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अनपढ़ याची के अंग्रेजी साइन: अवैध खनन याचिका का रहस्य गहराया, हाईकोर्ट ने कहा-CBI तीन माह में पूरी करे जांच

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 12 Jun 2026 01:39 PM IST
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सार

हाईकोर्ट ने कहा कि गंभीर आरोपों वाली याचिका दायर कर बाद में उसे वापस लेने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की ओर संकेत करती है। इसी के चलते हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।

Mystery deepens over illegal mining plea High Court orders CBI to complete probe within three months
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अवैध खनन के खिलाफ दायर याचिका को लेकर उठे सवालों की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के हाथ में पहुंच गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। कोर्ट ने तीन माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। 


दरअसल मामले में संदेह तब पैदा हुआ जब याचिका वापस लेने का प्रयास किया गया और कोर्ट ने पाया कि याची के साइन अंग्रेजी में हैं।

महेंद्रगढ़ के बाखरीजा गांव के निवासी अशोक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि एक निजी खनन कंपनी पर्यावरणीय मंजूरी, खनन योजना और वैधानिक नियमों की अनदेखी कर अवैध खनन कर रही है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता के घर के नजदीक भी खनन गतिविधियां चल रही हैं और इसके लिए मुआवजा दिलाने सहित कार्रवाई की मांग की गई थी। 
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मामला अरावली क्षेत्र में अवैध खनन से मिलता-जुलता था। लेकिन इसी बीच याचिकाकर्ता की ओर से अचानक याचिका वापस लेने की इच्छा जताई गई, जिससे अदालत को संदेह हुआ। कोर्ट ने याची को तलब किया तो उसने खुद को निरक्षर बताया। वह यह तक नहीं बता सका कि याचिका में क्या लिखा है, किसने तैयार करवाई और उसने इसे क्यों दायर किया।
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अदालत ने यह भी पाया कि नए वकालतनामे पर उसके हस्ताक्षर हिंदी में थे, जबकि मूल याचिका पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए गए थे। अप्रैल के अंतरिम आदेश में खंडपीठ ने कहा था कि पूरा घटनाक्रम अत्यंत संदिग्ध है। 

अदालत ने यह भी कहा था कि गंभीर आरोपों वाली याचिका दायर कर बाद में उसे वापस लेने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की ओर संकेत करती है। इसी के चलते हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। मामले में अधिवक्ता कंवल गोयल को मौके का निरीक्षण करने के लिए नियुक्त कर चुका है। उनकी रिपोर्ट अब पक्षकारों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगी। 

अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि मुख्य याचिका का पूरा रिकॉर्ड रजिस्ट्रार जनरल की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाए और सीबीआई जब भी मांगे, उसे उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि वह अज्ञात लोगों द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल कर याचिकाएं दाखिल करने और उद्देश्य पूरा होने के बाद उन्हें वापस लेने की प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं करेगी।
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