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Chandigarh-Haryana News: प्रदेश में बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने पर मंथन
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- मानवाधिकार आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बुधवार को हरियाणा मानवाधिकार आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक हुई। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में बाल देखभाल संस्थानों की कार्यप्रणाली, अनुदान, पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और निरीक्षण व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में आयोग ने बाल गृहों को समय पर अनुदान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। विभाग ने बताया कि मिशन वात्सल्य के तहत प्रत्येक बच्चे के लिए 3,000 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं जबकि सरकारी संस्थानों के लिए इसे 1,000 रुपये प्रति बच्चा बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। संशोधित वित्तीय मानकों की अधिसूचना सितंबर 2026 तक आने की संभावना है।
बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य में 63 बाल देखभाल संस्थान संचालित हैं और किशोर न्याय अधिनियम के तहत राज्य व जिला स्तरीय समितियां नियमित निरीक्षण कर रही हैं। हाल ही में नूंह, रेवाड़ी, अंबाला, करनाल, सोनीपत और पानीपत के संस्थानों का निरीक्षण किया गया। बैठक में प्रत्येक बच्चे का आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और आयुष्मान भारत कार्ड सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। पात्र युवाओं की उच्च शिक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास सहायता, संस्थानों में परामर्शदाताओं की नियुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और नियमित प्रशिक्षण पर भी चर्चा हुई। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी, निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी सहित विभाग और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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- मानवाधिकार आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बुधवार को हरियाणा मानवाधिकार आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक हुई। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में बाल देखभाल संस्थानों की कार्यप्रणाली, अनुदान, पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और निरीक्षण व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में आयोग ने बाल गृहों को समय पर अनुदान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। विभाग ने बताया कि मिशन वात्सल्य के तहत प्रत्येक बच्चे के लिए 3,000 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं जबकि सरकारी संस्थानों के लिए इसे 1,000 रुपये प्रति बच्चा बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। संशोधित वित्तीय मानकों की अधिसूचना सितंबर 2026 तक आने की संभावना है।
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बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य में 63 बाल देखभाल संस्थान संचालित हैं और किशोर न्याय अधिनियम के तहत राज्य व जिला स्तरीय समितियां नियमित निरीक्षण कर रही हैं। हाल ही में नूंह, रेवाड़ी, अंबाला, करनाल, सोनीपत और पानीपत के संस्थानों का निरीक्षण किया गया। बैठक में प्रत्येक बच्चे का आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और आयुष्मान भारत कार्ड सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। पात्र युवाओं की उच्च शिक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास सहायता, संस्थानों में परामर्शदाताओं की नियुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और नियमित प्रशिक्षण पर भी चर्चा हुई। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी, निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी सहित विभाग और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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