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Chandigarh-Haryana News: हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीजों की जानकारी देना अब अनिवार्य
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निजी संस्थानों ने जानकारी नहीं दी तो होगी कड़ी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में अब अगर किसी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम या जांच लैब में हेपेटाइटिस-बी या सी का मरीज मिलता है तो उसकी जानकारी सरकार को देना जरूरी होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस नियम को सख्ती से लागू कर दिया है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग को अधिकतर केसों की जानकारी सिर्फ सरकारी अस्पतालों से ही मिलती थी। निजी स्वास्थ्य संस्थानों की ओर से केसों की जानकारी नहीं दी जाती थी।
हेपेटाइटिस बी व सी एक अधिसूचित रोग है। इसके बावजूद निजी संस्थान इसकी जानकारी नहीं दे रहे थे। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा की ओर से सभी सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। अब सरकारी और निजी सभी स्वास्थ्य संस्थानों को हर हफ्ते तय समय पर मरीजों की रिपोर्ट देनी होगी। अगर कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग एक नया डिजिटल रजिस्टर भी तैयार करेगा जिसमें मरीजों की पूरी जानकारी जैसे उम्र, लिंग, जिला और जोखिम के कारण दर्ज किए जाएंगे। इससे बीमारी पर नजर रखना आसान होगा। खास ध्यान गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं पर दिया जाएगा। अगर कोई गर्भवती महिला हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाई जाती है तो उसे विशेष निगरानी में रखा जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चे को जन्म के 24 घंटे के अंदर जरूरी टीका और दवा मिल जाए ताकि मां से बच्चे में संक्रमण न फैले। इसके अलावा गर्भवती महिला के परिवार के सदस्यों की भी जांच कराई जाएगी और पूरे टीकाकरण पर नजर रखी जाएगी। मालूम हो कि पलवल के कुछ इलाकों में हेपेटाइटिस के केस आए थे। इससे छह लोगों की मौत हो गई थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में अब अगर किसी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम या जांच लैब में हेपेटाइटिस-बी या सी का मरीज मिलता है तो उसकी जानकारी सरकार को देना जरूरी होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस नियम को सख्ती से लागू कर दिया है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग को अधिकतर केसों की जानकारी सिर्फ सरकारी अस्पतालों से ही मिलती थी। निजी स्वास्थ्य संस्थानों की ओर से केसों की जानकारी नहीं दी जाती थी।
हेपेटाइटिस बी व सी एक अधिसूचित रोग है। इसके बावजूद निजी संस्थान इसकी जानकारी नहीं दे रहे थे। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा की ओर से सभी सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। अब सरकारी और निजी सभी स्वास्थ्य संस्थानों को हर हफ्ते तय समय पर मरीजों की रिपोर्ट देनी होगी। अगर कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
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स्वास्थ्य विभाग एक नया डिजिटल रजिस्टर भी तैयार करेगा जिसमें मरीजों की पूरी जानकारी जैसे उम्र, लिंग, जिला और जोखिम के कारण दर्ज किए जाएंगे। इससे बीमारी पर नजर रखना आसान होगा। खास ध्यान गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं पर दिया जाएगा। अगर कोई गर्भवती महिला हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाई जाती है तो उसे विशेष निगरानी में रखा जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चे को जन्म के 24 घंटे के अंदर जरूरी टीका और दवा मिल जाए ताकि मां से बच्चे में संक्रमण न फैले। इसके अलावा गर्भवती महिला के परिवार के सदस्यों की भी जांच कराई जाएगी और पूरे टीकाकरण पर नजर रखी जाएगी। मालूम हो कि पलवल के कुछ इलाकों में हेपेटाइटिस के केस आए थे। इससे छह लोगों की मौत हो गई थी।