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Chandigarh-Haryana News: बिजली कंपनियों ने सरचार्ज वसूली के लिए नियमों में मांगी ढील
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- एचईआरसी ने कहा - जनसुनवाई के बाद कोई फैसला होगा, 14 मई की तारीख सुनवाई के लिए निर्धारित की
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बिजली वितरण कंपनियां उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) की वसूली के मौजूदा नियमों में बदलाव की मांग करते हुए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) का दरवाजा खटखटाया है। इस पर आयोग ने कहा कि इस पर तुरंत कोई फैसला न देते हुए पहले सार्वजनिक जनसुनवाई होगी।
डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) ने आयोग के समक्ष याचिका दायर कर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मल्टी ईयर टैरिफ (एमवाईटी) विनियम-2024 के नियम 68 में ढील देने का अनुरोध किया है। वर्तमान नियम के अनुसार ईंधन और बिजली खरीद की अतिरिक्त लागत की वसूली मासिक आधार पर की जाती है। लेकिन बिजली कंपनियों ने प्रस्ताव दिया है कि इस राशि को मासिक आधार पर न वसूलकर आगामी वित्तीय वर्षों में 47 पैसे प्रति यूनिट की समान दर से वसूला जाए। कंपनियों का तर्क है कि इससे लागत की वसूली कैरिंग कॉस्ट (ब्याज लागत) के साथ सुव्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
अगर हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग बिजली कंपनियों को नियमों में ढील दे देता है तो उपभोक्ताओं को हर महीने अलग-अलग सरचार्ज देने की बजाय आने वाले सालों में करीब 47 पैसे प्रति यूनिट की तय दर से भुगतान करना होगा। इससे बिल स्थिर रहेंगे लेकिन कुल भुगतान पर ब्याज (कैरिंग कॉस्ट) जुड़ सकता है। वहीं अगर अनुमति नहीं मिलती तो सरचार्ज की वसूली हर महीने ही होगी। इससे बिजली बिल में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
14 मई को आमने-सामने होगी चर्चा
आयोग ने 14 मई को सुबह 11:30 बजे पंचकूला स्थित अपने कोर्ट रूम में सरचार्ज वसूली के प्रकरण में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसमें उन सभी लोगों को सुना जाएगा जो तय समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। इस सुनवाई के माध्यम से आयोग यह तय करेगा कि बिजली कंपनियों की मांग तर्कसंगत है या नहीं है।
आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी उपभोक्ताओं और स्टेकहोल्डर्स को अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करने का अवसर दिया है। आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया के तहत जो भी व्यक्ति या संस्था इस याचिका के पक्ष या विपक्ष में अपनी बात रखना चाहते हैं वह 1 मई तक लिखित में अपने सुझाव एचईआरसी को भेज सकते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बिजली वितरण कंपनियां उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) की वसूली के मौजूदा नियमों में बदलाव की मांग करते हुए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) का दरवाजा खटखटाया है। इस पर आयोग ने कहा कि इस पर तुरंत कोई फैसला न देते हुए पहले सार्वजनिक जनसुनवाई होगी।
डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) ने आयोग के समक्ष याचिका दायर कर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मल्टी ईयर टैरिफ (एमवाईटी) विनियम-2024 के नियम 68 में ढील देने का अनुरोध किया है। वर्तमान नियम के अनुसार ईंधन और बिजली खरीद की अतिरिक्त लागत की वसूली मासिक आधार पर की जाती है। लेकिन बिजली कंपनियों ने प्रस्ताव दिया है कि इस राशि को मासिक आधार पर न वसूलकर आगामी वित्तीय वर्षों में 47 पैसे प्रति यूनिट की समान दर से वसूला जाए। कंपनियों का तर्क है कि इससे लागत की वसूली कैरिंग कॉस्ट (ब्याज लागत) के साथ सुव्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
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अगर हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग बिजली कंपनियों को नियमों में ढील दे देता है तो उपभोक्ताओं को हर महीने अलग-अलग सरचार्ज देने की बजाय आने वाले सालों में करीब 47 पैसे प्रति यूनिट की तय दर से भुगतान करना होगा। इससे बिल स्थिर रहेंगे लेकिन कुल भुगतान पर ब्याज (कैरिंग कॉस्ट) जुड़ सकता है। वहीं अगर अनुमति नहीं मिलती तो सरचार्ज की वसूली हर महीने ही होगी। इससे बिजली बिल में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
14 मई को आमने-सामने होगी चर्चा
आयोग ने 14 मई को सुबह 11:30 बजे पंचकूला स्थित अपने कोर्ट रूम में सरचार्ज वसूली के प्रकरण में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसमें उन सभी लोगों को सुना जाएगा जो तय समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। इस सुनवाई के माध्यम से आयोग यह तय करेगा कि बिजली कंपनियों की मांग तर्कसंगत है या नहीं है।
आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी उपभोक्ताओं और स्टेकहोल्डर्स को अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करने का अवसर दिया है। आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया के तहत जो भी व्यक्ति या संस्था इस याचिका के पक्ष या विपक्ष में अपनी बात रखना चाहते हैं वह 1 मई तक लिखित में अपने सुझाव एचईआरसी को भेज सकते हैं।