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हिसार-खेतड़ी हाइटेंशन लाइन बदले सरकार, किसानों को मिले मार्केट रेट पर मुआवजा : जगरोशन
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ढिगावा मंडी के किसान विश्राम गृह में उपस्थित किसानों को संबोधित करते वक्ता ।
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ढिगावा मंडी। हिसार से खेतड़ी तक जाने वाली करीब 60 वर्ष पुरानी 220 केवी हाइटेंशन लाइन को शीघ्र बदलने और प्रभावित किसानों को केंद्र व हरियाणा सरकार की नई नीति के अनुसार मार्केट रेट पर मुआवजा देने की मांग को लेकर रविवार को ढिगावा मंडी किसान विश्राम गृह में बैठक आयोजित की गई। किसान सभा के नेता जगरोशन ने कहा कि जर्जर हो चुकी यह लाइन किसानों और आमजन के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
जगरोशन ने बताया कि वर्ष 1966 में शुरू की गई यह लाइन अब बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। तार नीचे झुककर जमीन के करीब पहुंच रहे हैं, अर्थिंग कमजोर हो गई है और लगभग 100 फुट ऊंचे टावरों के लोहे के हिस्से भी जंग लगने से कमजोर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है इसलिए लाइन को तुरंत बदला जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में राजस्थान सरकार के विद्युत निगम ने इस लाइन को बदलने का एस्टीमेट तैयार किया था और राजस्थान क्षेत्र में गड्ढे खोदकर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हालांकि निगम पुराने एस्टीमेट और सरकारी दरों के अनुसार मुआवजा देने की बात कर रहा है जिसे किसानों ने न्यायसंगत नहीं माना।
किसानों ने कहा कि मार्च 2025 में केंद्र सरकार के ऊर्जा विभाग द्वारा घोषित अंतरराज्यीय हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन नीति के अनुसार आरओडब्ल्यू में उपयोग की गई भूमि का 30 प्रतिशत तथा टावर के लिए प्रयोग भूमि का 200 प्रतिशत मुआवजा मार्केट रेट पर मिलना चाहिए। किसानों का आरोप है कि राजस्थान विद्युत निगम इस नीति के अनुरूप मुआवजा नहीं दे रहा।
यह हाइटेंशन लाइन हरियाणा सीमा के भीतर लोहारू, ढाणी सुरजा, ढाणी टोडा, झुप्पाकलां, सिंघानी, खरकड़ी, मनफरा, ढाणी लक्ष्मण, अलाउद्दीनपुर, बड़दुजोगी, ओबरा, शहरियारपुर, देवराला, हंसाण, कतवार, मिरान सहित अनेक गांवों से होकर गुजरती है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पहले बिजली निगम और सरकार के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देकर मांगें समयबद्ध तरीके से पूरी करने की मांग की जाएगी। मांगें पूरी नहीं होने पर किसान आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में किसान नेता आजाद सिंह भूंगला, धर्मपाल राठी, ओमवीर, नरेश श्योराण, अनिल श्योराण, रामकिशन और बिजेंद्र मान सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।
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जगरोशन ने बताया कि वर्ष 1966 में शुरू की गई यह लाइन अब बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। तार नीचे झुककर जमीन के करीब पहुंच रहे हैं, अर्थिंग कमजोर हो गई है और लगभग 100 फुट ऊंचे टावरों के लोहे के हिस्से भी जंग लगने से कमजोर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है इसलिए लाइन को तुरंत बदला जाना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में राजस्थान सरकार के विद्युत निगम ने इस लाइन को बदलने का एस्टीमेट तैयार किया था और राजस्थान क्षेत्र में गड्ढे खोदकर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हालांकि निगम पुराने एस्टीमेट और सरकारी दरों के अनुसार मुआवजा देने की बात कर रहा है जिसे किसानों ने न्यायसंगत नहीं माना।
किसानों ने कहा कि मार्च 2025 में केंद्र सरकार के ऊर्जा विभाग द्वारा घोषित अंतरराज्यीय हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन नीति के अनुसार आरओडब्ल्यू में उपयोग की गई भूमि का 30 प्रतिशत तथा टावर के लिए प्रयोग भूमि का 200 प्रतिशत मुआवजा मार्केट रेट पर मिलना चाहिए। किसानों का आरोप है कि राजस्थान विद्युत निगम इस नीति के अनुरूप मुआवजा नहीं दे रहा।
यह हाइटेंशन लाइन हरियाणा सीमा के भीतर लोहारू, ढाणी सुरजा, ढाणी टोडा, झुप्पाकलां, सिंघानी, खरकड़ी, मनफरा, ढाणी लक्ष्मण, अलाउद्दीनपुर, बड़दुजोगी, ओबरा, शहरियारपुर, देवराला, हंसाण, कतवार, मिरान सहित अनेक गांवों से होकर गुजरती है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पहले बिजली निगम और सरकार के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देकर मांगें समयबद्ध तरीके से पूरी करने की मांग की जाएगी। मांगें पूरी नहीं होने पर किसान आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में किसान नेता आजाद सिंह भूंगला, धर्मपाल राठी, ओमवीर, नरेश श्योराण, अनिल श्योराण, रामकिशन और बिजेंद्र मान सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।

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