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Haryana: 1500 करोड़ के वर्क स्लिप घोटाले में बड़ा राजफाश, सीएससी सेंटरों में कट-कॉपी-पेस्ट से हुआ फर्जीवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Thu, 05 Feb 2026 09:06 PM IST
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सार
वर्क स्लिप को सत्यापित करने वाले अधिकारियों की तरफ से गड़बड़ किए जाने की बात सामने आई है। मजदूरों के पंजीकरण और उनकी तय फीस जमा होने के कारण संबंधित अधिकारियों ने वर्क स्लिप की जांच किए बगैर ही धड़ाधड़ उनको अप्रूव भी कर दिया।
घोटाला। सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हरियाणा के बहुचर्चित श्रम विभाग के 1500 करोड़ रुपये के वर्क स्लिप घोटाले की जांच में बड़ा राजफाश हुआ है। जांच में पहले स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में मजदूरों के पंजीकरण में बड़े स्तर पर गलती की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक जांच में पाया गया कि मजदूर काम करने के बाद उसका पंजीकरण करवाने के लिए सीएससी सेंटर गए। वहां एक-एक पते पर मजदूरों के नाम, मोबाइल नंबर व ज्यादातर काम को कंप्यूटर में कट-कॉपी-पेस्ट करके चढ़ा दिया गया। सिर्फ मजदूर का मोबाइल नंबर ठीक डालने पर वन टाइम पासवर्ड मिलता गया जिससे उनकी वर्क स्लिप जारी होती गई।
उसके बाद वर्क स्लिप को सत्यापित करने वाले अधिकारियों की तरफ से गड़बड़ किए जाने की बात सामने आई है। मजदूरों के पंजीकरण और उनकी तय फीस जमा होने के कारण संबंधित अधिकारियों ने वर्क स्लिप की जांच किए बगैर ही धड़ाधड़ उनको अप्रूव भी कर दिया। इस अप्रूवल के बाद लाभ राशि सीधा डायरेक्टर बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए उनके खाते में पहुंचती गई। अब जांच में अधिकांश मजदूर ठीक मिले हैं लेकिन उनके पंजीकृत पते फर्जी निकले। 22 जिलों में चार माह तक जांच पूरी होने के बाद श्रम विभाग के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करने में लगे हैं।
जांच के दौरान कुछ जगह पर दर्ज मजदूर व पते दोनों नहीं मिले हैं। इसकी अलग से जांच करने के बाद गलत आवेदन कर लाभ लेने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी विभाग करेगा। फिलहाल सरकार की ओर गठित उच्चस्तरीय कमेटी जांच के बाद पूरे मामले का जल्द खुलासा करेगी।
अधिकारियों ने सत्यापन करने में बरती लापरवाही
सीएचसी सेंटर से वर्क स्लिप मिलने के बाद मजदूरों को स्थानीय अधिकारियों से सत्यापित करवाना होता है। सरकार ने उनकी सुविधा के अनुसार दूर नहीं जाना पड़े तो इसके लिए पटवारी, लेखपाल, ग्राम सचिव, जूनियर इंजीनियर, एक्सईएन सहित अन्य अधिकारियों को अधिकार दे रखा है। नियमों के तहत सत्यापन से पहले मजदूर का पंजीकरण और उनके पते को सत्यापित करना होता है। संबंधित अधिकारी वर्क स्लिप को सीधा अप्रूव्ड करते गए।
एक पते पर 500 से 800 पंजीकरण
अधिकांश के पते इसलिए गलत मिले क्योंकि मजदूरी की जानकारी के बगैर सीएचसी सेंटर पर उनके फॉर्म भरकर वर्क स्लिप जनरेट किया गया है। किसी-किसी पते पर 500 से 800 मजदूरों का पंजीकरण भी दिखाया गया है।
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उसके बाद वर्क स्लिप को सत्यापित करने वाले अधिकारियों की तरफ से गड़बड़ किए जाने की बात सामने आई है। मजदूरों के पंजीकरण और उनकी तय फीस जमा होने के कारण संबंधित अधिकारियों ने वर्क स्लिप की जांच किए बगैर ही धड़ाधड़ उनको अप्रूव भी कर दिया। इस अप्रूवल के बाद लाभ राशि सीधा डायरेक्टर बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए उनके खाते में पहुंचती गई। अब जांच में अधिकांश मजदूर ठीक मिले हैं लेकिन उनके पंजीकृत पते फर्जी निकले। 22 जिलों में चार माह तक जांच पूरी होने के बाद श्रम विभाग के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करने में लगे हैं।
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जांच के दौरान कुछ जगह पर दर्ज मजदूर व पते दोनों नहीं मिले हैं। इसकी अलग से जांच करने के बाद गलत आवेदन कर लाभ लेने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी विभाग करेगा। फिलहाल सरकार की ओर गठित उच्चस्तरीय कमेटी जांच के बाद पूरे मामले का जल्द खुलासा करेगी।
अधिकारियों ने सत्यापन करने में बरती लापरवाही
सीएचसी सेंटर से वर्क स्लिप मिलने के बाद मजदूरों को स्थानीय अधिकारियों से सत्यापित करवाना होता है। सरकार ने उनकी सुविधा के अनुसार दूर नहीं जाना पड़े तो इसके लिए पटवारी, लेखपाल, ग्राम सचिव, जूनियर इंजीनियर, एक्सईएन सहित अन्य अधिकारियों को अधिकार दे रखा है। नियमों के तहत सत्यापन से पहले मजदूर का पंजीकरण और उनके पते को सत्यापित करना होता है। संबंधित अधिकारी वर्क स्लिप को सीधा अप्रूव्ड करते गए।
एक पते पर 500 से 800 पंजीकरण
अधिकांश के पते इसलिए गलत मिले क्योंकि मजदूरी की जानकारी के बगैर सीएचसी सेंटर पर उनके फॉर्म भरकर वर्क स्लिप जनरेट किया गया है। किसी-किसी पते पर 500 से 800 मजदूरों का पंजीकरण भी दिखाया गया है।
