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Chandigarh-Haryana News: अच्छी बारिश के कारण इस बार गेहूं की पैदावार बढ़ने की उम्मीद
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किसानों व कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है गेहूं का उत्पादन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में पिछले दिनों हुई बारिश रबी की फसलों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुई। किसानों को इस बार अधिक उत्पादन की उम्मीद है। खासकर गेहूं की फसल के लिए माैसम काफी अनुकूल है। किसानों और कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बार गेहूं की 5 से 7 प्रतिशत अतिरिक्त पैदावार हो सकती है।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ब्योरे के अनुसार रबी सीजन 2025-2026 के लिए गेहूं के लिए क्षेत्रफल का लक्ष्य करीब 25 लाख 50 हजार हेक्टेयर रखा गया है जबकि उत्पादन 1 करोड़ 36 लाख 42000 टन रखा गया है। विभागीय ब्योरे के अनुसार 2024-2025 में गेहूं की फसल के लिए क्षेत्रफल करीब 24 लाख 63 हजार हेक्टेयर था। पिछली बार उत्पादन करीब 1,35,80,000.45 टन हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि आमताैर पर गेहूं की फसल में 5 से 7 सिंचाई करनी होती हैं। बुवाई के समय तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए। जब बालियां निकलने लगती हैं तब तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस और दाना पकने के दाैरान तापमान 23 से 27 डिग्री सेल्सियस तक अनुकूल माना जाता है। फिलहाल माैसम अनुकूल बना हुआ है।
कृषि विज्ञान केंद्र के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. राम करन का कहना है कि अभी तक हुई बारिश रबी की फसलों के लिए काफी लाभकारी है। गेहूं की फसल की बात करें तो बारिश से पत्तों पर जमी धूल-मिट्टी धुल जाती है। इससे पाैधे व तना धूप, हवा, मिट्टी, ओस की बूंदों आदि से तेजी से भोजन बनाते हैं। जब भोजन बनाने की गति अच्छी होगी तो पाैधे का विकास बहुत अच्छा होगा। बारिश से दूसरा बड़ा लाभ यह है कि जमीन के अंदर से अनावश्यक तत्व ऊपर की परधि की तरफ बढ़कर आते हैं जिनमें साॅल्ट भी शामिल होता है। यह तत्व पाैधे की वृद्धि पर विपरीत असर डालते हैं। बरसात से यह तत्व घुलकर नीचे चले जाते हैं और जड़ों तक सीधे बरसात की बूंदों के साथ नाइट्रोजन पहुंचता है। किसानों का फसलों में कम यूरिया उपयोग होगा, बरसात की बूंदाें में भरपूर नाइट्रोजन होता है। 1 से 2 सिंचाई भी कम करनी होंगी। आगामी एक माह फसलों के लिए निर्णायक है। जब गेहूं की फसल में बालियां निकल जाएंगी तो उनका वजन बढ़ेगा। तेज हवा, अधिक बरसात, ओलावृष्टि आदि परिस्थितियों में नुकसान हो सकता है। अच्छी पैदावार के लिए तापमान 27 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए और जमीन में भी नमी रहनी चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में पिछले दिनों हुई बारिश रबी की फसलों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुई। किसानों को इस बार अधिक उत्पादन की उम्मीद है। खासकर गेहूं की फसल के लिए माैसम काफी अनुकूल है। किसानों और कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बार गेहूं की 5 से 7 प्रतिशत अतिरिक्त पैदावार हो सकती है।
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ब्योरे के अनुसार रबी सीजन 2025-2026 के लिए गेहूं के लिए क्षेत्रफल का लक्ष्य करीब 25 लाख 50 हजार हेक्टेयर रखा गया है जबकि उत्पादन 1 करोड़ 36 लाख 42000 टन रखा गया है। विभागीय ब्योरे के अनुसार 2024-2025 में गेहूं की फसल के लिए क्षेत्रफल करीब 24 लाख 63 हजार हेक्टेयर था। पिछली बार उत्पादन करीब 1,35,80,000.45 टन हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि आमताैर पर गेहूं की फसल में 5 से 7 सिंचाई करनी होती हैं। बुवाई के समय तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए। जब बालियां निकलने लगती हैं तब तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस और दाना पकने के दाैरान तापमान 23 से 27 डिग्री सेल्सियस तक अनुकूल माना जाता है। फिलहाल माैसम अनुकूल बना हुआ है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. राम करन का कहना है कि अभी तक हुई बारिश रबी की फसलों के लिए काफी लाभकारी है। गेहूं की फसल की बात करें तो बारिश से पत्तों पर जमी धूल-मिट्टी धुल जाती है। इससे पाैधे व तना धूप, हवा, मिट्टी, ओस की बूंदों आदि से तेजी से भोजन बनाते हैं। जब भोजन बनाने की गति अच्छी होगी तो पाैधे का विकास बहुत अच्छा होगा। बारिश से दूसरा बड़ा लाभ यह है कि जमीन के अंदर से अनावश्यक तत्व ऊपर की परधि की तरफ बढ़कर आते हैं जिनमें साॅल्ट भी शामिल होता है। यह तत्व पाैधे की वृद्धि पर विपरीत असर डालते हैं। बरसात से यह तत्व घुलकर नीचे चले जाते हैं और जड़ों तक सीधे बरसात की बूंदों के साथ नाइट्रोजन पहुंचता है। किसानों का फसलों में कम यूरिया उपयोग होगा, बरसात की बूंदाें में भरपूर नाइट्रोजन होता है। 1 से 2 सिंचाई भी कम करनी होंगी। आगामी एक माह फसलों के लिए निर्णायक है। जब गेहूं की फसल में बालियां निकल जाएंगी तो उनका वजन बढ़ेगा। तेज हवा, अधिक बरसात, ओलावृष्टि आदि परिस्थितियों में नुकसान हो सकता है। अच्छी पैदावार के लिए तापमान 27 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए और जमीन में भी नमी रहनी चाहिए।