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Chandigarh-Haryana News: शव को ठेले पर ले जाने के मामले में आयोग सख्त, सरकार से नीति बनाने को कहा
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मानवाधिकार आयोग ने कहा- मृत्यु में गरिमा सुनिश्चित करना दया का विषय नहीं बल्कि मानवाधिकार व सांविधानिक दायित्व है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फरीदाबाद में सिविल अस्पताल से महिला के शव को मोटर चलित खुले ठेले पर ले जाने के मामले में मानवाधिकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने इस घटना को मानव गरिमा, सांविधानिक मूल्यों और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर सीधा आघात बताया है। आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि राज्य के सभी सिविल अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के किसी रोगी की उपचार के दौरान मृत्यु होने पर शव को मृतक के निवास स्थान तक निशुल्क व सम्मानजनक ढंग से पहुंचाने की नीति बनाई जाए। सभी जिम्मेदारों से इस मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की गई है।
घटना के मुताबिक 35 वर्षीय महिला अनुराधा की मृत्यु बादशाह खान सिविल अस्पताल फरीदाबाद में उपचार के दौरान हो गई थी। आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर स्थिति होने के कारण परिजन शव को ले जाने के लिए परिवहन शुल्क की व्यवस्था नहीं कर सके। अस्पताल व प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की एंबुलेंस या शव वाहन उपलब्ध न कराने पर मृतका के शव को मोटर चालित खुले ठेले पर गांव सरूरपुर ले जाया गया। अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा व दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया ने अपने आदेश में कहा है कि किसी के शव को गरीबी के कारण अपमानजनक परिस्थितियों में ले जाने के लिए विवश करना, राज्य की सांविधानिक और नैतिक जिम्मेदारियों में उदासीनता को दिखाता है। आयोग ने टिप्पणी की कि यह दृश्य किसी भी सभ्य और संवेदनशील समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने स्वास्थ्य अधिकारियों के उस कथन पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की जिसमें यह कहा गया कि सरकारी एंबुलेंस शव परिवहन के लिए निर्धारित नहीं हैं। आयोग ने कहा- मृत्यु में गरिमा सुनिश्चित करना दया का विषय नहीं बल्कि मानवाधिकार व सांविधानिक दायित्व है।
हर जिले में एक वाहन का इंतजाम शव वाहन सेवा के रूप में करें : डाॅ. मिश्रा
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रत्येक जिले में कम से कम एक वाहन की शव वाहन सेवा के रूप मेंउपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने इन सेवाओं की उपलब्धता और संपर्क विवरण के बारे में सार्वजनिक जागरूकता सुधार लाने का भी निर्देश दिया। प्रत्येक जिले में सिविल सर्जन यह सुनिश्चित करें कि सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सभी चालू शव वाहनों के संपर्क नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फरीदाबाद में सिविल अस्पताल से महिला के शव को मोटर चलित खुले ठेले पर ले जाने के मामले में मानवाधिकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने इस घटना को मानव गरिमा, सांविधानिक मूल्यों और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर सीधा आघात बताया है। आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि राज्य के सभी सिविल अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के किसी रोगी की उपचार के दौरान मृत्यु होने पर शव को मृतक के निवास स्थान तक निशुल्क व सम्मानजनक ढंग से पहुंचाने की नीति बनाई जाए। सभी जिम्मेदारों से इस मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की गई है।
घटना के मुताबिक 35 वर्षीय महिला अनुराधा की मृत्यु बादशाह खान सिविल अस्पताल फरीदाबाद में उपचार के दौरान हो गई थी। आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर स्थिति होने के कारण परिजन शव को ले जाने के लिए परिवहन शुल्क की व्यवस्था नहीं कर सके। अस्पताल व प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की एंबुलेंस या शव वाहन उपलब्ध न कराने पर मृतका के शव को मोटर चालित खुले ठेले पर गांव सरूरपुर ले जाया गया। अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा व दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया ने अपने आदेश में कहा है कि किसी के शव को गरीबी के कारण अपमानजनक परिस्थितियों में ले जाने के लिए विवश करना, राज्य की सांविधानिक और नैतिक जिम्मेदारियों में उदासीनता को दिखाता है। आयोग ने टिप्पणी की कि यह दृश्य किसी भी सभ्य और संवेदनशील समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने स्वास्थ्य अधिकारियों के उस कथन पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की जिसमें यह कहा गया कि सरकारी एंबुलेंस शव परिवहन के लिए निर्धारित नहीं हैं। आयोग ने कहा- मृत्यु में गरिमा सुनिश्चित करना दया का विषय नहीं बल्कि मानवाधिकार व सांविधानिक दायित्व है।
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हर जिले में एक वाहन का इंतजाम शव वाहन सेवा के रूप में करें : डाॅ. मिश्रा
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रत्येक जिले में कम से कम एक वाहन की शव वाहन सेवा के रूप मेंउपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने इन सेवाओं की उपलब्धता और संपर्क विवरण के बारे में सार्वजनिक जागरूकता सुधार लाने का भी निर्देश दिया। प्रत्येक जिले में सिविल सर्जन यह सुनिश्चित करें कि सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सभी चालू शव वाहनों के संपर्क नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएं।