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Chandigarh-Haryana News: सिविल विवाद में अवैध गिरफ्तारी पर मानवाधिकार आयोग सख्त
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आयोग ने जारी किया पुलिस अधिकारी को कारण बताओ नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भिवानी के थाना सदर में सिविल प्रकृति के विवाद के दौरान बीएनएसएस की धारा 126 व 170 का गलत इस्तेमाल कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसे मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बीएनएसएस की धारा 126 व 170 का उद्देश्य निवारक न्याय है न कि दंडात्मक और इन धाराओं को लागू करने के लिए आवश्यक शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होती हैं।
मामला भिवानी का है। इसमें दो भाइयों के बीच एक मामले को लेकर विवाद हो गया था। जस्टिस ललित बत्रा ने कहा कि मामला सिविल प्रकृति का है और दोनों पक्ष पुलिस स्टेशन में पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में मौजूद थे तो शांति भंग या किसी संज्ञेय अपराध की आशंका कैसे हो सकती है। पुलिस ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जांच में मामला सिविल प्रकृति का पाया गया। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग ने थाना सदर भिवानी के सहायक उप निरीक्षक वीरेंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पुलिस अधीक्षक भिवानी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि शिकायतकर्ता को मानव अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवजा क्यों न दिया जाए? संबंधित अधिकारी को अपना स्पष्टीकरण आयोग के जांच निदेशक के माध्यम से अगली सुनवाई की तिथि 25 फरवरी 2026 से एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भिवानी के थाना सदर में सिविल प्रकृति के विवाद के दौरान बीएनएसएस की धारा 126 व 170 का गलत इस्तेमाल कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसे मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बीएनएसएस की धारा 126 व 170 का उद्देश्य निवारक न्याय है न कि दंडात्मक और इन धाराओं को लागू करने के लिए आवश्यक शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होती हैं।
मामला भिवानी का है। इसमें दो भाइयों के बीच एक मामले को लेकर विवाद हो गया था। जस्टिस ललित बत्रा ने कहा कि मामला सिविल प्रकृति का है और दोनों पक्ष पुलिस स्टेशन में पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में मौजूद थे तो शांति भंग या किसी संज्ञेय अपराध की आशंका कैसे हो सकती है। पुलिस ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जांच में मामला सिविल प्रकृति का पाया गया। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग ने थाना सदर भिवानी के सहायक उप निरीक्षक वीरेंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पुलिस अधीक्षक भिवानी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि शिकायतकर्ता को मानव अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवजा क्यों न दिया जाए? संबंधित अधिकारी को अपना स्पष्टीकरण आयोग के जांच निदेशक के माध्यम से अगली सुनवाई की तिथि 25 फरवरी 2026 से एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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