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पानी विवाद: रावी-ब्यास पानी आपूर्ति के हरियाणा और पंजाब के दावों को परखेगा ट्रिब्यूनल, आज से तीन दिवसीय दाैरा
अरूण शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 06 Feb 2026 10:38 AM IST
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सार
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच रावी और ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर केंद्र सरकार ने 1986 में रावी और ब्यास जल ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था। ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस विनीत सरन सहित 5 अन्य सदस्य आज चंडीगढ़ आएंगे।
भाखड़ा बांध
- फोटो : फाइल
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विस्तार
हरियाणा और पंजाब के बीच पानी के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के समाधान के लिए अब केंद्र सरकार ने भी प्रयास शुरू कर दिए हैं।
रावी और ब्यास नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच चल रहे विवाद की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार की ओर से गठित ट्रिब्यूनल की 6 सदस्यीय टीम आज आएगी। तीन दिवसीय दाैरे के दाैरान ट्रिब्यूनल सभी कानूनी पक्षों का भी अवलोकन करेगा।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच रावी और ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर केंद्र सरकार ने 1986 में रावी और ब्यास जल ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था। ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस विनीत सरन सहित 5 अन्य सदस्य शुक्रवार को चंडीगढ़ आएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ट्रिब्यूनल के समक्ष हरियाणा के हक की पैरवी करेंगे।
ट्रिब्यूनल की टीम पहले पंजाब स्थित रोपड़ के लोहड़ हेड पर पहुंचेगी। यहां से हरियाणा को उनके हिस्से का पानी वास्तविकता में कितना मिल रहा है इसका निरीक्षण होगा। हरियाणा का दावा है कि पंजाब से 3.5 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी मिलना चाहिए मगर अभी करीब 1.88 एमएएफ ही पानी मिल रहा है। शनिवार को टीम कुरुक्षेत्र के बुडेढ़ा हेड पर जाएगी। यहां पंजाब से भाखड़ा के माध्यम से हरियाणा को मिलने वाले पानी की आपूर्ति का निरीक्षण होगा।
पश्चिमी यमुना नहर (डब्ल्यूजेएस) से हरियाणा को होने वाली पानी की आपूर्ति का ब्योरा लिया जाएगा। रविवार को करनाल के मुनक हेड का निरीक्षण होगा। मुनक हेड से दिल्ली के लिए पानी की आपूर्ति होती है। ट्रिब्यूनल के साथ हरियाणा और पंजाब के के सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ कानूनी विशेषज्ञ भी रहेंगे। राजस्थान के 7 अधिकारी व 6 कानूनी विशेषज्ञ, दिल्ली जल बोर्ड 2 अधिकारी और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के 4 अधिकारी भी साथ होंगे।
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रावी और ब्यास नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच चल रहे विवाद की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार की ओर से गठित ट्रिब्यूनल की 6 सदस्यीय टीम आज आएगी। तीन दिवसीय दाैरे के दाैरान ट्रिब्यूनल सभी कानूनी पक्षों का भी अवलोकन करेगा।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच रावी और ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर केंद्र सरकार ने 1986 में रावी और ब्यास जल ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था। ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस विनीत सरन सहित 5 अन्य सदस्य शुक्रवार को चंडीगढ़ आएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ट्रिब्यूनल के समक्ष हरियाणा के हक की पैरवी करेंगे।
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ट्रिब्यूनल की टीम पहले पंजाब स्थित रोपड़ के लोहड़ हेड पर पहुंचेगी। यहां से हरियाणा को उनके हिस्से का पानी वास्तविकता में कितना मिल रहा है इसका निरीक्षण होगा। हरियाणा का दावा है कि पंजाब से 3.5 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी मिलना चाहिए मगर अभी करीब 1.88 एमएएफ ही पानी मिल रहा है। शनिवार को टीम कुरुक्षेत्र के बुडेढ़ा हेड पर जाएगी। यहां पंजाब से भाखड़ा के माध्यम से हरियाणा को मिलने वाले पानी की आपूर्ति का निरीक्षण होगा।
पश्चिमी यमुना नहर (डब्ल्यूजेएस) से हरियाणा को होने वाली पानी की आपूर्ति का ब्योरा लिया जाएगा। रविवार को करनाल के मुनक हेड का निरीक्षण होगा। मुनक हेड से दिल्ली के लिए पानी की आपूर्ति होती है। ट्रिब्यूनल के साथ हरियाणा और पंजाब के के सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ कानूनी विशेषज्ञ भी रहेंगे। राजस्थान के 7 अधिकारी व 6 कानूनी विशेषज्ञ, दिल्ली जल बोर्ड 2 अधिकारी और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के 4 अधिकारी भी साथ होंगे।
