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Chandigarh-Haryana News: नहर में गिरकर किसान की मौत, परिवार को 5 लाख मुआवजे का आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नहर से पानी का निकास बंद करते समय डूबकर जान गंवाने वाले किसान के परिवार को मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना-2013 के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि योजना किसानों के हित में बनाई गई एक लाभकारी योजना है इसलिए इसका संकीर्ण या तकनीकी आधार पर अर्थ नहीं निकाल सकते।
भिवानी निवासी कमला ने 4 फरवरी 2025 और 27 जून 2025 को पारित उन आदेशों को चुनौती दी थी जिनमें उनके पति की मौत के मामले में मुआवजा देने से इन्कार कर दिया गया था। कमला के पति राम कुमार 30 जुलाई 2024 की रात करीब 10 बजे अपने खेत के पास नहर से पानी के निकास को बंद करने का प्रयास कर रहे थे। उस समय नहर में पानी का बहाव काफी तेज था और इसी दौरान वह संतुलन खोकर नहर में गिर गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था। मार्केट कमेटी सिवानी के सचिव ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नहर का मोघा बंद करना सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का कार्य है और मृतक उस समय कृषि कार्य में संलग्न नहीं था। बाद में हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सचिव ने भी अपील खारिज कर दी।
हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि मृतक ने आत्महत्या नहीं की थी लेकिन यह तर्क दिया गया कि नहर से पानी का बहाव बंद करना उसका दायित्व नहीं था। कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना-2013 का उद्देश्य दुर्घटनाओं में किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना में विभिन्न परिस्थितियों को शामिल किया गया है और इसका उद्देश्य पीड़ित परिवारों को राहत देना है न कि उन्हें तकनीकी आधार पर लाभ से वंचित करना। रात के समय जब खेतों में पानी का तेज बहाव था तब किसान का स्वयं मोघा बंद करने का प्रयास करना अस्वाभाविक नहीं माना जा सकता। उस समय उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती थी कि वह पहले सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बुलाए।
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चंडीगढ़। नहर से पानी का निकास बंद करते समय डूबकर जान गंवाने वाले किसान के परिवार को मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना-2013 के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि योजना किसानों के हित में बनाई गई एक लाभकारी योजना है इसलिए इसका संकीर्ण या तकनीकी आधार पर अर्थ नहीं निकाल सकते।
भिवानी निवासी कमला ने 4 फरवरी 2025 और 27 जून 2025 को पारित उन आदेशों को चुनौती दी थी जिनमें उनके पति की मौत के मामले में मुआवजा देने से इन्कार कर दिया गया था। कमला के पति राम कुमार 30 जुलाई 2024 की रात करीब 10 बजे अपने खेत के पास नहर से पानी के निकास को बंद करने का प्रयास कर रहे थे। उस समय नहर में पानी का बहाव काफी तेज था और इसी दौरान वह संतुलन खोकर नहर में गिर गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था। मार्केट कमेटी सिवानी के सचिव ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नहर का मोघा बंद करना सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का कार्य है और मृतक उस समय कृषि कार्य में संलग्न नहीं था। बाद में हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सचिव ने भी अपील खारिज कर दी।
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हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि मृतक ने आत्महत्या नहीं की थी लेकिन यह तर्क दिया गया कि नहर से पानी का बहाव बंद करना उसका दायित्व नहीं था। कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना-2013 का उद्देश्य दुर्घटनाओं में किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना में विभिन्न परिस्थितियों को शामिल किया गया है और इसका उद्देश्य पीड़ित परिवारों को राहत देना है न कि उन्हें तकनीकी आधार पर लाभ से वंचित करना। रात के समय जब खेतों में पानी का तेज बहाव था तब किसान का स्वयं मोघा बंद करने का प्रयास करना अस्वाभाविक नहीं माना जा सकता। उस समय उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती थी कि वह पहले सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बुलाए।