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ऑनलाइन पोर्टल के विरोध में स्वास्थ्य कर्मियों का मोर्चा: एसोसिएशन का आरोप, संसाधन दिए बिना ऑनलाइन काम का दबाव
Sun, 12 Jul 2026 03:03 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 12 Jul 2026 03:03 PM IST
सार
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से धमकी भरे पत्राचार पर तत्काल रोक लगाने तथा कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।
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हरियाणा स्वास्थ्य विभाग
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा ने ऑनलाइन स्वास्थ्य पोर्टलों के संचालन को लेकर कर्मचारियों पर बनाए जा रहे दबाव और कार्रवाई की चेतावनियों का विरोध किया है। एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष शर्मिला देवी और महासचिव सहदेव आर्य ने कहा कि आवश्यक मानव संसाधन, तकनीकी सुविधाएं और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किए बिना कर्मचारियों पर ऑनलाइन कार्य थोपना अनुचित है।
एसोसिएशन के अनुसार, 25 अक्तूबर 2025 से ऑनलाइन कार्य का बहिष्कार जारी है। इसके बावजूद विभिन्न जिलों में कर्मचारियों को सेवा समाप्त करने, वेतन रोकने और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि पहले ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाए और आवश्यक कंप्यूटर स्टाफ उपलब्ध कराया जाए।
एसोसिएशन ने यह भी दावा किया कि कंप्यूटर आधारित कार्य एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया, सेवा नियमों और जिम्मेदारियों का हिस्सा नहीं है। सरकार को चाहिए कि कंप्यूटर डिप्लोमा धारक युवाओं की नियुक्ति कर ऑनलाइन पोर्टलों का संचालन कराया जाए। संगठन ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के बावजूद एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारी स्वास्थ्य योजनाओं का संचालन कर रहे हैं।
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एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से धमकी भरे पत्राचार पर तत्काल रोक लगाने तथा कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारियों में बढ़ते असंतोष की जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी।
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एसोसिएशन के अनुसार, 25 अक्तूबर 2025 से ऑनलाइन कार्य का बहिष्कार जारी है। इसके बावजूद विभिन्न जिलों में कर्मचारियों को सेवा समाप्त करने, वेतन रोकने और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि पहले ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाए और आवश्यक कंप्यूटर स्टाफ उपलब्ध कराया जाए।
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एसोसिएशन ने यह भी दावा किया कि कंप्यूटर आधारित कार्य एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया, सेवा नियमों और जिम्मेदारियों का हिस्सा नहीं है। सरकार को चाहिए कि कंप्यूटर डिप्लोमा धारक युवाओं की नियुक्ति कर ऑनलाइन पोर्टलों का संचालन कराया जाए। संगठन ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के बावजूद एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारी स्वास्थ्य योजनाओं का संचालन कर रहे हैं।
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एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से धमकी भरे पत्राचार पर तत्काल रोक लगाने तथा कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारियों में बढ़ते असंतोष की जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी।