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पंजाब में बड़ी पहल: अस्पताल में दवा नहीं तो खरीदकर मरीजों को देंगे सरकारी डॉक्टर, सीएम मान ने बताया ऐसा क्यों?

मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: Ankesh Kumar Updated Fri, 20 Mar 2026 08:18 PM IST
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सार

पंजाब सरकार ने मरीजों के लिए नई सुविधा लागू की है। ऐसे में अब सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले मरीजों को दवा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। क्योंकि डॉक्टर ही मरीजों को दवा उपलब्ध करवाएं। 

If medicines are unavailable in govt hospitals doctors will purchase and provide them to patients in Punjab
दवाएं - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

पंजाब सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बड़ी राहत देते हुए नई व्यवस्था लागू की है। अब यदि किसी अस्पताल में जरूरी दवा उपलब्ध नहीं होगी, तो मरीज को बाहर भेजने के बजाय अस्पताल स्टाफ ही बाजार से दवा खरीदकर उसे उपलब्ध कराएगा।

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मुख्यमंत्री भगवंत मान और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि मरीज को दवा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। यदि कोई डॉक्टर मरीज को बाहर से दवा लेने के लिए कहता है या लापरवाही करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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सीएम मान ने माना कि पहले डॉक्टरों द्वारा बाहर से दवा लिखने में कमीशन का खेल चलता था, जिससे मरीजों को दवाएं तीन गुना तक महंगी मिलती थीं। नई व्यवस्था से इस पर रोक लगेगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सभी अस्पतालों के एसएमओ को इसके लिए बजट उपलब्ध करा दिया गया है। जरूरत पड़ने पर एसएमओ की मंजूरी से दवा बाजार से खरीदी जाएगी और साथ ही उसकी डिमांड मुख्यालय को भेजी जाएगी, ताकि भविष्य में अस्पताल में ही उपलब्ध हो सके।

इसके अलावा यदि किसी कारण से अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड या अन्य जरूरी जांच नहीं हो पाती और मरीज को तुरंत जांच की जरूरत है, तो वह अधिकृत केंद्र से जांच करवा सकता है। ऐसे मामलों में मरीज द्वारा प्रस्तुत बिल का भुगतान भी सरकार करेगी।

विशेषज्ञों की तुरंत मिलेगी सलाह
सरकार ने अमृतसर, पटियाला और फरीदकोट में कार्डियक लैब स्थापित की हैं, जहां 24 घंटे हृदय रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे। इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें राज्यभर के डॉक्टर जुड़े हैं। मरीज की ईसीजी और रिपोर्ट तुरंत साझा कर विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी।

गंभीर स्थिति में मरीज को अमृतसर, पटियाला, फरीदकोट, लुधियाना और सेक्टर-32 में तुरंत इलाज दिया जाएगा। इस सुविधा का लाभ अब तक करीब 800 मरीज उठा चुके हैं। सरकार का कहना है कि एक बार मरीज अस्पताल पहुंच जाए, तो उसे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

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