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Chandigarh-Haryana News: शिक्षक बोले- ब्लाॅक नहीं, जोन व स्कूल आधारित हों तबादले
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स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा की प्रदेश कार्यकारिणी ने उठाई मांगें
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा (सलाह) की प्रदेश कार्यकारिणी ने राज्य सरकार से जल्द तबादला मुहिम चलाने और प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की है। संगठन ने मांग की है कि शिक्षक तबादले खंड (ब्लॉक) आधारित नहीं बल्कि जोन और स्कूल आधारित होने चाहिए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और स्कूलों में शिक्षकों की संतुलित उपलब्धता बनी रहे।
सलाह के प्रदेश प्रधान अशोक शर्मा और मीडिया व खजाना प्रभारी भूपेंद्र मलिक ने कहा कि वर्ष 2022 में गलत युक्तीकरण के कारण तबादला प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी थी। अब जारी की गई ट्रांसफर पॉलिसी में भी शिक्षक संगठनों के सुझावों को नजरअंदाज किया गया है। तबादला प्रक्रिया में सभी शिक्षकों को समान और पारदर्शी अवसर मिलना चाहिए।
संगठन ने मांग की कि मॉडल संस्कृति स्कूलों और पीएम श्री स्कूलों में नियुक्तियां किसी अतिरिक्त परीक्षा के बिना केवल ट्रांसफर ड्राइव के माध्यम से की जाएं। वहीं सभी मान्य दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को स्वीकार करने, 80 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता वाले शिक्षकों को अतिरिक्त अंक देने और परीक्षा परिणाम व अनुभव के आधार पर अंक देने की मांग भी उठाई गई।
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चंडीगढ़। स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा (सलाह) की प्रदेश कार्यकारिणी ने राज्य सरकार से जल्द तबादला मुहिम चलाने और प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की है। संगठन ने मांग की है कि शिक्षक तबादले खंड (ब्लॉक) आधारित नहीं बल्कि जोन और स्कूल आधारित होने चाहिए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और स्कूलों में शिक्षकों की संतुलित उपलब्धता बनी रहे।
सलाह के प्रदेश प्रधान अशोक शर्मा और मीडिया व खजाना प्रभारी भूपेंद्र मलिक ने कहा कि वर्ष 2022 में गलत युक्तीकरण के कारण तबादला प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी थी। अब जारी की गई ट्रांसफर पॉलिसी में भी शिक्षक संगठनों के सुझावों को नजरअंदाज किया गया है। तबादला प्रक्रिया में सभी शिक्षकों को समान और पारदर्शी अवसर मिलना चाहिए।
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संगठन ने मांग की कि मॉडल संस्कृति स्कूलों और पीएम श्री स्कूलों में नियुक्तियां किसी अतिरिक्त परीक्षा के बिना केवल ट्रांसफर ड्राइव के माध्यम से की जाएं। वहीं सभी मान्य दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को स्वीकार करने, 80 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता वाले शिक्षकों को अतिरिक्त अंक देने और परीक्षा परिणाम व अनुभव के आधार पर अंक देने की मांग भी उठाई गई।