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Chandigarh-Haryana News: तीन साल में बिजली के पुराने लोड की बहाली पर एससीसी नहीं लगेगा
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- 9.73 लाख उपभोक्ताओं को मिल सकेगा फायदा, एचईआरसी की नई अधिसूचना लागू
- तीन साल में एक बार लोड घटाने व एक बार बहाल करने की छूट, हर बदलाव के बाद छह माह का लॉक इन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में हाईटेंशन (एचटी) और बड़े लो टेंशन (एलटी) श्रेणी के करीब 9.73 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अब कोई उपभोक्ता बिजली लोड घटाने के बाद तीन वर्ष के भीतर अपनी मूल स्वीकृत क्षमता तक लोड बहाल कराता है तो उसे दो हजार रुपये प्रति किलोवाट के हिसाब से सर्विस कनेक्शन चार्ज (एससीसी) नहीं देना होगा। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की चौथी संशोधित अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही पूरे प्रदेश में लागू हो गई है।
प्रदेश में 8.47 लाख वाणिज्यिक और 1.26 लाख औद्योगिक उपभोक्ताओं को इस संशोधित अधिसूचना का फायदा मिलेगा। नए नियमों के अनुसार तीन वर्ष में केवल एक बार लोड घटाने और एक बार बहाल करने की अनुमति होगी। प्रत्येक बदलाव के बाद छह माह का लॉक-इन रहेगा। तीन वर्ष बाद लोड बहाली का आवेदन नया माना जाएगा। बिजली बिल बकाया, बिजली चोरी अथवा अनधिकृत उपयोग से जुड़े मामलों वाले उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ नहीं ले सकेंगे।
50 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले कनेक्शन एचटी और इससे कम क्षमता वाले एलटी श्रेणी में आते हैं। पहले लोड घटाने के बाद उसे दोबारा बहाल करने पर सेवा कनेक्शन शुल्क में कोई विशेष छूट नहीं थी। अब तीन वर्ष के भीतर मूल स्वीकृत लोड तक बहाली पर एससीसी नहीं लगेगा। हालांकि एडवांस कंजम्प्शन डिपॉजिट (एसीडी) और प्रोसेसिंग शुल्क नियमानुसार देय रहेंगे।
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प्रोसेसिंग शुल्क की अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये
यदि लोड घटाने पर वोल्टेज स्तर (एचटी/एलटी) में कोई बदलाव नहीं होता तो केवल प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा जिसकी अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये तय की गई है। एचटी से एलटी आपूर्ति चुनने पर घटाए गए लोड के अनुसार सेवा कनेक्शन शुल्क लगेगा। वहीं 11 केवी (एचटी) आपूर्ति जारी रखने पर केवल प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा जबकि मीटर, करंट ट्रांसफॉर्मर (सीटी) या अन्य मीटरिंग उपकरण बदलने का खर्च उपभोक्ता स्वयं वहन करेगा।
अतिरिक्त क्षमता के लिए शुल्क लागू
मूल स्वीकृत क्षमता से अधिक लोड लेने पर अतिरिक्त क्षमता के लिए लागू शुल्क देना होगा। इसका मतलब है कि यदि किसी उपभोक्ता का पहले स्वीकृत लोड 100 किलोवाट था और वह बाद में 120 किलोवाट करवाना चाहता है, तो अतिरिक्त 20 किलोवाट के लिए नियमानुसार सर्विस कनेक्शन शुल्क और अन्य लागू शुल्क देने होंगे। केवल मूल 100 किलोवाट तक की बहाली पर ही छूट मिलेगी।
नए नियमों का इस तरह मिलेगा फायदा
मान लीजिए किसी फैक्ट्री ने कारोबार कम होने पर 100 किलोवाट से लोड घटाकर 60 किलोवाट करा लिया। यदि अगले तीन वर्ष के भीतर उत्पादन बढ़ने पर वह फिर 100 किलोवाट लोड बहाल कराती है तो उसे सर्विस कनेक्शन शुल्क नहीं देना होगा जिससे हजारों रुपये की बचत होगी।
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- तीन साल में एक बार लोड घटाने व एक बार बहाल करने की छूट, हर बदलाव के बाद छह माह का लॉक इन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में हाईटेंशन (एचटी) और बड़े लो टेंशन (एलटी) श्रेणी के करीब 9.73 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अब कोई उपभोक्ता बिजली लोड घटाने के बाद तीन वर्ष के भीतर अपनी मूल स्वीकृत क्षमता तक लोड बहाल कराता है तो उसे दो हजार रुपये प्रति किलोवाट के हिसाब से सर्विस कनेक्शन चार्ज (एससीसी) नहीं देना होगा। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की चौथी संशोधित अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही पूरे प्रदेश में लागू हो गई है।
प्रदेश में 8.47 लाख वाणिज्यिक और 1.26 लाख औद्योगिक उपभोक्ताओं को इस संशोधित अधिसूचना का फायदा मिलेगा। नए नियमों के अनुसार तीन वर्ष में केवल एक बार लोड घटाने और एक बार बहाल करने की अनुमति होगी। प्रत्येक बदलाव के बाद छह माह का लॉक-इन रहेगा। तीन वर्ष बाद लोड बहाली का आवेदन नया माना जाएगा। बिजली बिल बकाया, बिजली चोरी अथवा अनधिकृत उपयोग से जुड़े मामलों वाले उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ नहीं ले सकेंगे।
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50 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले कनेक्शन एचटी और इससे कम क्षमता वाले एलटी श्रेणी में आते हैं। पहले लोड घटाने के बाद उसे दोबारा बहाल करने पर सेवा कनेक्शन शुल्क में कोई विशेष छूट नहीं थी। अब तीन वर्ष के भीतर मूल स्वीकृत लोड तक बहाली पर एससीसी नहीं लगेगा। हालांकि एडवांस कंजम्प्शन डिपॉजिट (एसीडी) और प्रोसेसिंग शुल्क नियमानुसार देय रहेंगे।
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प्रोसेसिंग शुल्क की अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये
यदि लोड घटाने पर वोल्टेज स्तर (एचटी/एलटी) में कोई बदलाव नहीं होता तो केवल प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा जिसकी अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये तय की गई है। एचटी से एलटी आपूर्ति चुनने पर घटाए गए लोड के अनुसार सेवा कनेक्शन शुल्क लगेगा। वहीं 11 केवी (एचटी) आपूर्ति जारी रखने पर केवल प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा जबकि मीटर, करंट ट्रांसफॉर्मर (सीटी) या अन्य मीटरिंग उपकरण बदलने का खर्च उपभोक्ता स्वयं वहन करेगा।
अतिरिक्त क्षमता के लिए शुल्क लागू
मूल स्वीकृत क्षमता से अधिक लोड लेने पर अतिरिक्त क्षमता के लिए लागू शुल्क देना होगा। इसका मतलब है कि यदि किसी उपभोक्ता का पहले स्वीकृत लोड 100 किलोवाट था और वह बाद में 120 किलोवाट करवाना चाहता है, तो अतिरिक्त 20 किलोवाट के लिए नियमानुसार सर्विस कनेक्शन शुल्क और अन्य लागू शुल्क देने होंगे। केवल मूल 100 किलोवाट तक की बहाली पर ही छूट मिलेगी।
नए नियमों का इस तरह मिलेगा फायदा
मान लीजिए किसी फैक्ट्री ने कारोबार कम होने पर 100 किलोवाट से लोड घटाकर 60 किलोवाट करा लिया। यदि अगले तीन वर्ष के भीतर उत्पादन बढ़ने पर वह फिर 100 किलोवाट लोड बहाल कराती है तो उसे सर्विस कनेक्शन शुल्क नहीं देना होगा जिससे हजारों रुपये की बचत होगी।