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कचरा फेंका तो कैमरा पकड़ेगा: हरियाणा में बनेंगे इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर, ट्रैफिक तोड़ा तो कटेगा चालान
Tue, 11 Aug 2026 08:47 AM IST
Nivedita
अरुण शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
अरुण शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 11 Aug 2026 08:47 AM IST
सार
स्वच्छता, सुरक्षा और राजस्व बढ़ाने के लिए हरियाणा के सभी नगर निकायों में चरणबद्ध तरीके से इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) स्थापित किए जाएंगे। इसकी शुरुआत हिसार से होगी।
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सीसीटीवी
- फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में कचरा फैलाने और यातायात नियम तोड़ने वालों पर अब कैमरों से निगरानी होगी। केंद्र सरकार की अर्बन चैलेंज फंड योजना के तहत प्रदेश के सभी नगर निकाय क्षेत्रों में हाईपावर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
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चौक-चौराहों पर ट्रैफिक लाइट की व्यवस्था भी की जाएगी। कैमरों की निगरानी वाले क्षेत्रों में कोई व्यक्ति कचरा फेंकता या जलाता है अथवा प्रतिबंधित श्रेणी की पॉलिथीन का इस्तेमाल करता पाया गया तो नगर निकाय की ओर से जुर्माना लगाया जाएगा।
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वहीं, यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर ट्रैफिक पुलिस चालान करेगी। ऐसे चालानों से मिलने वाली राशि का 50 प्रतिशत नगर निकायों को मिलेगा।
स्वच्छता, सुरक्षा और राजस्व बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी नगर निकायों में चरणबद्ध तरीके से इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) स्थापित किए जाएंगे। प्रदेश में इसकी शुरुआत हिसार से होगी। यहां करीब डेढ़ से दो वर्ष में कमांड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की योजना है। इसके लिए नया भवन बनाने के साथ स्टाफ की नियुक्ति भी की जाएगी। सेंटर का संचालन पुलिस के सहयोग से होगा।
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योजना के तहत शहरों में स्थापित कमांड कंट्रोल सेंटर की कुल लागत का 10 प्रतिशत बजट हर साल कैमरों और ट्रैफिक लाइट के रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर हिसार में योजना पर करीब 170 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके अनुसार हर वर्ष करीब 17 करोड़ रुपये रखरखाव पर खर्च किए जा सकेंगे। संबंधित परियोजनाओं के प्रस्ताव स्थानीय निकायों के अधिकारी तैयार करेंगे। प्रदेश में कुल 87 नगर निकाय हैं। इनमें 11 नगर निगम, 25 नगर परिषद और 51 नगर पालिकाएं शामिल हैं।
राज्य सरकार से मिली मंजूरी : निदेशक
हरियाणा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के निदेशक शाश्वत सांगवान ने बताया कि केंद्र सरकार के बाद राज्य सरकार ने भी योजना को मंजूरी दे दी है। शहरों में लगाए जाने वाले कैमरों की खासियत यह होगी कि वे व्यापक क्षेत्र में निगरानी कर सकेंगे। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ कचरा फैलाने वालों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि अर्बन चैलेंज फंड के तहत परियोजना के लिए 25-25 प्रतिशत बजट केंद्र और राज्य सरकार देंगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि नगर निकायों को जुटानी होगी। निकायों को निवेश के साथ अपने राजस्व में भी बढ़ोतरी करनी होगी। योजना के तहत बाजारों के आसपास मल्टीलेवल पार्किंग, जल निकासी के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और पेयजल आपूर्ति के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।