{"_id":"6974e577f05295b4d10331ef","slug":"high-court-settles-sub-inspector-recruitment-dispute-dismisses-petition-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1072-932646-2026-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: सब इंस्पेक्टर भर्ती विवाद का हाईकोर्ट ने किया निपटारा, याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: सब इंस्पेक्टर भर्ती विवाद का हाईकोर्ट ने किया निपटारा, याचिका खारिज
विज्ञापन
विज्ञापन
- सामाजिक व आर्थिक अंकों का लाभ लेने वाले अभ्यर्थी को राहत से हाईकोर्ट का इन्कार
- चयन प्रक्रिया की उत्तर कुंजी सहित अन्य आधार पर दी गई थी चुनौती
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर की भर्ती से जुड़े उत्तरकुंजी व अन्य विवाद का निपटारा करते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब चयन आयोग ने विशेषज्ञों की राय के आधार पर उत्तर कुंजी तय की है और उसमें कोई स्पष्ट त्रुटि सिद्ध नहीं हुई है तो अदालत उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।
याचिकाकर्ता अमित ने सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के तीन प्रश्नों की उत्तर कुंजी पर सवाल उठाए थे। परीक्षा प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण, शारीरिक माप और दस्तावेजों की जांच शामिल थी और मेरिट लिखित अंकों, अतिरिक्त योग्यता तथा सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के आधार पर तैयार की जानी थी। अमित ने 26 सितंबर 2021 को हुई लिखित परीक्षा में भाग लिया था। बाद में जारी उत्तर कुंजी पर आपत्तियां मांगी गई थीं, लेकिन उस समय उसने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। उसे बाद में चयनित भी कर लिया था और उसके कुल अंक 67.20 थे, जिनमें 5 अंक सामाजिक-आर्थिक श्रेणी के थे। बाद में जब शिकायतों के आधार पर दस्तावेजों की जांच हुई तो सामने आया कि अमित के पिता दिल्ली पुलिस में कार्यरत थे, इसके बावजूद उसने शपथ पत्र देकर यह दावा किया था कि उसके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है। इसी आधार पर उसके 5 अंक काट दिए गए और वह कट-आफ से नीचे चला गया। इसके बाद अमित ने तीन सवालों हरियाणा के पूर्व डीजीपी की मृत्यु, गेहूं बोने का तापमान और अनुच्छेद 370 हटाने की तारीख पर उत्तर-कुंजी को गलत बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने कहा कि पहले प्रश्न में आयोग का उत्तर सही है, दूसरे प्रश्न में यह एक तकनीकी विषय है जिसमें विशेषज्ञों की राय को बदला नहीं जा सकता और तीसरे प्रश्न में संसद ने 5 अगस्त 2019 को संशोधन पारित किया था, जबकि राष्ट्रपति की अधिसूचना 6 अगस्त को आई, इसलिए 5 अगस्त को सही माना गया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि उत्तर-कुंजी को केवल तब ही बदला जा सकता है जब वह स्पष्ट रूप से गलत सिद्ध हो, अन्यथा चयन संस्था की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
Trending Videos
- चयन प्रक्रिया की उत्तर कुंजी सहित अन्य आधार पर दी गई थी चुनौती
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर की भर्ती से जुड़े उत्तरकुंजी व अन्य विवाद का निपटारा करते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब चयन आयोग ने विशेषज्ञों की राय के आधार पर उत्तर कुंजी तय की है और उसमें कोई स्पष्ट त्रुटि सिद्ध नहीं हुई है तो अदालत उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।
याचिकाकर्ता अमित ने सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के तीन प्रश्नों की उत्तर कुंजी पर सवाल उठाए थे। परीक्षा प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण, शारीरिक माप और दस्तावेजों की जांच शामिल थी और मेरिट लिखित अंकों, अतिरिक्त योग्यता तथा सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के आधार पर तैयार की जानी थी। अमित ने 26 सितंबर 2021 को हुई लिखित परीक्षा में भाग लिया था। बाद में जारी उत्तर कुंजी पर आपत्तियां मांगी गई थीं, लेकिन उस समय उसने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। उसे बाद में चयनित भी कर लिया था और उसके कुल अंक 67.20 थे, जिनमें 5 अंक सामाजिक-आर्थिक श्रेणी के थे। बाद में जब शिकायतों के आधार पर दस्तावेजों की जांच हुई तो सामने आया कि अमित के पिता दिल्ली पुलिस में कार्यरत थे, इसके बावजूद उसने शपथ पत्र देकर यह दावा किया था कि उसके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है। इसी आधार पर उसके 5 अंक काट दिए गए और वह कट-आफ से नीचे चला गया। इसके बाद अमित ने तीन सवालों हरियाणा के पूर्व डीजीपी की मृत्यु, गेहूं बोने का तापमान और अनुच्छेद 370 हटाने की तारीख पर उत्तर-कुंजी को गलत बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने कहा कि पहले प्रश्न में आयोग का उत्तर सही है, दूसरे प्रश्न में यह एक तकनीकी विषय है जिसमें विशेषज्ञों की राय को बदला नहीं जा सकता और तीसरे प्रश्न में संसद ने 5 अगस्त 2019 को संशोधन पारित किया था, जबकि राष्ट्रपति की अधिसूचना 6 अगस्त को आई, इसलिए 5 अगस्त को सही माना गया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि उत्तर-कुंजी को केवल तब ही बदला जा सकता है जब वह स्पष्ट रूप से गलत सिद्ध हो, अन्यथा चयन संस्था की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन