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Haryana: गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण की ऑडिट रिपोर्ट पर एक्शन में सैनी सरकार, छह अधिकारी निलंबित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 03 Jun 2026 04:20 PM IST
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सार
प्राधिकरण की टिप्पणी के बाद लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के तीन अधिकारियों व विकास एवं पंचायत विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न विभागों के कुछ अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
सीएम नायब सैनी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने राज्य के विभिन्न इंजीनियरिंग विभागों में गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण द्वारा किए गए तकनीकी ऑडिट के दौरान सामने आई कमियों और अनियमितताओं को गंभीरता से लिया है।
प्राधिकरण की टिप्पणी के बाद लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के तीन अधिकारियों व विकास एवं पंचायत विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न विभागों के कुछ अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। हरियाणा पुलिस हाउसिंग काॅरपोरेशन के एक मामले में कार्य की गुणवत्ता संबंधी कमियों के कारण संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध रिकवरी की कार्रवाई भी शुरू की गई है।
पिछले दिनों चंडीगढ़ में गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण द्वारा किए जाने वाले तकनीकी ऑडिट को सभी विभाग गंभीरता से लें। साथ ही परियोजनाओं की योजना, डिजाइन, निर्माण और रखरखाव के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
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बैठक में प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने बताया कि उनकी टीमों ने भवन, सड़क, सिंचाई, जनस्वास्थ्य व विद्युत क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं का तकनीकी ऑडिट किया है। इसमें लोक निर्माण विभाग की 18 परियोजनाएं, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की 5, सिंचाई विभाग की 4, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की 14, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम की 3, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की 3, हरियाणा पुलिस हाउसिंग काॅर्पोरेशन की एक, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड की 7, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की 4, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की एक, शहरी स्थानीय निकाय विभाग की 2 परियोजनाएं व विकास एवं पंचायत विभाग की 2 परियोजनाओं का ऑडिट किया गया।
ऑडिट के दौरान साक्ष्यों के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं में पाई गई कमियों और गुणवत्ता संबंधी खामियों को दर्शाया गया। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्राधिकरण द्वारा इंगित प्रत्येक कमी को दूर करने के लिए तत्काल सुधारात्मक एवं उपचारात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने तथा जहां आवश्यक हो, ठेकेदारों से रिकवरी करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि कई विभाग पहले ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
बैठक में सीएम ने कहा कि सलाहकार केवल तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे, जबकि परियोजनाओं के डिजाइन और डीपीआर की अंतिम जिम्मेदारी विभागों की ही होगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि निर्धारित श्रेणी की सभी परियोजनाओं में थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एंड मॉनिटरिंग एजेंसियों की नियुक्ति अनिवार्य रूप से की जाए। हालांकि, परियोजना की गुणवत्ता के लिए अंतिम जिम्मेदारी संबंधित विभागों की ही रहेगी। आगामी मानसून को देखते हुए उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नगर निगम क्षेत्रों, एचएसवीपी सेक्टरों और ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों के किनारे नालों के निर्माण के लिए जिम्मेदारियों का निर्धारण शीघ्र करने के निर्देश दिए।
प्राधिकरण की टिप्पणी के बाद लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के तीन अधिकारियों व विकास एवं पंचायत विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न विभागों के कुछ अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। हरियाणा पुलिस हाउसिंग काॅरपोरेशन के एक मामले में कार्य की गुणवत्ता संबंधी कमियों के कारण संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध रिकवरी की कार्रवाई भी शुरू की गई है।
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पिछले दिनों चंडीगढ़ में गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण द्वारा किए जाने वाले तकनीकी ऑडिट को सभी विभाग गंभीरता से लें। साथ ही परियोजनाओं की योजना, डिजाइन, निर्माण और रखरखाव के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
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बैठक में प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने बताया कि उनकी टीमों ने भवन, सड़क, सिंचाई, जनस्वास्थ्य व विद्युत क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं का तकनीकी ऑडिट किया है। इसमें लोक निर्माण विभाग की 18 परियोजनाएं, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की 5, सिंचाई विभाग की 4, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की 14, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम की 3, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की 3, हरियाणा पुलिस हाउसिंग काॅर्पोरेशन की एक, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड की 7, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की 4, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की एक, शहरी स्थानीय निकाय विभाग की 2 परियोजनाएं व विकास एवं पंचायत विभाग की 2 परियोजनाओं का ऑडिट किया गया।
ऑडिट के दौरान साक्ष्यों के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं में पाई गई कमियों और गुणवत्ता संबंधी खामियों को दर्शाया गया। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्राधिकरण द्वारा इंगित प्रत्येक कमी को दूर करने के लिए तत्काल सुधारात्मक एवं उपचारात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने तथा जहां आवश्यक हो, ठेकेदारों से रिकवरी करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि कई विभाग पहले ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
बैठक में सीएम ने कहा कि सलाहकार केवल तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे, जबकि परियोजनाओं के डिजाइन और डीपीआर की अंतिम जिम्मेदारी विभागों की ही होगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि निर्धारित श्रेणी की सभी परियोजनाओं में थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एंड मॉनिटरिंग एजेंसियों की नियुक्ति अनिवार्य रूप से की जाए। हालांकि, परियोजना की गुणवत्ता के लिए अंतिम जिम्मेदारी संबंधित विभागों की ही रहेगी। आगामी मानसून को देखते हुए उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नगर निगम क्षेत्रों, एचएसवीपी सेक्टरों और ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों के किनारे नालों के निर्माण के लिए जिम्मेदारियों का निर्धारण शीघ्र करने के निर्देश दिए।