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Chandigarh-Haryana News: गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना को हाईकोर्ट की हरी झंडी, 489 पेड़ काटने की दी अनुमति
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- पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, कहा-शहर को कंक्रीट का जंगल मत बनाओ
- आक्सीजन नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी इस प्रोजेक्ट में मदद नहीं करेगा आपकी
चंडीगढ़। गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने इसके लिए 489 पेड़ों की कटाई को हरी झंडी दे दी है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार कर शहर को कंक्रीट का जंगल बनने नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने दो टूक कहा कि यदि सांस लेने के लिए आक्सीजन ही नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी प्रोजेक्ट में आपकी मदद नहीं करेगा।
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) ने मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए और 489 पेड़ काटने की अनुमति के लिए अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट को बताया कि यह 5 हजार करोड़ रुपये की लगभग 28 किमी. लंबी विस्तार परियोजना है। परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक से फंडिंग को लेकर बातचीत चल रही है। कोर्ट को बताया कि यदि प्रोजेक्ट में देरी हुई तो इसकी लागत 7 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। साथ ही इससे पहले करीब 1700 पेड़ों की कटाई हो चुकी है। इन पेड़ों की प्रतिपूर्ति के लिए 10 गुना पौधे लगाए जाएंगे और अभी तक 7300 पौधे लगाए गए हैं। यह पौधरोपण केएमपी हाईवे के पास लगभग 21 किलोमीटर दूर किया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अदालत पहले ही कह चुकी है कि प्रतिपूरक पौधरोपण यथासंभव पांच किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि शहर को कंक्रीट जंगल बनने से बचाया जाए।
याची ने कहा कि गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। कोर्ट ने कहा कि मेट्रो का ट्रैक एलिवेटेड है और पिलर सीमित जगह लेते हैं तो फिर इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत क्यों है। कोर्ट ने कटाई को मंजूरी देते हुए कहा कि प्रयास किया जाए कि न्यूनतम पेड़ काटे जाएं। अदालत ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व और सार्वजनिक हित को देखते हुए सशर्त राहत देते हुए 489 पेड़ों की कटाई पर लगी रोक में आंशिक ढील दे दी। कोर्ट ने जीएमआरएल को पहले किए गए वनीकरण कार्य की मासिक सर्वाइवल रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई गई या समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो मामले को स्वत: सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाएगी।
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- आक्सीजन नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी इस प्रोजेक्ट में मदद नहीं करेगा आपकी
चंडीगढ़। गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने इसके लिए 489 पेड़ों की कटाई को हरी झंडी दे दी है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार कर शहर को कंक्रीट का जंगल बनने नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने दो टूक कहा कि यदि सांस लेने के लिए आक्सीजन ही नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी प्रोजेक्ट में आपकी मदद नहीं करेगा।
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) ने मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए और 489 पेड़ काटने की अनुमति के लिए अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट को बताया कि यह 5 हजार करोड़ रुपये की लगभग 28 किमी. लंबी विस्तार परियोजना है। परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक से फंडिंग को लेकर बातचीत चल रही है। कोर्ट को बताया कि यदि प्रोजेक्ट में देरी हुई तो इसकी लागत 7 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। साथ ही इससे पहले करीब 1700 पेड़ों की कटाई हो चुकी है। इन पेड़ों की प्रतिपूर्ति के लिए 10 गुना पौधे लगाए जाएंगे और अभी तक 7300 पौधे लगाए गए हैं। यह पौधरोपण केएमपी हाईवे के पास लगभग 21 किलोमीटर दूर किया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अदालत पहले ही कह चुकी है कि प्रतिपूरक पौधरोपण यथासंभव पांच किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि शहर को कंक्रीट जंगल बनने से बचाया जाए।
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याची ने कहा कि गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। कोर्ट ने कहा कि मेट्रो का ट्रैक एलिवेटेड है और पिलर सीमित जगह लेते हैं तो फिर इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत क्यों है। कोर्ट ने कटाई को मंजूरी देते हुए कहा कि प्रयास किया जाए कि न्यूनतम पेड़ काटे जाएं। अदालत ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व और सार्वजनिक हित को देखते हुए सशर्त राहत देते हुए 489 पेड़ों की कटाई पर लगी रोक में आंशिक ढील दे दी। कोर्ट ने जीएमआरएल को पहले किए गए वनीकरण कार्य की मासिक सर्वाइवल रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई गई या समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो मामले को स्वत: सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाएगी।