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Bhiwani News: मुहिम को झटका, नीचे गिरा ग्रामीण क्षेत्र में भूमिगत जल
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 12 Jun 2026 01:45 AM IST
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जलस्तर काफी नीचे जाने से बंद पड़ा भूमिगत बोरवेल।
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भिवानी। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी और सिंचाई विभाग के लाख प्रयासों के बावजूद भी जिले के ग्रामीण क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर नीचे गिर रहा है। जिले के करीब 96 गांव तो ऐसे हैं, जिन्हें डेंजर जोन में शामिल किया हुआ है। ये गांव ऐसे हैं, जहां का भूमिगत पानी ढाई सौ से साढ़े तीन सौ फीट गहराई तक पहुंच गया है।
सबसे अहम बात तो यह है कि गांवों में सीवर लाइन नहीं होने का सबसे बड़ा खामियाजा भूमिगत जल के स्वाद पर पड़ रहा है। शौचालयों के लिए खोदी गई गहरी कुइयों के कारण भूमिगत जल भी दूषित हो रहा है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तो बरसाती पानी संग्रहण और जल बचाने के लिए लाखों का बजट भी खर्च कर रहा है, इसी तरह सिंचाई विभाग ने भी ड्राई जोन के कई गांवों में दो एकड़ भूमि में तालाब खुदवाए हैं, जिन्हें नहरी पानी से भी पाइप लाइन के जरिए जोड़ा जा रहा है।
भिवानी जिले में करीब 155 गांवों के भूमिगत जल सुधार के लिए सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाने के लिए योजना बनाई थी। मगर इस योजना के संबंधित विभागों द्वारा किए प्रयास के सकारात्मक नतीजे सामने आ पाते इससे पहले भूमिगत जल स्तर पहले से भी नीचे गिर गया है। लोहारू, ढिगावा, बहल, तोशाम और बवानीखेड़ा क्षेत्र के कई गांवों में तो भूमिगत जल इतना नीचे जा चुका है कि उसका दोहन अब फसलों के लिए भी घातक हो गया है, इस पानी को पीना तो किसी भी सूरत में संभव नहीं है।
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जिले के करीब 96 गांव तो ऐसे हैं, जिन्हें डेंजर जोन में शामिल किया हुआ है। ये गांव ऐसे हैं, जहां का भूमिगत पानी ढाई सौ से साढ़े तीन सौ फीट गहराई तक पहुंच गया है। इन गांवों में लगे ट्यूबवेल और बोरवेल भी रसायनिक युक्त पानी उगल रहे हैं, जिनके अंदर घातक रासायनिक तत्व भी भूमि से बाहर आ रहे हैं। इनका टीडीएस भी 5 से 7 हजार तक आंका जा रहा है।
कुई की गहराई का नहीं कोई पैमाना
ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय के लिए कुई खोदी जा रही हैं। इन कुइयों की गहराई का भी कोई पैमाना नहीं है। कई कुई तो चवा तक खोदी जा रही हैं। जिसकी वजह से भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रहा है। हालांकि इन गांवों में भूमिगत जल पहले से ही पीने लायक नहीं है। ऐसे में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी व संबंधित विभाग भी ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अगर विभागीय अधिकारी संबंधित पर भूमिगत जल दूषित करने के मामले में एफआईआर दर्ज कराएं तो कुछ हद तक इसे रोका जा सकता है।
जनस्वास्थ अभियांत्रिकी विभाग की तरफ से ग्रामीण और शहरी दायरे में जल संरक्षण की जागरूकता के लिए अलग से विंग बनाई गई है। इसके अलावा अवैध कनेक्शनों व लीकेज कनेक्शनों पर भी कार्रवाई होती है। भूमिगत जल स्तर सुधार के लिए विभाग केवल जागरूक कर रहा है।
-सुनील कुमार, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग।
भिवानी जिले के अधिकांश गांवों में भूमिगत जल स्तर काफी नीचे जा चुका है। जिसकी वजह से भूमि के अंदर से रसायनिक तत्व पानी के साथ बाहर आ रहे हैं। लैब में भी मिट्टी पानी जांच के लिए आते हैं। जिनकी सैंपल जांच में पानी पीने लायक तो दूर खेती के लायक भी नहीं पाया जा रहा है। जिन गांवों में शौचालयों की कुई काफी गहराई यानी चवा तक है, उनकी वजह से भी भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है। सरकार की तरफ से लोगों को जागरूक किया जा रहा है, फिलहाल कार्रवाई के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
-डॉ. राजू मेहरा जताई, कनिष्ठ विज्ञान सहायक, मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला भिवानी।
सबसे अहम बात तो यह है कि गांवों में सीवर लाइन नहीं होने का सबसे बड़ा खामियाजा भूमिगत जल के स्वाद पर पड़ रहा है। शौचालयों के लिए खोदी गई गहरी कुइयों के कारण भूमिगत जल भी दूषित हो रहा है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तो बरसाती पानी संग्रहण और जल बचाने के लिए लाखों का बजट भी खर्च कर रहा है, इसी तरह सिंचाई विभाग ने भी ड्राई जोन के कई गांवों में दो एकड़ भूमि में तालाब खुदवाए हैं, जिन्हें नहरी पानी से भी पाइप लाइन के जरिए जोड़ा जा रहा है।
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भिवानी जिले में करीब 155 गांवों के भूमिगत जल सुधार के लिए सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाने के लिए योजना बनाई थी। मगर इस योजना के संबंधित विभागों द्वारा किए प्रयास के सकारात्मक नतीजे सामने आ पाते इससे पहले भूमिगत जल स्तर पहले से भी नीचे गिर गया है। लोहारू, ढिगावा, बहल, तोशाम और बवानीखेड़ा क्षेत्र के कई गांवों में तो भूमिगत जल इतना नीचे जा चुका है कि उसका दोहन अब फसलों के लिए भी घातक हो गया है, इस पानी को पीना तो किसी भी सूरत में संभव नहीं है।
जिले के करीब 96 गांव तो ऐसे हैं, जिन्हें डेंजर जोन में शामिल किया हुआ है। ये गांव ऐसे हैं, जहां का भूमिगत पानी ढाई सौ से साढ़े तीन सौ फीट गहराई तक पहुंच गया है। इन गांवों में लगे ट्यूबवेल और बोरवेल भी रसायनिक युक्त पानी उगल रहे हैं, जिनके अंदर घातक रासायनिक तत्व भी भूमि से बाहर आ रहे हैं। इनका टीडीएस भी 5 से 7 हजार तक आंका जा रहा है।
कुई की गहराई का नहीं कोई पैमाना
ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय के लिए कुई खोदी जा रही हैं। इन कुइयों की गहराई का भी कोई पैमाना नहीं है। कई कुई तो चवा तक खोदी जा रही हैं। जिसकी वजह से भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रहा है। हालांकि इन गांवों में भूमिगत जल पहले से ही पीने लायक नहीं है। ऐसे में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी व संबंधित विभाग भी ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अगर विभागीय अधिकारी संबंधित पर भूमिगत जल दूषित करने के मामले में एफआईआर दर्ज कराएं तो कुछ हद तक इसे रोका जा सकता है।
जनस्वास्थ अभियांत्रिकी विभाग की तरफ से ग्रामीण और शहरी दायरे में जल संरक्षण की जागरूकता के लिए अलग से विंग बनाई गई है। इसके अलावा अवैध कनेक्शनों व लीकेज कनेक्शनों पर भी कार्रवाई होती है। भूमिगत जल स्तर सुधार के लिए विभाग केवल जागरूक कर रहा है।
-सुनील कुमार, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग।
भिवानी जिले के अधिकांश गांवों में भूमिगत जल स्तर काफी नीचे जा चुका है। जिसकी वजह से भूमि के अंदर से रसायनिक तत्व पानी के साथ बाहर आ रहे हैं। लैब में भी मिट्टी पानी जांच के लिए आते हैं। जिनकी सैंपल जांच में पानी पीने लायक तो दूर खेती के लायक भी नहीं पाया जा रहा है। जिन गांवों में शौचालयों की कुई काफी गहराई यानी चवा तक है, उनकी वजह से भी भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है। सरकार की तरफ से लोगों को जागरूक किया जा रहा है, फिलहाल कार्रवाई के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
-डॉ. राजू मेहरा जताई, कनिष्ठ विज्ञान सहायक, मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला भिवानी।