{"_id":"695fc181df31f470ef0bf8a8","slug":"4678-lakh-compensation-for-death-in-a-road-accident-settlement-of-rs-10-lakh-unacceptable-high-court-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1072-918373-2026-01-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क हादसे में मौत पर 46.78 लाख मुआवजा, 10 लाख रुपये में समझौता अस्वीकार्य : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क हादसे में मौत पर 46.78 लाख मुआवजा, 10 लाख रुपये में समझौता अस्वीकार्य : हाईकोर्ट
विज्ञापन
विज्ञापन
- इस प्रकार का समझौता दुर्घटना पीड़ितों के आश्रितों को समुचित मुआवजा देने के कानून के उद्देश्य को विफल करता है
- समझौते के आधार पर मुआवज़े में भारी कटौती को किसी प्रकार भी स्वीकार नहीं कर सकते
चंडीगढ़। अभूतपूर्व आदेश में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत्यु मामले में पक्षकारों के बीच हुए 10 लाख रुपये के समझौते को प्रभाव देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि मोटर सड़क दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने मृतक के आश्रितों को 46.78 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रकार का समझौता स्वीकार किया गया तो दुर्घटना पीड़ितों के आश्रितों को समुचित मुआवजा देने के कानून के उद्देश्य को विफल कर देगा।
जस्टिस अर्चना पुरी नस्के समक्ष तीन जुलाई 2018 के आदेश का मामला पहुंचा था जिसमें सड़क दुर्घटना में हुई मौत के लिए कुल 46,78,578 का मुआवजा निर्धारित किया गया था। कोर्ट को बताया गया कि पक्षकारों के बीच मध्यस्थता के जरिए 25 सितंबर 2025 को समझौता हो गया है और इसे लिखित रूप में दर्ज किया गया है। इस समझौते के तहत कुल 10 लाख की राशि तय की गई थी जिसकी प्रति रिकॉर्ड पर रखी गई।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रिब्यूनल के अवार्ड के अनुसार मृतक के आश्रितों को 46,78,578 का मुआवजा दिया था। इस राशि और समझौते में तय 10 लाख के बीच बहुत बड़ा अंतर है जो प्रथम दृष्टया न्यायालय को स्वीकार्य नहीं है। ऐसे हालात में इस स्तर पर पक्षकारों के बीच हुए समझौते को प्रभाव नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत्यु से जुड़े मोटर दुर्घटना मामलों में मध्यस्थता के जरिए हुए समझौतों को अदालत यांत्रिक रूप से स्वीकार नहीं करेगी, विशेषकर तब जब वे न्यायाधिकरण की ओर से निर्धारित उचित और न्यायसंगत मुआवजे को गंभीर रूप से कम कर देते हों। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लगभग 37 लाख का अंतर अपने आप में इतना गंभीर है कि अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा, भले ही समझौता आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से हुआ हो।
Trending Videos
- समझौते के आधार पर मुआवज़े में भारी कटौती को किसी प्रकार भी स्वीकार नहीं कर सकते
चंडीगढ़। अभूतपूर्व आदेश में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत्यु मामले में पक्षकारों के बीच हुए 10 लाख रुपये के समझौते को प्रभाव देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि मोटर सड़क दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने मृतक के आश्रितों को 46.78 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रकार का समझौता स्वीकार किया गया तो दुर्घटना पीड़ितों के आश्रितों को समुचित मुआवजा देने के कानून के उद्देश्य को विफल कर देगा।
जस्टिस अर्चना पुरी नस्के समक्ष तीन जुलाई 2018 के आदेश का मामला पहुंचा था जिसमें सड़क दुर्घटना में हुई मौत के लिए कुल 46,78,578 का मुआवजा निर्धारित किया गया था। कोर्ट को बताया गया कि पक्षकारों के बीच मध्यस्थता के जरिए 25 सितंबर 2025 को समझौता हो गया है और इसे लिखित रूप में दर्ज किया गया है। इस समझौते के तहत कुल 10 लाख की राशि तय की गई थी जिसकी प्रति रिकॉर्ड पर रखी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रिब्यूनल के अवार्ड के अनुसार मृतक के आश्रितों को 46,78,578 का मुआवजा दिया था। इस राशि और समझौते में तय 10 लाख के बीच बहुत बड़ा अंतर है जो प्रथम दृष्टया न्यायालय को स्वीकार्य नहीं है। ऐसे हालात में इस स्तर पर पक्षकारों के बीच हुए समझौते को प्रभाव नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत्यु से जुड़े मोटर दुर्घटना मामलों में मध्यस्थता के जरिए हुए समझौतों को अदालत यांत्रिक रूप से स्वीकार नहीं करेगी, विशेषकर तब जब वे न्यायाधिकरण की ओर से निर्धारित उचित और न्यायसंगत मुआवजे को गंभीर रूप से कम कर देते हों। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लगभग 37 लाख का अंतर अपने आप में इतना गंभीर है कि अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा, भले ही समझौता आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से हुआ हो।
