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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Even though the army soldier was travelling on the roof of the bus, the insurance company will have to pay.

Chandigarh-Haryana News: भले ही बस की छत पर सफर कर रहा था सेना जवान, बीमा कंपनी को करना होगा भुगतान

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- नारनौल मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखा

- हाईकोर्ट ने सेना के जवान की मौत के मामले में उसे लापरवाह मानने से किया सीधे तौर पर इन्कार
- सांझा लापरवाही की दलील देते हुए बीमा कंपनी ने मुआवजा राशि में कटौती की मांग की थी


चंडीगढ़। बस की छत पर यात्रा कर रहे सेना के जवान की मौत के मुआवजे को लेकर याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल इस आधार पर बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि मृतक छत पर बैठा था। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने नारनौल मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें भारतीय सेना के जवान प्रमोद कुमार की मौत के लिए बस चालक को पूरी तरह जिम्मेदार माना गया था।


मामला 12 मार्च 2009 का है, जब प्रमोद कुमार बस में सफर कर रहे थे। बस में अत्यधिक भीड़ होने के कारण कंडक्टर के कहने पर उन्हें अन्य यात्रियों के साथ बस की छत पर बैठना पड़ा। आरोप था कि चालक तेज रफ्तार और लापरवाही से बस चला रहा था। इसी दौरान उसने बस को सड़क के कच्चे किनारे की ओर मोड़ दिया, जहां नीचे लटक रहे बिजली के तारों की चपेट में आने से प्रमोद कुमार की मौके पर ही करंट लगने से मौत हो गई। हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी की गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना, जिसने अदालत को बताया कि बस में भीड़ इतनी अधिक थी कि यात्रियों को छत पर बैठाया गया। उसने कहा कि मृतक चालक को सावधानी से बस चलाने के लिए खड़ा होकर आवाज दे रहा था, तभी बस नीचे किनारे ले जाई गई और वह बिजली तारों से टकरा गया।
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अदालत ने इस तथ्य पर भी गंभीर टिप्पणी की कि न तो चालक और न ही कंडक्टर ने अदालत में पेश होकर इस बयान का खंडन किया, जिससे उनके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान बनता है। कोर्ट ने जांच अधिकारी की गवाही, एफआईआर और चालान का हवाला देते हुए कहा कि दुर्घटना का प्रत्यक्ष और निकटतम कारण चालक की घोर लापरवाही थी। अदालत ने बीमा कंपनी की मृतक की साझा लापरवाही वाली दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब यात्रियों को मजबूरी में छत पर बैठाया गया, तब चालक पर और अधिक सावधानी बरतने का दायित्व था। कोर्ट ने कहा कि बस की छत पर यात्रा बीमा कंपनी की वैधानिक जिम्मेदारी समाप्त नहीं करती। मृत्यु के मामलों में बीमा कंपनी की देनदारी पूर्ण रहती है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और लापरवाह चालक और बीमाकर्ता दोनों कानून से बच नहीं सकते।
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