{"_id":"69bc631809fef100d8028550","slug":"a-gun-license-is-a-privilege-not-a-right-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1094-974769-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: हथियार का लाइसेंस अधिकार नहीं, विशेषाधिकार है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: हथियार का लाइसेंस अधिकार नहीं, विशेषाधिकार है
विज्ञापन
विज्ञापन
- आपराधिक मामलों में घिरे वकील को हाईकोर्ट ने दिया झटका
-सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि, लाइसेंस देना प्रशासन का विवेकाधीन फैसला
अमरउ जाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि हथियार लाइसेंस लेना किसी भी नागरिक का अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है। कोर्ट ने आपराधिक मामलों में घिरे दिल्ली के एक वकील को लाइसेंस देने से इन्कार करने के फैसले को सही ठहराते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने कहा कि लाइसेंस देना पूरी तरह से प्रशासन की संतुष्टि और विवेक पर निर्भर करता है। इसे किसी भी हाल में मौलिक या कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता। फरीदाबाद निवासी एडवोकेट ब्रह्म प्रकाश ने आत्मरक्षा का हवाला देते हुए हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। याची के आवेदन पर शुरुआती स्तर पर जांच के बाद इसे खारिज कर दिया गया। अपील के बाद दोबारा जांच हुई लेकिन इस दौरान सामने आया कि आवेदक के खिलाफ कई आपराधिक मामले और विवाद लंबित हैं। पुलिस रिपोर्ट में भी साफ कहा गया कि ऐसे व्यक्ति को हथियार देना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इसके बाद प्रशासन ने लाइसेंस देने से इनकार कर दिया जिसे वकील ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सभी तथ्यों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील को खारिज कर दिया।
Trending Videos
-सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि, लाइसेंस देना प्रशासन का विवेकाधीन फैसला
अमरउ जाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि हथियार लाइसेंस लेना किसी भी नागरिक का अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है। कोर्ट ने आपराधिक मामलों में घिरे दिल्ली के एक वकील को लाइसेंस देने से इन्कार करने के फैसले को सही ठहराते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने कहा कि लाइसेंस देना पूरी तरह से प्रशासन की संतुष्टि और विवेक पर निर्भर करता है। इसे किसी भी हाल में मौलिक या कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता। फरीदाबाद निवासी एडवोकेट ब्रह्म प्रकाश ने आत्मरक्षा का हवाला देते हुए हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। याची के आवेदन पर शुरुआती स्तर पर जांच के बाद इसे खारिज कर दिया गया। अपील के बाद दोबारा जांच हुई लेकिन इस दौरान सामने आया कि आवेदक के खिलाफ कई आपराधिक मामले और विवाद लंबित हैं। पुलिस रिपोर्ट में भी साफ कहा गया कि ऐसे व्यक्ति को हथियार देना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इसके बाद प्रशासन ने लाइसेंस देने से इनकार कर दिया जिसे वकील ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सभी तथ्यों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन