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Bhiwani News: शहर का दायरा और आबादी बढ़ने से एसटीपी पर बढ़ा दूषित पानी की निकासी का दबाव, सीईटीपी दो साल से खामोश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2026 01:35 AM IST
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With the increase in the city's area and population, the pressure on the STP to discharge contaminated water has increased, and the CETP has been silent for two years.
भिवानी के सेक्टर 13 का वाटर ट्रिटमेंट प्लांट का टैंक
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भिवानी। शहर का दायरा और आबादी बढ़ने के साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांटों पर दूषित पानी की निकासी का दबाव बढ़ गया है। इतना ही नहीं औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए 18 करोड़ रुपये से बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट भी पर्यावरण एनओसी नहीं मिलने के कारण करीब दो साल से खामोश पड़ा है। बिना ट्रिटमेंट के दूषित पानी भिवानी-घग्गर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है जिससे किसान सिंचाई से भी तौबा कर रहे हैं।
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बारिश में ड्रेन अतिरिक्त पानी का दबाव नहीं झेल पाती और किनारे टूटने से हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो रही हैं। कच्ची ड्रेनों की वजह से आसपास इलाके में भूमिगत पानी का स्वाद भी बिगड़ गया है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के दादरी रोड पर 20 एमएलडी और ढाणा रोड डिस्पोजल पर 30 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रिटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं। इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का शहर के सेक्टर 13 और 23 में लगभग 10 एमएलडी क्षमता का प्लांट भी है।
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औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए रोहतक रोड, पालुवास मोड़ पर 10 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनकर दो साल से तैयार है। इस प्लांट के जरिए औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रसायन युक्त दूषित पानी ट्रिटमेंट के बाद ढाणा डिस्पोजल के रास्ते खेतों में सिंचाई के लिए भेजा जाना था लेकिन यह प्लांट 18 करोड़ की मशीनरी के बावजूद खामोश है। मशीनें जंग खाकर जाम होने लगी हैं। यही वजह है कि ट्रिटमेंट प्लांट की क्षमता से लगभग ढाई गुना दूषित पानी शहर से निकल रहा है और सीधे भिवानी-घग्गर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है।


औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 की करीब 300 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी की निकासी के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट सफेद हाथी बन चुका है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्लांट से किसी औद्योगिक इकाई को फायदा नहीं मिला। उद्योगों से निकलने वाला कैमिकल युक्त गंदा पानी सीवर जाम कर रहा है और पर्यावरण प्रदूषण व बीमारियों का संक्रमण बढ़ा रहा है। - शैलेंद्र जैन, अध्यक्ष, जिला भिवानी उद्योग संघ


शहर के अंदर सीवर लाइनें ठप हैं और वाटर ट्रिटमेंट प्लांट भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। 12-15 साल पुराने इन प्लांटों में रखरखाव की गंभीर लापरवाही के कारण गंदा पानी भूमिगत जलस्तर और खेतों की फसलों को प्रभावित कर रहा है। - पिंटू वर्मा, शहरवासी


सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांटों की हालत बदतर है। टैंकों में पहले से ही गंदगी भरी पड़ी है। डिस्पोजल से सीधे शहर का दूषित पानी भिवानी-घग्गर ड्रेन में डाला जा रहा है। ड्रेन खुली और कच्ची होने के कारण किनारे बार-बार टूट रहे हैं जिससे पर्यावरण और फसलें प्रभावित हो रही हैं। - सुभाष सैनी, शहरवासी


शहर के अलावा आसपास के गांव भी विकसित हो चुके हैं जहां सीवर सिस्टम डाला जा रहा है। इनके दूषित पानी से ड्रेन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है लेकिन वाटर ट्रिटमेंट प्लांट पर न संसाधन बढ़े हैं न ढांचागत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। बिना ट्रिटमेंट के ही गंदा पानी ड्रेनों और नहरों में छोड़ा जा रहा है। - मीतू पंडित, शहरवासी


औद्योगिक सेक्टरों का पालुवास पर बनकर तैयार कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट संचालन के लिए पर्यावरण एनओसी अनिवार्य है। प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एनओसी मिलते ही प्लांट चालू कर दिया जाएगा और इसके संचालन में कोई अन्य अड़चन नहीं है। - भूपेंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण भिवानी


जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के दो मुख्य वाटर ट्रिटमेंट प्लांट हैं। शहरी दायरा बढ़ने के कारण इनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा। - सुनील कुमार रंगा, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी
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