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Chandigarh-Haryana News: एनएच-44 पर 128 कैमरों से 38 केसों का खुलासा, चालान में 97 फीसदी वृद्धि
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर सीसीटीवी और एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) आधारित निगरानी परियोजना के जरिए 38 आपराधिक मामलों का खुलासा हुआ। इसके साथ ही ऑनलाइन चालान में 97 फीसदी वृद्धि हुई है। कुंडली बॉर्डर (सोनीपत) से शंभू बॉर्डर (अंबाला) तक एनएच-44 के प्रमुख और संवेदनशील बिंदुओं पर कुल 128 अत्याधुनिक कैमरे स्थापित किए गए हैं जिनमें 72 एएनपीआर, 18 एविडेंस और 38 सर्विलांस कैमरे शामिल हैं।
परियोजना की शुरुआत 25 जनवरी 2025 को करनाल स्थित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से की गई थी। सभी कैमरों को हरियाणा पुलिस के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा गया है जिससे रियल टाइम निगरानी और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित कैमरे ओवर-स्पीडिंग, लेन उल्लंघन और मोबाइल फोन के उपयोग जैसी गतिविधियों को खुद से चिह्नित कर चालान कर रहे हैं।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान एनएच-44 पर एएनपीआर कैमरों के माध्यम से कुल 4,84,617 ऑनलाइन चालान किए गए। वर्ष 2025 में ओवर स्पीडिंग के कुल 6,64,054 चालान किए गए। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग पर 12,126 चालान किए गए जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 6,733 थी। ऑनलाइन चालान में लगभग 97 फीसदी की वृद्धि हुई है।
अपराध नियंत्रण में प्रभावी साबित हुई परियोजना
यातायात सुधार के साथ-साथ यह परियोजना अपराध नियंत्रण में भी प्रभावी साबित हुई है। केंद्रीय नियंत्रण कक्ष की सहायता से चोरी, डकैती और झपटमारी के 38 मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा किया गया है। इसके अतिरिक्त 50 संदिग्ध और अपराध में लिप्त वाहनों के अलर्ट संबंधित जिलों को भेजे गए जिनमें से 5 वाहनों को समय रहते पकड़ लिया गया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ट्रैफिक एंड हाईवे हरदीप दून के अनुसार एनएच-44 पर सड़क संस्कृति में सकारात्मक बदलाव आया है।
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चंडीगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर सीसीटीवी और एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) आधारित निगरानी परियोजना के जरिए 38 आपराधिक मामलों का खुलासा हुआ। इसके साथ ही ऑनलाइन चालान में 97 फीसदी वृद्धि हुई है। कुंडली बॉर्डर (सोनीपत) से शंभू बॉर्डर (अंबाला) तक एनएच-44 के प्रमुख और संवेदनशील बिंदुओं पर कुल 128 अत्याधुनिक कैमरे स्थापित किए गए हैं जिनमें 72 एएनपीआर, 18 एविडेंस और 38 सर्विलांस कैमरे शामिल हैं।
परियोजना की शुरुआत 25 जनवरी 2025 को करनाल स्थित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से की गई थी। सभी कैमरों को हरियाणा पुलिस के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा गया है जिससे रियल टाइम निगरानी और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित कैमरे ओवर-स्पीडिंग, लेन उल्लंघन और मोबाइल फोन के उपयोग जैसी गतिविधियों को खुद से चिह्नित कर चालान कर रहे हैं।
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पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान एनएच-44 पर एएनपीआर कैमरों के माध्यम से कुल 4,84,617 ऑनलाइन चालान किए गए। वर्ष 2025 में ओवर स्पीडिंग के कुल 6,64,054 चालान किए गए। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग पर 12,126 चालान किए गए जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 6,733 थी। ऑनलाइन चालान में लगभग 97 फीसदी की वृद्धि हुई है।
अपराध नियंत्रण में प्रभावी साबित हुई परियोजना
यातायात सुधार के साथ-साथ यह परियोजना अपराध नियंत्रण में भी प्रभावी साबित हुई है। केंद्रीय नियंत्रण कक्ष की सहायता से चोरी, डकैती और झपटमारी के 38 मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा किया गया है। इसके अतिरिक्त 50 संदिग्ध और अपराध में लिप्त वाहनों के अलर्ट संबंधित जिलों को भेजे गए जिनमें से 5 वाहनों को समय रहते पकड़ लिया गया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ट्रैफिक एंड हाईवे हरदीप दून के अनुसार एनएच-44 पर सड़क संस्कृति में सकारात्मक बदलाव आया है।