश ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, दोषियों को पकड़ा जाए और मजदूरों को उनके किए हुए काम की पूरी दिहाड़ी दी जाए।
कामरेड ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर मनरेगा योजना को बदल दिया और उसकी 40 प्रतिशत आर्थिक जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी गई है। अब यह राज्य सरकार की मर्जी पर निर्भर है कि वह काम कराए या नहीं। प्रदर्शन में किसान नेता महाबीर फौजी, कृष्णा, सन्तरा, ओमपति, बनारसी भी शामिल रहे।
