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इस्तीफे की औपचारिक स्वीकृति तक कर्मचारी-नियोक्ता संबंध कायम: हाईकोर्ट
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- हाईकोर्ट ने इस्तीफा लंबित रख वेतन रोकने पर नियोक्ता को लगाई फटकार
-11 माह का वेतन व भत्ते चार सप्ताह में जारी करने का हाईकोर्ट ने दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अपने महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी का इस्तीफा लंबित रख वेतन और सेवा के लाभ रोके नहीं जा सकते है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार करने तक कानून की दृष्टि में कर्मचारी-नियोक्ता संबंध कायम रहता है और कर्मचारी अपने वेतन व अन्य वैधानिक लाभों का हकदार रहता है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) में कार्यरत सोनीपत निवासी एक प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) की याचिका मंजूर करते हुए यह फैसला सुनाया है।
अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 14 फरवरी 2024 से 7 जनवरी 2025 तक, यानी इस्तीफे की तिथि से उसकी औपचारिक स्वीकृति तक की अवधि का पूरा वेतन और अनुमन्य भत्ते चार सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने विभिन्न जवाहर नवोदय विद्यालयों में सेवाएं दीं लेकिन कार्यकाल के दौरान उसे प्रतिकूल कार्य वातावरण का सामना करना पड़ा।
इन परिस्थितियों के चलते उसने 14 फरवरी 2024 को अपना इस्तीफा संबंधित अधिकारियों को भेज दिया। प्रतिवादियों की ओर से इस्तीफा इस आधार पर स्वीकार नहीं किया गया कि उसमें परिस्थितियों का उल्लेख होने के कारण वह शर्तों के साथ माना गया था और कर्मचारी को सरल एवं बिना शर्त इस्तीफा देने के लिए कहा गया। अदालत ने इस रुख को अनुचित बताते हुए कहा कि यदि नियोक्ता इस्तीफे पर नियंत्रण बनाए रखता है और उसे लंबित रखता है, तो वह उसी अवधि के सेवा लाभों से कर्मचारी को वंचित नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि लगभग 11 माह तक इस्तीफा लंबित रखने के दौरान न तो याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई और न ही उसे सेवा छोड़ने वाला घोषित किया गया, जिससे स्पष्ट है कि सेवा संबंध जारी रखा गया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि कोई भी पक्ष एक साथ दोहरा रुख नहीं अपना सकता और न ही पूर्व प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार कर पहले से अर्जित सेवा लाभ समाप्त किए जा सकते हैं।
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-11 माह का वेतन व भत्ते चार सप्ताह में जारी करने का हाईकोर्ट ने दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अपने महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी का इस्तीफा लंबित रख वेतन और सेवा के लाभ रोके नहीं जा सकते है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार करने तक कानून की दृष्टि में कर्मचारी-नियोक्ता संबंध कायम रहता है और कर्मचारी अपने वेतन व अन्य वैधानिक लाभों का हकदार रहता है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) में कार्यरत सोनीपत निवासी एक प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) की याचिका मंजूर करते हुए यह फैसला सुनाया है।
अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 14 फरवरी 2024 से 7 जनवरी 2025 तक, यानी इस्तीफे की तिथि से उसकी औपचारिक स्वीकृति तक की अवधि का पूरा वेतन और अनुमन्य भत्ते चार सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने विभिन्न जवाहर नवोदय विद्यालयों में सेवाएं दीं लेकिन कार्यकाल के दौरान उसे प्रतिकूल कार्य वातावरण का सामना करना पड़ा।
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इन परिस्थितियों के चलते उसने 14 फरवरी 2024 को अपना इस्तीफा संबंधित अधिकारियों को भेज दिया। प्रतिवादियों की ओर से इस्तीफा इस आधार पर स्वीकार नहीं किया गया कि उसमें परिस्थितियों का उल्लेख होने के कारण वह शर्तों के साथ माना गया था और कर्मचारी को सरल एवं बिना शर्त इस्तीफा देने के लिए कहा गया। अदालत ने इस रुख को अनुचित बताते हुए कहा कि यदि नियोक्ता इस्तीफे पर नियंत्रण बनाए रखता है और उसे लंबित रखता है, तो वह उसी अवधि के सेवा लाभों से कर्मचारी को वंचित नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि लगभग 11 माह तक इस्तीफा लंबित रखने के दौरान न तो याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई और न ही उसे सेवा छोड़ने वाला घोषित किया गया, जिससे स्पष्ट है कि सेवा संबंध जारी रखा गया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि कोई भी पक्ष एक साथ दोहरा रुख नहीं अपना सकता और न ही पूर्व प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार कर पहले से अर्जित सेवा लाभ समाप्त किए जा सकते हैं।