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बिजली निगम उपभोक्ताओं को लूट रहे : प्रो. संपत
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निगमों पर बिना बिजली लिए प्रभावशाली कंपनी को 1300 करोड़ रुपये के भुगतान का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा के बिजली वितरण निगमों पर उपभोक्ताओं को लूटने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि निगम अपनी वित्तीय गलतियों का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि निगमों ने बिना बिजली लिए प्रभावशाली कंपनी को 1300 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
शुक्रवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए प्रो. संपत सिंह ने कहा कि बिजली निगम 27,915 करोड़ रुपये के घाटे में हैं। उन पर 27,248 करोड़ रुपये का कर्ज भी है। इसके बावजूद अक्तूबर 2025 में सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड (ग्रीनको समूह) को 1300 करोड़ रुपये दिए गए। निगम अब वित्त वर्ष 2025-26 में 1,134.54 करोड़ रुपये और ब्याज की वसूली उपभोक्ताओं से चाहते हैं। यह राशि वित्त वर्ष 2022-23 से संबंधित है। नियमों के अनुसार ऐसी राशि अधिकतम दो वर्ष में वसूल होनी चाहिए। सिंह ने निगमों के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जब फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (एफएसए) उपभोक्ताओं को वापस करना था तब निगमों ने कोई याचिका दाखिल नहीं की। लेकिन वसूली उनके पक्ष में आते ही तुरंत दो याचिकाएं दायर कर दी गईं। वे अपनी देरी से होने वाली वसूली पर ब्याज चाहते हैं। हालांकि उपभोक्ताओं का पैसा रोकने पर उन्हें कोई ब्याज देने को तैयार नहीं हैं। निगम डिस्कॉम विनियम 68.1(3) से भी बचना चाहते हैं। यह प्रावधान समय पर राशि न वसूलने पर अधिकार समाप्त करता है।
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निगमों पर बिना बिजली लिए प्रभावशाली कंपनी को 1300 करोड़ रुपये के भुगतान का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा के बिजली वितरण निगमों पर उपभोक्ताओं को लूटने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि निगम अपनी वित्तीय गलतियों का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि निगमों ने बिना बिजली लिए प्रभावशाली कंपनी को 1300 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
शुक्रवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए प्रो. संपत सिंह ने कहा कि बिजली निगम 27,915 करोड़ रुपये के घाटे में हैं। उन पर 27,248 करोड़ रुपये का कर्ज भी है। इसके बावजूद अक्तूबर 2025 में सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड (ग्रीनको समूह) को 1300 करोड़ रुपये दिए गए। निगम अब वित्त वर्ष 2025-26 में 1,134.54 करोड़ रुपये और ब्याज की वसूली उपभोक्ताओं से चाहते हैं। यह राशि वित्त वर्ष 2022-23 से संबंधित है। नियमों के अनुसार ऐसी राशि अधिकतम दो वर्ष में वसूल होनी चाहिए। सिंह ने निगमों के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए।
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उन्होंने कहा कि जब फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (एफएसए) उपभोक्ताओं को वापस करना था तब निगमों ने कोई याचिका दाखिल नहीं की। लेकिन वसूली उनके पक्ष में आते ही तुरंत दो याचिकाएं दायर कर दी गईं। वे अपनी देरी से होने वाली वसूली पर ब्याज चाहते हैं। हालांकि उपभोक्ताओं का पैसा रोकने पर उन्हें कोई ब्याज देने को तैयार नहीं हैं। निगम डिस्कॉम विनियम 68.1(3) से भी बचना चाहते हैं। यह प्रावधान समय पर राशि न वसूलने पर अधिकार समाप्त करता है।
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