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Bhiwani News: शेखावाटी ट्रस्ट की संपत्तियों और चुनाव पर गहराया विवाद
Wed, 19 Aug 2026 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 19 Aug 2026 01:19 AM IST
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भिवानी। हरियाणा शेखावाटी ब्रह्मचर्य आश्रम ट्रस्ट की संपत्तियों और आगामी चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने मंगलवार को एसपी को शिकायत दे समिति के प्रशासक शुकदेव मुनि पर ट्रस्ट के मामलों में गैरकानूनी हस्तक्षेप, अनियमितताओं और सवाल उठाने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए।
ट्रस्ट पदाधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और कानूनी संरक्षण की मांग की। वहीं प्रशासक शुकदेव मुनि ने आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया। मंगलवार को ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. शिव शंकर भारद्वाज, जनरल एडमिनिस्ट्रेटर श्रीभगवान वशिष्ठ सहित अन्य पदाधिकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और शिकायत सौंपी।
शिकायत में बताया गया कि पंडित सीताराम शास्त्री ने छह जनवरी 1930 को वसीयतनामे के आधार पर ट्रस्ट की स्थापना की थी। ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार यह स्वतंत्र विधिक संस्था है और समिति इसका सहायक अंग मात्र है।
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शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्रार जनरल की ओर से केवल समिति के चुनाव कराने के लिए नियुक्त किए गए प्रशासक शुकदेव मुनि अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ट्रस्ट के बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, करोड़ों की संपत्तियों और दुकानों पर अनधिकृत नियंत्रण करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को प्रस्तावित चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर को 12 सदस्यों की सूची भेजी गई है। आरोप है कि सूची से संबंधित वैध दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। कुछ लोगों को सदस्यता दिलाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात भी सामने आई है।
प्रशासक से वैध रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे गए तो उन्होंने दस्तावेज दिखाने या उनकी प्रति उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। आश्रम की दुकानों के लेनदेन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
जनरल एडमिनिस्ट्रेटर श्रीभगवान वशिष्ठ ने कहा कि 17 अगस्त को प्रशासक के समक्ष उपस्थित होकर मतदाता सूची, फर्जी प्रस्तावों और दुकानों के कथित लेनदेन से संबंधित वैधानिक दस्तावेज मांगे गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासक ने ज्ञापन लेने में भी आनाकानी की।
वशिष्ठ ने कहा कि अपने ऊपर उठ रहे विधिक सवालों से बचने और उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत पुलिस शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने एसपी से आग्रह किया कि निष्पक्ष जांच और उनका पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा कार्रवाई न की जाए।
प्रशासक शुकदेव मुनि ने कहा कि उन्हें स्टेट रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटीज की ओर से समिति का प्रशासक नियुक्त किया गया है और उनकी तैनाती वैधानिक तरीके से हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कोई काम नहीं किया।
आरोप लगाने वालों पर जबरन संस्था पर कब्जा करने की नीयत से इस तरह के हथकंडे अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां आकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।
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ट्रस्ट पदाधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और कानूनी संरक्षण की मांग की। वहीं प्रशासक शुकदेव मुनि ने आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया। मंगलवार को ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. शिव शंकर भारद्वाज, जनरल एडमिनिस्ट्रेटर श्रीभगवान वशिष्ठ सहित अन्य पदाधिकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और शिकायत सौंपी।
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शिकायत में बताया गया कि पंडित सीताराम शास्त्री ने छह जनवरी 1930 को वसीयतनामे के आधार पर ट्रस्ट की स्थापना की थी। ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार यह स्वतंत्र विधिक संस्था है और समिति इसका सहायक अंग मात्र है।
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शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्रार जनरल की ओर से केवल समिति के चुनाव कराने के लिए नियुक्त किए गए प्रशासक शुकदेव मुनि अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ट्रस्ट के बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, करोड़ों की संपत्तियों और दुकानों पर अनधिकृत नियंत्रण करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को प्रस्तावित चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर को 12 सदस्यों की सूची भेजी गई है। आरोप है कि सूची से संबंधित वैध दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। कुछ लोगों को सदस्यता दिलाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात भी सामने आई है।
प्रशासक से वैध रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे गए तो उन्होंने दस्तावेज दिखाने या उनकी प्रति उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। आश्रम की दुकानों के लेनदेन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
जनरल एडमिनिस्ट्रेटर श्रीभगवान वशिष्ठ ने कहा कि 17 अगस्त को प्रशासक के समक्ष उपस्थित होकर मतदाता सूची, फर्जी प्रस्तावों और दुकानों के कथित लेनदेन से संबंधित वैधानिक दस्तावेज मांगे गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासक ने ज्ञापन लेने में भी आनाकानी की।
वशिष्ठ ने कहा कि अपने ऊपर उठ रहे विधिक सवालों से बचने और उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत पुलिस शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने एसपी से आग्रह किया कि निष्पक्ष जांच और उनका पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा कार्रवाई न की जाए।
प्रशासक शुकदेव मुनि ने कहा कि उन्हें स्टेट रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटीज की ओर से समिति का प्रशासक नियुक्त किया गया है और उनकी तैनाती वैधानिक तरीके से हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कोई काम नहीं किया।
आरोप लगाने वालों पर जबरन संस्था पर कब्जा करने की नीयत से इस तरह के हथकंडे अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां आकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।