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Chandigarh-Haryana News: गांवों के हर घर और जमीन को मिलेगा अलग नंबर
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मालिक को मिलेगा स्वामित्व प्रमाणपत्र, आबादी देह के सर्वे में मकान से लेकर गली-रास्ते तक का रिकॉर्ड होगा तैयार
हरियाणा सरकार ने लागू किए नए नियम, सर्वे शुरू करने से पहले ग्रामीणों को सामान्य सभा में पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने गांवों की आबादी वाली जमीन (आबादी देह) पर बने घरों और संपत्तियों के मालिकों को कानूनी मालिकाना हक देने के लिए नए नियम तैयार किए हैं। ये नियम हरियाणा आबादी देह अधिनियम 2025 को लागू करने के लिए बनाए गए हैं। नए नियमों के तहत गांवों के घर, दुकान, गली और खाली जमीन का सर्वे होगा। सर्वे में जमीन की लंबाई-चौड़ाई फीट-इंच और मीटर-सेंटीमीटर दोनों में दर्ज की जाएगी। हर संपत्ति को एक अलग नंबर भी दिया जाएगा।
नए नियमों के तहत आबादी देह का बाकायदा सर्वे होगा। सर्वे अधिकारी हर सर्वे यूनिट की चारों दिशाओं की सीमा, लंबाई-चौड़ाई और क्षेत्रफल दर्ज करेगा। क्षेत्रफल वर्ग मीटर और वर्ग गज में दर्ज होगा। साथ ही यह भी लिखा जाएगा कि संबंधित जगह मकान, दुकान, संस्थागत भवन, खुला क्षेत्र, साझा क्षेत्र या रास्ता है। स्कूल, आंगनवाड़ी, जलघर, अस्पताल, पशु अस्पताल, धर्मशाला और चौपाल जैसी जगहों को भी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा। सर्वे अधिकारी गांव में मुनादी कराएगा, आबादी देह के प्रमुख स्थानों पर नोटिस लगाएगा और सरपंच को भी सूचना देगा। सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ग्रामीणों की सामान्य सभा में इसकी पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसके बाद पैमाइश, सीमांकन और नंबर देने का काम होगा। सर्वे अधिकारी किसी घर में जाने से पहले वहां रहने वाले लोगों को सूचना देंगे। सर्वे केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच किया जा सकेगा। सर्वे और रिकॉर्ड तैयार होने की जानकारी गांव में मुनादी, नोटिस, सरपंच और ग्राम पंचायत के माध्यम से दी जाएगी। सर्वे पूरा होने के बाद स्वामित्व अधिकार प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इससे लोगों के पास उनकी संपत्ति का सरकारी रिकॉर्ड और मालिकाना हक का प्रमाण होगा। खास बात यह है कि सर्वे अधिकारी किसी व्यक्ति की ओर से पेश किए गए ऐसे दस्तावेजों पर भी विचार कर सकता है जिनसे जमीन की सीमा, क्षेत्रफल या संपत्ति के प्रकार का पता चलता हो।
एक जमीन के कई हिस्से हैं तो मिलेगा अलग नंबर
अगर एक ही जमीन कई लोगों के हिस्से में बंटी हुई है तो हर हिस्से का अलग रिकॉर्ड और नंबर बनाया जाएगा। इससे यह साफ रहेगा कि कौन-सा हिस्सा किस व्यक्ति के नाम है। यानी एक ही जमीन के कई हिस्सेदार हैं तो सभी के हिस्से की पहचान अलग होगी और भविष्य में मालिकाना हक, बंटवारे आदि में परेशानी कम होगी।
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संयुक्त जमीन के बंटवारे का 90 दिन में होगा फैसला
अगर जमीन कई लोगों के नाम संयुक्त रूप से है और वे अपना-अपना हिस्सा अलग करना चाहते हैं तो वे बंटवारे के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में जमीन के खेवट, खतौनी और खसरा नंबर के साथ सभी सह-मालिकों के नाम, पते और मोबाइल नंबर देने होंगे। इसके अलावा जमीन पर किसका कब्जा है, आने-जाने का रास्ता या नाले की जरूरत और जमीन की अनुमानित कीमत की जानकारी भी देनी होगी। सभी हिस्सेदारों की बात सुनने के बाद अधिकारी 90 दिन के अंदर बंटवारे पर फैसला करेंगे। अगर किसी वजह से फैसला 90 दिन में नहीं हो पाता है तो देरी का कारण लिखित रूप में दर्ज करना जरूरी होगा।
सर्वे के निशान हटाने पर लगेगा जुर्माना
जमीन की पैमाइश या सीमा तय करने के लिए लगाए गए निशान को अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर हटाता, तोड़ता या उखाड़ता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना लगने के बाद संबंधित व्यक्ति को एक महीने के अंदर राशि जमा करनी होगी। जुर्माना नकद, ऑनलाइन या बैंक ड्राफ्ट के जरिए जमा किया जा सकेगा।
नए नियमों से यह होगा फायदा
गांवों में कई लोगों के पास अपने घर या जमीन के पक्के मालिकाना कागज नहीं होते। इससे उन्हें बैंक से लोन लेने, जमीन या मकान बेचने और संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझाने में परेशानी होती है। नए नियमों के तहत हर घर और जमीन का सरकारी रिकॉर्ड और नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे लोगों को अपनी संपत्ति के मालिकाना हक का पक्का सबूत मिलेगा और भविष्य में विवाद कम होंगे। ये नियम गजट में प्रकाशित होने की तारीख से लागू माने जाएंगे।
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हरियाणा सरकार ने लागू किए नए नियम, सर्वे शुरू करने से पहले ग्रामीणों को सामान्य सभा में पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने गांवों की आबादी वाली जमीन (आबादी देह) पर बने घरों और संपत्तियों के मालिकों को कानूनी मालिकाना हक देने के लिए नए नियम तैयार किए हैं। ये नियम हरियाणा आबादी देह अधिनियम 2025 को लागू करने के लिए बनाए गए हैं। नए नियमों के तहत गांवों के घर, दुकान, गली और खाली जमीन का सर्वे होगा। सर्वे में जमीन की लंबाई-चौड़ाई फीट-इंच और मीटर-सेंटीमीटर दोनों में दर्ज की जाएगी। हर संपत्ति को एक अलग नंबर भी दिया जाएगा।
नए नियमों के तहत आबादी देह का बाकायदा सर्वे होगा। सर्वे अधिकारी हर सर्वे यूनिट की चारों दिशाओं की सीमा, लंबाई-चौड़ाई और क्षेत्रफल दर्ज करेगा। क्षेत्रफल वर्ग मीटर और वर्ग गज में दर्ज होगा। साथ ही यह भी लिखा जाएगा कि संबंधित जगह मकान, दुकान, संस्थागत भवन, खुला क्षेत्र, साझा क्षेत्र या रास्ता है। स्कूल, आंगनवाड़ी, जलघर, अस्पताल, पशु अस्पताल, धर्मशाला और चौपाल जैसी जगहों को भी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा। सर्वे अधिकारी गांव में मुनादी कराएगा, आबादी देह के प्रमुख स्थानों पर नोटिस लगाएगा और सरपंच को भी सूचना देगा। सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ग्रामीणों की सामान्य सभा में इसकी पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसके बाद पैमाइश, सीमांकन और नंबर देने का काम होगा। सर्वे अधिकारी किसी घर में जाने से पहले वहां रहने वाले लोगों को सूचना देंगे। सर्वे केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच किया जा सकेगा। सर्वे और रिकॉर्ड तैयार होने की जानकारी गांव में मुनादी, नोटिस, सरपंच और ग्राम पंचायत के माध्यम से दी जाएगी। सर्वे पूरा होने के बाद स्वामित्व अधिकार प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इससे लोगों के पास उनकी संपत्ति का सरकारी रिकॉर्ड और मालिकाना हक का प्रमाण होगा। खास बात यह है कि सर्वे अधिकारी किसी व्यक्ति की ओर से पेश किए गए ऐसे दस्तावेजों पर भी विचार कर सकता है जिनसे जमीन की सीमा, क्षेत्रफल या संपत्ति के प्रकार का पता चलता हो।
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एक जमीन के कई हिस्से हैं तो मिलेगा अलग नंबर
अगर एक ही जमीन कई लोगों के हिस्से में बंटी हुई है तो हर हिस्से का अलग रिकॉर्ड और नंबर बनाया जाएगा। इससे यह साफ रहेगा कि कौन-सा हिस्सा किस व्यक्ति के नाम है। यानी एक ही जमीन के कई हिस्सेदार हैं तो सभी के हिस्से की पहचान अलग होगी और भविष्य में मालिकाना हक, बंटवारे आदि में परेशानी कम होगी।
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संयुक्त जमीन के बंटवारे का 90 दिन में होगा फैसला
अगर जमीन कई लोगों के नाम संयुक्त रूप से है और वे अपना-अपना हिस्सा अलग करना चाहते हैं तो वे बंटवारे के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में जमीन के खेवट, खतौनी और खसरा नंबर के साथ सभी सह-मालिकों के नाम, पते और मोबाइल नंबर देने होंगे। इसके अलावा जमीन पर किसका कब्जा है, आने-जाने का रास्ता या नाले की जरूरत और जमीन की अनुमानित कीमत की जानकारी भी देनी होगी। सभी हिस्सेदारों की बात सुनने के बाद अधिकारी 90 दिन के अंदर बंटवारे पर फैसला करेंगे। अगर किसी वजह से फैसला 90 दिन में नहीं हो पाता है तो देरी का कारण लिखित रूप में दर्ज करना जरूरी होगा।
सर्वे के निशान हटाने पर लगेगा जुर्माना
जमीन की पैमाइश या सीमा तय करने के लिए लगाए गए निशान को अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर हटाता, तोड़ता या उखाड़ता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना लगने के बाद संबंधित व्यक्ति को एक महीने के अंदर राशि जमा करनी होगी। जुर्माना नकद, ऑनलाइन या बैंक ड्राफ्ट के जरिए जमा किया जा सकेगा।
नए नियमों से यह होगा फायदा
गांवों में कई लोगों के पास अपने घर या जमीन के पक्के मालिकाना कागज नहीं होते। इससे उन्हें बैंक से लोन लेने, जमीन या मकान बेचने और संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझाने में परेशानी होती है। नए नियमों के तहत हर घर और जमीन का सरकारी रिकॉर्ड और नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे लोगों को अपनी संपत्ति के मालिकाना हक का पक्का सबूत मिलेगा और भविष्य में विवाद कम होंगे। ये नियम गजट में प्रकाशित होने की तारीख से लागू माने जाएंगे।