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Chandigarh-Haryana News: चार साल तक खाली रहे विश्वविद्यालय के नए पद माने जाएंगे समाप्त
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चार साल बाद पद भरने के लिए वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी, खर्च कम करने के लिए सरकार ने बदले नियम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े नए पदों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आर्थिक बचत के लिए नियमों में बदलाव करते हुए तय किया है कि वित्त विभाग की मंजूरी से सृजित किए गए नए पद अगर चार साल तक नहीं भरे जाते हैं तो उन्हें समाप्त माना जाएगा। हालांकि चार साल से ज्यादा समय से खाली पद को भरने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। अगर किसी विश्वविद्यालय या संबंधित प्रशासनिक विभाग को ऐसे पद की जरूरत है तो उसका मामला वित्त विभाग को भेजा जा सकेगा। वित्त विभाग मामले की जरूरत, परिस्थितियों और औचित्य को देखते हुए पद को भरने की मंजूरी देने पर फैसला करेगा।
वित्त विभाग ने 17 अगस्त 2026 को जारी आदेश में यह व्यवस्था लागू की है। इसके अनुसार किसी राज्य विश्वविद्यालय में वित्त विभाग की मंजूरी की तारीख से चार साल तक कोई नया पद खाली रहता है तो उसे समाप्त माना जाएगा। वित्त विभाग ने यह फैसला 6 फरवरी 2023 को जारी आर्थिक बचत संबंधी निर्देशों की समीक्षा के बाद लिया है।
इसलिए लिया गया यह निर्णय
इस फैसले का उद्देश्य लंबे समय से खाली पड़े उन नए पदों की समीक्षा करना है जिनकी जरूरत के आधार पर मंजूरी तो दी गई थी लेकिन वर्षों तक उन पर भर्ती नहीं हो सकी। इससे सरकार को अनावश्यक रूप से स्वीकृत पदों और उनसे जुड़े संभावित खर्च की समीक्षा करने में मदद मिलेगी। यह आदेश हरियाणा के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजा गया है। अब विश्वविद्यालयों को चार साल से अधिक समय से खाली पड़े ऐसे पदों को भरने से पहले वित्त विभाग से अलग से मंजूरी लेनी होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े नए पदों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आर्थिक बचत के लिए नियमों में बदलाव करते हुए तय किया है कि वित्त विभाग की मंजूरी से सृजित किए गए नए पद अगर चार साल तक नहीं भरे जाते हैं तो उन्हें समाप्त माना जाएगा। हालांकि चार साल से ज्यादा समय से खाली पद को भरने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। अगर किसी विश्वविद्यालय या संबंधित प्रशासनिक विभाग को ऐसे पद की जरूरत है तो उसका मामला वित्त विभाग को भेजा जा सकेगा। वित्त विभाग मामले की जरूरत, परिस्थितियों और औचित्य को देखते हुए पद को भरने की मंजूरी देने पर फैसला करेगा।
वित्त विभाग ने 17 अगस्त 2026 को जारी आदेश में यह व्यवस्था लागू की है। इसके अनुसार किसी राज्य विश्वविद्यालय में वित्त विभाग की मंजूरी की तारीख से चार साल तक कोई नया पद खाली रहता है तो उसे समाप्त माना जाएगा। वित्त विभाग ने यह फैसला 6 फरवरी 2023 को जारी आर्थिक बचत संबंधी निर्देशों की समीक्षा के बाद लिया है।
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इसलिए लिया गया यह निर्णय
इस फैसले का उद्देश्य लंबे समय से खाली पड़े उन नए पदों की समीक्षा करना है जिनकी जरूरत के आधार पर मंजूरी तो दी गई थी लेकिन वर्षों तक उन पर भर्ती नहीं हो सकी। इससे सरकार को अनावश्यक रूप से स्वीकृत पदों और उनसे जुड़े संभावित खर्च की समीक्षा करने में मदद मिलेगी। यह आदेश हरियाणा के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजा गया है। अब विश्वविद्यालयों को चार साल से अधिक समय से खाली पड़े ऐसे पदों को भरने से पहले वित्त विभाग से अलग से मंजूरी लेनी होगी।
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