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Haryana: परिवहन मंत्री अनिल विज के व्यवहार पर कर्मचारी संगठनों का विरोध, कहा-पद के अनुरूप नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 14 Feb 2026 11:29 AM IST
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सार
नेताओं ने बताया कि कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली 2016 लागू है। इसके अनुसार केवल सक्षम अधिकारी ही किसी कर्मचारी को निलंबित कर सकता है और मंत्री का मौखिक आदेश किसी अधिकारी को यह अधिकार नहीं देता।
मंत्री अनिल विज और कैथल एसपी उपासना
- फोटो : संवाद
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विस्तार
कैथल में आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में परिवहन मंत्री अनिल विज के कथित गैरकानूनी रवैये को लेकर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
राज्य सचिव जोगेन्द्र करौंथा और पूर्व महासचिव जीवन सिंह ने घटना को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक को नियमानुसार अपना पक्ष रखने पर बैठक से जाने के लिए कहना किसी वरिष्ठ मंत्री के पद के अनुरूप नहीं है।
नेताओं ने बताया कि कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली 2016 लागू है। इसके अनुसार केवल सक्षम अधिकारी ही किसी कर्मचारी को निलंबित कर सकता है और मंत्री का मौखिक आदेश किसी अधिकारी को यह अधिकार नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 2016 के तहत उच्च अधिकारी के मौखिक आदेश की लिखित पुष्टि जरूरी होती है।
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि मौखिक आदेश देकर कानून व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि गैरकानूनी हस्तक्षेप बंद कर नियमों के अनुसार शासन चलाया जाए और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
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राज्य सचिव जोगेन्द्र करौंथा और पूर्व महासचिव जीवन सिंह ने घटना को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक को नियमानुसार अपना पक्ष रखने पर बैठक से जाने के लिए कहना किसी वरिष्ठ मंत्री के पद के अनुरूप नहीं है।
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नेताओं ने बताया कि कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली 2016 लागू है। इसके अनुसार केवल सक्षम अधिकारी ही किसी कर्मचारी को निलंबित कर सकता है और मंत्री का मौखिक आदेश किसी अधिकारी को यह अधिकार नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 2016 के तहत उच्च अधिकारी के मौखिक आदेश की लिखित पुष्टि जरूरी होती है।
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि मौखिक आदेश देकर कानून व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि गैरकानूनी हस्तक्षेप बंद कर नियमों के अनुसार शासन चलाया जाए और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।