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Haryana: बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एनसीआरबी रिपोर्ट पर लिया स्वत: संज्ञान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 20 May 2026 11:32 AM IST
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सार

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के विरुद्ध अपराधों के 7,547 मामले दर्ज हुए, जो वर्ष 2023 की तुलना में करीब 17.9 प्रतिशत अधिक हैं।

Haryana Human Rights Commission Takes Strict Stance on Rising Crimes Against Children NCRB Report
हरियाणा मानवाधिकार आयोग - फोटो : फाइल
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विस्तार

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने राज्य में बच्चों के विरुद्ध लगातार बढ़ रहे अपराधों पर गंभीर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी-2024) की रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया है। 
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आयोग ने कहा कि हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराधों की स्थिति “अत्यंत चिंताजनक” है और यह राज्य के बाल संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा कि एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के विरुद्ध अपराधों के 7,547 मामले दर्ज हुए, जो वर्ष 2023 की तुलना में करीब 17.9 प्रतिशत अधिक हैं। रिपोर्ट में प्रति एक लाख बाल जनसंख्या पर अपराध दर 82.8 बताई गई है, जो देश में सबसे अधिक है।
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आयोग ने कहा कि इन मामलों में हत्या, बलात्कार, भेदनात्मक यौन उत्पीड़न, अपहरण, मानव तस्करी, बाल विवाह, परित्याग, भ्रूण हत्या और पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज अपराध शामिल हैं। विशेष रूप से बालिकाओं से जुड़े पोक्सो मामलों में वृद्धि को आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और मानसिक विकास के लिए गंभीर खतरा बताया।

आयोग ने टिप्पणी की कि संवैधानिक और वैधानिक संरक्षणों के बावजूद बच्चों के खिलाफ हिंसा, शोषण और दुर्व्यवहार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि निवारक तंत्र, निगरानी प्रणाली और संस्थागत जवाबदेही अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। आयोग ने कहा कि स्कूल, छात्रावास, बाल देखभाल संस्थान और अन्य संस्थाएं बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में कमजोर साबित हो रही हैं।

इन विभागों से मांगी गई रिपोर्ट

आयोग ने गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विद्यालय शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक, हरियाणा राज्य बाल संरक्षण सोसायटी तथा विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के नोडल अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम, जांच, दोषसिद्धि, पुनर्वास, परामर्श सेवाओं, स्कूलों में सुरक्षा उपायों और बाल संरक्षण तंत्र की स्थिति का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।

आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
 
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