{"_id":"6a5be0e431ba2e11f50d45c1","slug":"inmates-to-receive-skill-development-training-dr-kaur-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-154062-2026-07-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदियों को मिलेगा कौशल विकास प्रशिक्षण : डॉ. कौर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदियों को मिलेगा कौशल विकास प्रशिक्षण : डॉ. कौर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भिवानी। जीवन में सुधार का दूसरा अवसर मिलना बेहद जरूरी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की चेयरमैन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह ने शनिवार को जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान यह बात कही। उन्होंने बताया कि बंदियों को अब कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में डीएलएसए भिवानी और ओम यूनिवर्सिटी के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत जेल में बंद कैदियों को रोजगारपरक एवं कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा ताकि सजा पूरी होने के बाद वे सम्मानपूर्वक समाज में लौट सकें और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) पवन कुमार भी मौजूद रहे। दोनों न्यायाधीशों ने जिला कारागार की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा निशुल्क कानूनी सहायता से संबंधित गतिविधियों का जायजा लिया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह ने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण से बंदियों के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आएगा और उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। इससे रिहाई के बाद उनके पुनर्वास और आजीविका का मार्ग आसान होगा। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य केवल निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाना भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में डीएलएसए भिवानी और ओम यूनिवर्सिटी के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत जेल में बंद कैदियों को रोजगारपरक एवं कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा ताकि सजा पूरी होने के बाद वे सम्मानपूर्वक समाज में लौट सकें और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) पवन कुमार भी मौजूद रहे। दोनों न्यायाधीशों ने जिला कारागार की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा निशुल्क कानूनी सहायता से संबंधित गतिविधियों का जायजा लिया।
विज्ञापन
जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह ने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण से बंदियों के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आएगा और उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। इससे रिहाई के बाद उनके पुनर्वास और आजीविका का मार्ग आसान होगा। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य केवल निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाना भी है।
विज्ञापन