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डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर लगेगी लगाम, डबल ओटीपी बनेगा नया सुरक्षा कवच : सुमित कुमार
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एसपी सुमित कुमार
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भिवानी। पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और साइबर ठगी जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए डबल ओटीपी प्रणाली नई सुरक्षा पहचान बनेगी। वरिष्ठ नागरिकों और आमजन की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस विभाग इस दोहरी सत्यापन प्रणाली को प्रभावी सुरक्षा कवच के रूप में बढ़ावा दे रहा है।
पुलिस महानिदेशक हरियाणा अजय सिंघल के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने जिला भिवानी के सभी थाना प्रबंधकों, सीआईए स्टाफ और उप पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक कर साइबर अपराधों की रोकथाम को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में सुरक्षा प्रणाली के तकनीकी पहलुओं, कार्यप्रणाली और आमजन तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी तकनीकी हैकिंग से अधिक मानसिक दबाव, भय, झूठे कानूनी मामलों, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और सरकारी अधिकारी बनकर प्रतिरूपण जैसे तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक एकल ओटीपी प्रणाली कई बार पर्याप्त नहीं होती।
उन्होंने बताया कि डबल ओटीपी प्रणाली के तहत पहला ओटीपी खाताधारक के मोबाइल पर प्राप्त होता है जबकि दूसरा ओटीपी या पुष्टि कॉल उस विश्वसनीय व्यक्ति के पास जाती है जिसे खाताधारक ने अपने सुरक्षा संपर्क के रूप में जोड़ा होता है। दोनों स्तरों पर सत्यापन के बाद ही लेन-देन संभव होता है। इससे संदिग्ध परिस्थितियों में धोखाधड़ी की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।
सुमित कुमार ने कहा कि यह व्यवस्था विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनधारकों और अकेले रहने वाले व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। बड़ी राशि के लेन-देन में दोहरी पुष्टि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि फिलहाल यह सुविधा वरिष्ठ नागरिकों के लिए लागू की गई है और भविष्य में इसे चरणबद्ध रूप से विस्तारित करने की योजना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बैंकिंग संस्थानों, सार्वजनिक कार्यक्रमों, सोशल मीडिया, रेडियो, केबल नेटवर्क और अन्य माध्यमों से इस सुरक्षा प्रणाली के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाई जाए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि डबल ओटीपी प्रणाली साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है जो आर्थिक अपराधों की रोकथाम में निर्णायक साबित हो सकती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा कवच
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह व्यवस्था समय की आवश्यकता है। जब भी कोई संदिग्ध या दबावपूर्ण परिस्थिति उत्पन्न हो यह दोहरी सत्यापन प्रक्रिया व्यक्ति को सोचने और ठगी को पहचानने का अवसर देती है जिससे अपराधियों की मंशा विफल हो सकती है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों में डबल ओटीपी/ड्यूल ऑथेंटिकेशन सुविधा सक्रिय करवाने की दिशा में पहल करें तथा किसी विश्वसनीय परिजन अथवा परिचित को अपने सुरक्षा संपर्क के रूप में जोड़ें। साथ ही किसी भी संदिग्ध कॉल, दबाव, धमकी अथवा साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत पुलिस हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीक नहीं बल्कि जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक भागीदारी से ही मजबूत हो सकती है। डबल ओटीपी प्रणाली इसी दिशा में एक सशक्त और भरोसेमंद कदम है।
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पुलिस महानिदेशक हरियाणा अजय सिंघल के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने जिला भिवानी के सभी थाना प्रबंधकों, सीआईए स्टाफ और उप पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक कर साइबर अपराधों की रोकथाम को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में सुरक्षा प्रणाली के तकनीकी पहलुओं, कार्यप्रणाली और आमजन तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
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पुलिस अधीक्षक ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी तकनीकी हैकिंग से अधिक मानसिक दबाव, भय, झूठे कानूनी मामलों, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और सरकारी अधिकारी बनकर प्रतिरूपण जैसे तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक एकल ओटीपी प्रणाली कई बार पर्याप्त नहीं होती।
उन्होंने बताया कि डबल ओटीपी प्रणाली के तहत पहला ओटीपी खाताधारक के मोबाइल पर प्राप्त होता है जबकि दूसरा ओटीपी या पुष्टि कॉल उस विश्वसनीय व्यक्ति के पास जाती है जिसे खाताधारक ने अपने सुरक्षा संपर्क के रूप में जोड़ा होता है। दोनों स्तरों पर सत्यापन के बाद ही लेन-देन संभव होता है। इससे संदिग्ध परिस्थितियों में धोखाधड़ी की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।
सुमित कुमार ने कहा कि यह व्यवस्था विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनधारकों और अकेले रहने वाले व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। बड़ी राशि के लेन-देन में दोहरी पुष्टि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि फिलहाल यह सुविधा वरिष्ठ नागरिकों के लिए लागू की गई है और भविष्य में इसे चरणबद्ध रूप से विस्तारित करने की योजना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बैंकिंग संस्थानों, सार्वजनिक कार्यक्रमों, सोशल मीडिया, रेडियो, केबल नेटवर्क और अन्य माध्यमों से इस सुरक्षा प्रणाली के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाई जाए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि डबल ओटीपी प्रणाली साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है जो आर्थिक अपराधों की रोकथाम में निर्णायक साबित हो सकती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा कवच
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह व्यवस्था समय की आवश्यकता है। जब भी कोई संदिग्ध या दबावपूर्ण परिस्थिति उत्पन्न हो यह दोहरी सत्यापन प्रक्रिया व्यक्ति को सोचने और ठगी को पहचानने का अवसर देती है जिससे अपराधियों की मंशा विफल हो सकती है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों में डबल ओटीपी/ड्यूल ऑथेंटिकेशन सुविधा सक्रिय करवाने की दिशा में पहल करें तथा किसी विश्वसनीय परिजन अथवा परिचित को अपने सुरक्षा संपर्क के रूप में जोड़ें। साथ ही किसी भी संदिग्ध कॉल, दबाव, धमकी अथवा साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत पुलिस हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीक नहीं बल्कि जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक भागीदारी से ही मजबूत हो सकती है। डबल ओटीपी प्रणाली इसी दिशा में एक सशक्त और भरोसेमंद कदम है।
