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Chandigarh-Haryana News: बालवाटिका-3 के विद्यार्थियों के बैंक खातों का ब्योरा अपडेट नहीं, राशि अटकी
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पोर्टल पर सिर्फ 12.7% बच्चों के बैंक खातों का ही ब्योरा दर्ज, कल तक विवरण अपडेट करने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में बालवाटिका-3 के विद्यार्थियों को वर्दी, स्कूल बैग और स्टेशनरी के लिए मिलने वाली सहायता राशि पर संकट गहरा गया है। वजह यह है कि अधिकांश बच्चों के बैंक खातों का विवरण अभी तक विभागीय पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने इसे गंभीर मानते हुए सभी जिलों को 7 अगस्त तक हर हाल में बैंक खाते का ब्योरा अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। तय समय में खातों का ब्योरा अपडेट न होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
विभाग के वन स्कूल एप के अनुसार प्रदेश में बालवाटिका-3 के कुल 66,394 विद्यार्थी हैं। इनमें से अब तक केवल 8,436 विद्यार्थियों यानी 12.7 प्रतिशत के ही बैंक खाते पोर्टल पर दर्ज किए गए हैं। 63,830 विद्यार्थियों यानी 96.1 प्रतिशत का परिवार पहचान पत्र उपलब्ध है। इससे साफ है कि अधिकतर विद्यार्थियों की पहचान संबंधी जानकारी तो है लेकिन बैंक खातों का विवरण उपलब्ध नहीं है। निदेशालय ने स्कूल मुखियाओं को निर्देश दिए हैं कि जिन बच्चों के बैंक खाते नहीं खुले हैं उनके अभिभावकों से तत्काल संपर्क कर खाते खुलवाएं और बैंक खातों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करें। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुसार वर्दी, स्कूल बैग और स्टेशनरी की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जानी है। बैंक विवरण उपलब्ध न होने से लाभार्थियों तक राशि पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
नूंह, पलवल, फरीदाबाद व सोनीपत सबसे पीछे
विद्यार्थियों के बैंक खातों का ब्योरा उपलब्ध कराने में नूंह जिला सबसे पीछे है। यहां अभी 3.7 प्रतिशत विद्यार्थियों के खातों का विवरण ही पोर्टल पर दर्ज हैं। पलवल में 4.8 प्रतिशत, फरीदाबाद में 6.5, सोनीपत 7.5, पानीपत 8.4, करनाल 9.5 और यमुनानगर 10.1 प्रतिशत छात्रों के बैंकों खाता का विवरण ही उपलब्ध है। इसके अलावा चरखी दादरी में 28.1, अंबाला में 25.4 और रोहतक 23.7 प्रतिशत विद्यार्थियों के बैंक खातों का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज हो चुका है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में बालवाटिका-3 के विद्यार्थियों को वर्दी, स्कूल बैग और स्टेशनरी के लिए मिलने वाली सहायता राशि पर संकट गहरा गया है। वजह यह है कि अधिकांश बच्चों के बैंक खातों का विवरण अभी तक विभागीय पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने इसे गंभीर मानते हुए सभी जिलों को 7 अगस्त तक हर हाल में बैंक खाते का ब्योरा अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। तय समय में खातों का ब्योरा अपडेट न होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
विभाग के वन स्कूल एप के अनुसार प्रदेश में बालवाटिका-3 के कुल 66,394 विद्यार्थी हैं। इनमें से अब तक केवल 8,436 विद्यार्थियों यानी 12.7 प्रतिशत के ही बैंक खाते पोर्टल पर दर्ज किए गए हैं। 63,830 विद्यार्थियों यानी 96.1 प्रतिशत का परिवार पहचान पत्र उपलब्ध है। इससे साफ है कि अधिकतर विद्यार्थियों की पहचान संबंधी जानकारी तो है लेकिन बैंक खातों का विवरण उपलब्ध नहीं है। निदेशालय ने स्कूल मुखियाओं को निर्देश दिए हैं कि जिन बच्चों के बैंक खाते नहीं खुले हैं उनके अभिभावकों से तत्काल संपर्क कर खाते खुलवाएं और बैंक खातों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करें। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुसार वर्दी, स्कूल बैग और स्टेशनरी की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जानी है। बैंक विवरण उपलब्ध न होने से लाभार्थियों तक राशि पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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नूंह, पलवल, फरीदाबाद व सोनीपत सबसे पीछे
विद्यार्थियों के बैंक खातों का ब्योरा उपलब्ध कराने में नूंह जिला सबसे पीछे है। यहां अभी 3.7 प्रतिशत विद्यार्थियों के खातों का विवरण ही पोर्टल पर दर्ज हैं। पलवल में 4.8 प्रतिशत, फरीदाबाद में 6.5, सोनीपत 7.5, पानीपत 8.4, करनाल 9.5 और यमुनानगर 10.1 प्रतिशत छात्रों के बैंकों खाता का विवरण ही उपलब्ध है। इसके अलावा चरखी दादरी में 28.1, अंबाला में 25.4 और रोहतक 23.7 प्रतिशत विद्यार्थियों के बैंक खातों का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज हो चुका है।
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