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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में भ्रामक चमक-धमक से युवाओं को अपराध की दलदल में फंसाने की साजिश
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- एसटीएफ का बड़ा खुलासा, सुधारात्मक अभियान के तहत प्रदेश में पहचान कर ऐसे 121 युवाओं को बचाया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क किस तरह युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं इसका चौंकाने वाला खुलासा हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की गहन जांच में हुआ है। एसटीएफ की तकनीकी व फील्ड स्तरीय निगरानी में पता चला है कि अपराध की दुनिया की एक झूठी, चमकदार व आकर्षक तस्वीर दिखाकर युवाओं को अपराध की दलदल में उतारा जा रहा है। एसटीएफ ने एक व्यापक निवारक व सुधारात्मक अभियान के तहत राज्यभर में 121 ऐसे युवाओं की पहचान की जो किसी न किसी रूप में प्रमुख आपराधिक गैंगों के संपर्क में थे। समय रहते हस्तक्षेप कर इन्हें अपराध की दलदल से बाहर निकालना इस अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि कई युवक गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय थे। गैंगस्टर और उनके सहयोगी सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और निजी संपर्कों के जरिए अपराध को रोमांच, रुतबा और जल्दी पैसा कमाने का साधन बताकर पेश करते थे। दहशत फैलाकर बनाई गई पहचान और कथित पावर को इस तरह दिखाया जाता था कि युवा खुद को उसी दुनिया का हिस्सा मानने लगते थे।
भावनात्मक कमजोरियों का शोषण
एसटीएफ के अनुसार गैंगस्टर सिर्फ लालच ही नहीं बल्कि युवाओं की व्यक्तिगत कमजोरियों को भी हथियार बनाते हैं। कहीं पुरानी रंजिश, कहीं पारिवारिक या निजी विवाद तो कहीं आत्मसम्मान को ठेस जैसी भावनाओं को जानबूझकर भड़काया जाता है। बदले की भावना को उकसाकर युवाओं को तात्कालिक आवेश में अपराध की राह पर धकेल दिया जाता है। एसटीएफ व साइबर पुलिस सोशल मीडिया पर गैंगस्टर संस्कृति और हिंसा के महिमामंडन से जुड़े कंटेंट पर कड़ी निगरानी रखे हुए है।
परामर्श आधारित हस्तक्षेप, दंड से पहले सुधार
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ ने दंडात्मक कार्रवाई के बजाय परामर्श और सुधार को प्राथमिकता देते हुए सभी 121 युवाओं को एक सुनियोजित काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल किया। काउंसलिंग सेशन में युवाओं को अपराध की राह पर जाने के बाद सामने आने वाले कानूनी, सामाजिक और पारिवारिक दुष्परिणामों से अवगत करवाया गया। उन्हें जेल में बंद गैंग सदस्यों की वास्तविक स्थिति, उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक कठिनाइयों और टूटते पारिवारिक ढांचे के उदाहरणों के माध्यम से अपराध की सच्चाई से रूबरू कराया गया। अवैध कंटेंट पर त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण कर युवाओं की पहचान की जा रही है।
डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को सही समय पर सही दिशा देना है। यह कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि समाज को सुरक्षित रखने की दूरदर्शी पहल है। हरियाणा पुलिस का उद्देश्य सिर्फ अपराधियों को सजा देना नहीं बल्कि भटकाव की कगार पर खड़े युवाओं को बचाना भी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क किस तरह युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं इसका चौंकाने वाला खुलासा हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की गहन जांच में हुआ है। एसटीएफ की तकनीकी व फील्ड स्तरीय निगरानी में पता चला है कि अपराध की दुनिया की एक झूठी, चमकदार व आकर्षक तस्वीर दिखाकर युवाओं को अपराध की दलदल में उतारा जा रहा है। एसटीएफ ने एक व्यापक निवारक व सुधारात्मक अभियान के तहत राज्यभर में 121 ऐसे युवाओं की पहचान की जो किसी न किसी रूप में प्रमुख आपराधिक गैंगों के संपर्क में थे। समय रहते हस्तक्षेप कर इन्हें अपराध की दलदल से बाहर निकालना इस अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि कई युवक गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय थे। गैंगस्टर और उनके सहयोगी सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और निजी संपर्कों के जरिए अपराध को रोमांच, रुतबा और जल्दी पैसा कमाने का साधन बताकर पेश करते थे। दहशत फैलाकर बनाई गई पहचान और कथित पावर को इस तरह दिखाया जाता था कि युवा खुद को उसी दुनिया का हिस्सा मानने लगते थे।
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भावनात्मक कमजोरियों का शोषण
एसटीएफ के अनुसार गैंगस्टर सिर्फ लालच ही नहीं बल्कि युवाओं की व्यक्तिगत कमजोरियों को भी हथियार बनाते हैं। कहीं पुरानी रंजिश, कहीं पारिवारिक या निजी विवाद तो कहीं आत्मसम्मान को ठेस जैसी भावनाओं को जानबूझकर भड़काया जाता है। बदले की भावना को उकसाकर युवाओं को तात्कालिक आवेश में अपराध की राह पर धकेल दिया जाता है। एसटीएफ व साइबर पुलिस सोशल मीडिया पर गैंगस्टर संस्कृति और हिंसा के महिमामंडन से जुड़े कंटेंट पर कड़ी निगरानी रखे हुए है।
परामर्श आधारित हस्तक्षेप, दंड से पहले सुधार
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ ने दंडात्मक कार्रवाई के बजाय परामर्श और सुधार को प्राथमिकता देते हुए सभी 121 युवाओं को एक सुनियोजित काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल किया। काउंसलिंग सेशन में युवाओं को अपराध की राह पर जाने के बाद सामने आने वाले कानूनी, सामाजिक और पारिवारिक दुष्परिणामों से अवगत करवाया गया। उन्हें जेल में बंद गैंग सदस्यों की वास्तविक स्थिति, उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक कठिनाइयों और टूटते पारिवारिक ढांचे के उदाहरणों के माध्यम से अपराध की सच्चाई से रूबरू कराया गया। अवैध कंटेंट पर त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण कर युवाओं की पहचान की जा रही है।
डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को सही समय पर सही दिशा देना है। यह कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि समाज को सुरक्षित रखने की दूरदर्शी पहल है। हरियाणा पुलिस का उद्देश्य सिर्फ अपराधियों को सजा देना नहीं बल्कि भटकाव की कगार पर खड़े युवाओं को बचाना भी है।
