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भूपिंदर हुड्डा को क्लीनचिट: दो दशक पुराना प्लॉट पुन: आवंटन मामला, हाईकोर्ट ने खारिज किए सीबीआई के आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 25 Feb 2026 08:31 PM IST
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सार
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व विधानसभा नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने सीबीआई की तरफ से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें क्लीनचिट दे दी।
भूपिंदर सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम
- फोटो : ANI
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विस्तार
पंचकूला स्थित औद्योगिक प्लॉट पुनः आवंटन के दो दशक पुराने मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सीबीआई की तरफ से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें क्लीनचिट दे दी।
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जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने कहा कि अब तक उपलब्ध सामग्री से प्रथमदृष्टया में न तो आपराधिक साजिश का मामला बनता है और न ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध का आधार। इसके साथ ही हुड्डा व एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के खिलाफ आरोप तय करने व हुड्डा की इस मामले में डिस्चार्ज एप्लीकेशन रद्द करने के सीबीआई कोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया गया।
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कोर्ट ने अपने आदेश में सीबीआई की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कहा कि सीबीआई ने केवल हुड्डा को आरोपी बनाया अन्य अधिकारियों को नहीं, यह उसकी मंशा पर सवाल उठाता है। पुनः आवंटन का आदेश अकेले हुड्डा का नहीं था। प्राधिकरण ने सर्वसम्मति से उसे अनुमोदित किया था। इस फैसले को किसी सक्षम अदालत या प्राधिकरण ने निरस्त भी नहीं किया। जब तक पुनः आवंटन को विधिक रूप से अवैध घोषित नहीं किया जाता तब तक केवल जांच एजेंसी के आकलन पर उसे अपराध नहीं माना जा सकता।
पीठ ने कहा कि सीबीआई ने जो आरोप लगाए हैं उनके अनुसार अनुचित लाभ या राजकोषीय हानि का होना जरूरी है जो वर्तमान मामले में नहीं दिखाई दे रहे। आपराधिक साजिश सिद्ध करने के लिए भी उद्देश्य का स्पष्ट संकेत होना जरूरी है। सीबीआई की जांच में वह भी दिखाई नहीं दे रहा। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्रशासनिक निर्णय की वैधता पर प्रश्न है तो उसका समाधान सांविधानिक या वैधानिक उपायों से किया जाना चाहिए न कि आपराधिक मुकदमे के माध्यम से। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के आदेश को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने हुड्डा को क्लीनचिट दे दी।
यह है मामला : एचएसवीपी को 63 लाख के नुकसान का लगा था आरोप
वर्ष 2005 में सेक्टर-6 के औद्योगिक प्लॉट को पुनः आवंटित किया गया था जो वर्ष 1982 में एजेएल को आवंटित हुआ था। निर्माण नहीं होने के कारण 1992 में प्लॉट को पुनः अधिगृहीत कर लिया गया था। 2005 में हुड्डा ने इसे मूल दरों के साथ ब्याज लेकर पुनः आवंटित करने का आदेश दिया था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि इससे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को लगभग 63 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इस आधार पर सीबीआई की विशेष अदालत में आरोप तय किए गए थे।