फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Human Rights Commission takes a stern view of newborn death due to lack of ventilator

Haryana: वेंटिलेटर के अभाव में नवजात की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, 1 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट

Sun, 12 Jul 2026 03:17 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Sun, 12 Jul 2026 03:17 PM IST
सार

आयोग के अनुसार, हिसार के सिविल अस्पताल में जन्मे नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर वेंटिलेटर की जरूरत थी, लेकिन वहां उपलब्ध एकमात्र नवजात वेंटिलेटर पहले से उपयोग में था।

विज्ञापन
Human Rights Commission takes a stern view of newborn death due to lack of ventilator
हरियाणा मानवाधिकार आयोग - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध न होने के कारण नवजात की मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा कि यदि समाचारों में प्रकाशित तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक नवजात की मौत नहीं, बल्कि राज्य की आपातकालीन नवजात स्वास्थ्य सेवाओं, रेफरल व्यवस्था और अस्पतालों के बीच समन्वय की गंभीर संस्थागत विफलता का मामला है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति ललित बत्रा (सेवानिवृत) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक, पीजीआईएमएस रोहतक, महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा, सिविल सर्जन हिसार और जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड हिसार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी।
विज्ञापन


आयोग के अनुसार, हिसार के सिविल अस्पताल में जन्मे नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर वेंटिलेटर की जरूरत थी, लेकिन वहां उपलब्ध एकमात्र नवजात वेंटिलेटर पहले से उपयोग में था। इसके बाद बच्चे को अग्रोहा और फिर पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया गया, जहां भी आवश्यक सुविधा नहीं मिल सकी। अंततः निजी अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आयोग ने यह भी गंभीर माना कि हिसार अस्पताल में कई वेंटिलेटर अनुपयोगी या खराब पड़े होने के आरोप सामने आए हैं। साथ ही बिना यह सुनिश्चित किए कि रेफर किए गए अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध है, मरीज को भेजना आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की गंभीर कमी दर्शाता है।


आयोग ने राज्य में एनआईसीयू, वेंटिलेटर, रियल-टाइम रेफरल प्रणाली, उपकरणों की कार्यशील स्थिति और पिछले दो वर्षों के ऑडिट का पूरा ब्योरा मांगा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी प्रकार की प्रशासनिक कमी स्वीकार्य नहीं हो सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed