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आंतरिक सड़कोंं पर चौड़ाई 4-5 मीटर, आपातकालीन स्थिति में कैसे पहुंचेगी राहत : हाईकोर्ट
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- स्टिल्ट प्लस-4 निर्माण को लेकर आयोगी की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
- प्रतिवादियों को दो सप्ताह में लिखित दलीलें पेश करने का जारी किया आदेश
चंडीगढ़। गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-एक और सेक्टर-28 में स्टिल्ट प्लस-4 निर्माण की अनुमति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आंतरिक सड़कों की वास्तविक चौड़ाई पर स्वतंत्र आयोग की रिपोर्ट पर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इन स्थितियों में आपातकाल के दौरान कैसे राहत पहुंच पाएगी। अदालत ने पक्षकारों को अंतरिम राहत से संबंधित लिखित दलीलें दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से आयोग की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण अंश पढ़कर सुनाए गए। उन्होंने बताया कि अदालत के पूर्व आदेशों के अनुपालन में आयोग ने 31 जनवरी को डीएलएफ फेज-एक और सेक्टर-28 की विभिन्न आंतरिक सड़कों का भौतिक निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के अनुसार कई सड़कों की दीवार से दीवार की चौड़ाई भले ही 10 से 12 मीटर है लेकिन वास्तविक मोटरेबल पक्के हिस्से की चौड़ाई अधिकांश स्थानों पर केवल चार से 4.8 मीटर पाई गई।
रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दौरान डीएलएफ फेज-1 के ए 31 क्षेत्र में सड़क की चौड़ाई लगभग 4.5 मीटर, ए-41 और ए-36 में करीब 4.6 मीटर और बाजार क्षेत्रों की सड़कों पर 4.5 से 4.8 मीटर दर्ज की गई। सेक्टर-28 के एक हिस्से में मोटरेबल चौड़ाई 3.9 मीटर और दूसरे स्थान पर करीब चार मीटर पाई गई जबकि कुल सड़क चौड़ाई 10 मीटर होने के बावजूद उपयोगी मार्ग काफी संकरा हो गया है। अदालत को बताया कि अधिकांश सड़कों के दोनों ओर वाहनों की पार्किंग, ग्रीन बेल्ट की घेराबंदी, प्लांटर और अन्य अतिक्रमण के कारण वास्तविक उपयोगी चौड़ाई कई जगह चार मीटर से भी कम रह जाती है जिससे दो वाहन एक साथ नहीं गुजर सकते।
याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि कई अन्य ब्लाकों की तस्वीरें और भी संकरी गलियों, चार से छह मंजिला इमारतों को दर्शाती हैं। ऐसे हालात में आग या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में दमकल और आपात सेवाओं की पहुंच लगभग असंभव हो सकती है। याची ने कहा कि 16.5 मीटर ऊंचाई तक आवासीय इमारतों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र की सीमा बढ़ाने से राष्ट्रीय भवन संहिता में निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों का प्रभाव कमजोर हुआ है। साथ ही स्व प्रमाणन व्यवस्था के कारण निर्माण पूर्णता प्रमाणपत्र बिना भौतिक सत्यापन के जारी हो रहे हैं जिससे अवैध निर्माण बढ़े हैं।
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- प्रतिवादियों को दो सप्ताह में लिखित दलीलें पेश करने का जारी किया आदेश
चंडीगढ़। गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-एक और सेक्टर-28 में स्टिल्ट प्लस-4 निर्माण की अनुमति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आंतरिक सड़कों की वास्तविक चौड़ाई पर स्वतंत्र आयोग की रिपोर्ट पर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इन स्थितियों में आपातकाल के दौरान कैसे राहत पहुंच पाएगी। अदालत ने पक्षकारों को अंतरिम राहत से संबंधित लिखित दलीलें दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से आयोग की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण अंश पढ़कर सुनाए गए। उन्होंने बताया कि अदालत के पूर्व आदेशों के अनुपालन में आयोग ने 31 जनवरी को डीएलएफ फेज-एक और सेक्टर-28 की विभिन्न आंतरिक सड़कों का भौतिक निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के अनुसार कई सड़कों की दीवार से दीवार की चौड़ाई भले ही 10 से 12 मीटर है लेकिन वास्तविक मोटरेबल पक्के हिस्से की चौड़ाई अधिकांश स्थानों पर केवल चार से 4.8 मीटर पाई गई।
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रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दौरान डीएलएफ फेज-1 के ए 31 क्षेत्र में सड़क की चौड़ाई लगभग 4.5 मीटर, ए-41 और ए-36 में करीब 4.6 मीटर और बाजार क्षेत्रों की सड़कों पर 4.5 से 4.8 मीटर दर्ज की गई। सेक्टर-28 के एक हिस्से में मोटरेबल चौड़ाई 3.9 मीटर और दूसरे स्थान पर करीब चार मीटर पाई गई जबकि कुल सड़क चौड़ाई 10 मीटर होने के बावजूद उपयोगी मार्ग काफी संकरा हो गया है। अदालत को बताया कि अधिकांश सड़कों के दोनों ओर वाहनों की पार्किंग, ग्रीन बेल्ट की घेराबंदी, प्लांटर और अन्य अतिक्रमण के कारण वास्तविक उपयोगी चौड़ाई कई जगह चार मीटर से भी कम रह जाती है जिससे दो वाहन एक साथ नहीं गुजर सकते।
याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि कई अन्य ब्लाकों की तस्वीरें और भी संकरी गलियों, चार से छह मंजिला इमारतों को दर्शाती हैं। ऐसे हालात में आग या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में दमकल और आपात सेवाओं की पहुंच लगभग असंभव हो सकती है। याची ने कहा कि 16.5 मीटर ऊंचाई तक आवासीय इमारतों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र की सीमा बढ़ाने से राष्ट्रीय भवन संहिता में निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों का प्रभाव कमजोर हुआ है। साथ ही स्व प्रमाणन व्यवस्था के कारण निर्माण पूर्णता प्रमाणपत्र बिना भौतिक सत्यापन के जारी हो रहे हैं जिससे अवैध निर्माण बढ़े हैं।