{"_id":"69c54f08b919e398190fcfe4","slug":"road-accident-shattered-the-youths-dream-of-joining-the-army-give-him-compensation-of-rs-342-lakh-high-court-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1072-980673-2026-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क हादसे ने तोड़ा सेना में भर्ती होने का सपना, युवक को 3.42 लाख मुआवजा दें : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क हादसे ने तोड़ा सेना में भर्ती होने का सपना, युवक को 3.42 लाख मुआवजा दें : हाईकोर्ट
विज्ञापन
विज्ञापन
- 20 वर्षीय युवक को बड़ी राहत, मुआवजा 70 हजार से बढ़ाकर 3.42 लाख किया
- उसकी भविष्य की कमाई की क्षमता पर होने वाले असर को भी बनाया आधार
चंडीगढ़। सड़क दुर्घटना में घायल युवक को बड़ी राहत देते हुए ट्रैक्टर से हुई सड़क दुर्घटना के मामले में उसका मुआवजा 70 हजार रुपये से बढ़ाकर 3.42 लाख रुपये कर दिया है। अदालत ने कहा कि स्थायी विकलांगता के कारण युवक सेना, नौसेना या पुलिस में भर्ती होने का सपना पूरा नहीं कर सका जिससे उसकी भविष्य की कमाई की क्षमता पर भी असर पड़ा है। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) की ओर से दिए गए 70 हजार रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए उसे बढ़ाने का आदेश दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित दुर्घटना के समय 20 वर्ष का छात्र था और उसके सेना, नौसेना या पुलिस में भर्ती होने की संभावना थी लेकिन स्थायी दिव्यांगता के कारण वह अब इन सेवाओं में शामिल नहीं हो सका। अदालत ने कहा कि उसे जीवनभर इस दिव्यांगता के साथ रहना पड़ेगा और इससे उसकी आय अर्जित करने की क्षमता कम हो जाएगी।
हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने ‘दर्द और पीड़ा’ के मद में कोई मुआवजा नहीं दिया था। अदालत ने इस मद में 40 हजार रुपये देने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि 30 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता होने के बावजूद ट्रिब्यूनल ने सही तरीके से मुआवजा तय नहीं किया। अदालत ने माना कि युवक की दाहिनी टांग में स्थायी चोट आई है जिससे उसकी काम करने की क्षमता प्रभावित हुई है। कोर्ट ने 2002 में हुए हादसे को ध्यान में रखते हुए उसकी मासिक आय 2,500 रुपये मानते हुए भविष्य की संभावनाओं को जोड़कर 3,500 रुपये मासिक आय मानी।
हाईकोर्ट ने कहा कि 30 प्रतिशत विकलांगता के आधार पर मासिक आय का नुकसान 1,050 रुपये और सालाना नुकसान 12,600 रुपये बनता है। 18 का मल्टीप्लायर लगाते हुए आय के नुकसान के तहत 2,26,800 रुपये मुआवजा तय किया गया। इसके अलावा अदालत ने तीन महीने तक इलाज के दौरान आय के नुकसान के लिए 10,500 रुपये, अटेंडेंट, परिवहन और विशेष डाइट के लिए 15 हजार रुपये, लॉस ऑफ अमेनिटीज के लिए 25 हजार रुपये और इलाज के खर्च के लिए 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
Trending Videos
- उसकी भविष्य की कमाई की क्षमता पर होने वाले असर को भी बनाया आधार
चंडीगढ़। सड़क दुर्घटना में घायल युवक को बड़ी राहत देते हुए ट्रैक्टर से हुई सड़क दुर्घटना के मामले में उसका मुआवजा 70 हजार रुपये से बढ़ाकर 3.42 लाख रुपये कर दिया है। अदालत ने कहा कि स्थायी विकलांगता के कारण युवक सेना, नौसेना या पुलिस में भर्ती होने का सपना पूरा नहीं कर सका जिससे उसकी भविष्य की कमाई की क्षमता पर भी असर पड़ा है। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) की ओर से दिए गए 70 हजार रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए उसे बढ़ाने का आदेश दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित दुर्घटना के समय 20 वर्ष का छात्र था और उसके सेना, नौसेना या पुलिस में भर्ती होने की संभावना थी लेकिन स्थायी दिव्यांगता के कारण वह अब इन सेवाओं में शामिल नहीं हो सका। अदालत ने कहा कि उसे जीवनभर इस दिव्यांगता के साथ रहना पड़ेगा और इससे उसकी आय अर्जित करने की क्षमता कम हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने ‘दर्द और पीड़ा’ के मद में कोई मुआवजा नहीं दिया था। अदालत ने इस मद में 40 हजार रुपये देने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि 30 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता होने के बावजूद ट्रिब्यूनल ने सही तरीके से मुआवजा तय नहीं किया। अदालत ने माना कि युवक की दाहिनी टांग में स्थायी चोट आई है जिससे उसकी काम करने की क्षमता प्रभावित हुई है। कोर्ट ने 2002 में हुए हादसे को ध्यान में रखते हुए उसकी मासिक आय 2,500 रुपये मानते हुए भविष्य की संभावनाओं को जोड़कर 3,500 रुपये मासिक आय मानी।
हाईकोर्ट ने कहा कि 30 प्रतिशत विकलांगता के आधार पर मासिक आय का नुकसान 1,050 रुपये और सालाना नुकसान 12,600 रुपये बनता है। 18 का मल्टीप्लायर लगाते हुए आय के नुकसान के तहत 2,26,800 रुपये मुआवजा तय किया गया। इसके अलावा अदालत ने तीन महीने तक इलाज के दौरान आय के नुकसान के लिए 10,500 रुपये, अटेंडेंट, परिवहन और विशेष डाइट के लिए 15 हजार रुपये, लॉस ऑफ अमेनिटीज के लिए 25 हजार रुपये और इलाज के खर्च के लिए 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया।