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Charkhi Dadri News: मानसून सीजन में 65 दिन शेष, इस बार 96 प्रतिशत बारिश होने का पूर्वानुमान
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:52 AM IST
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चरखी दादरी। मानसून सीजन में 65 दिन शेष है। इस बार मानसून सीजन में 96 प्रतिशत बारिश होने का पूर्वानुमान मौसम विभाग जता रहा है। जुलाई व अगस्त माह में खासी बारिश होने का अनुमान है। जिले में पिछले 11 सालों में सामान्य से कम बारिश होती आ रही है। जिले का 80 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र मानसून पर ही निर्भर करता है।
जिले में पिछले एक दशक से मानसून फीका रहा है। इस बार मानसून से काफी उम्मीदें हैं। जिले का कृषि योग्य रकबा 1.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है और जिले में करीब 68 हजार किसान हैं। रबी व खरीफ सीजन की तकरीबन सभी प्रकार की फसलों की खेती होती है। करीब 30 प्रतिशत बरानी क्षेत्र तो पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करता है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी है कि इस बार मानसून सामान्य से थोड़ा कम रहने का अनुमान है।
खरीफ फसलों को होगा फायदा
अगर मानसून की बारिश समय पर अच्छी हो जाती है तो खरीफ की फसलों से अच्छी पैदावार मिल सकती है। क्षेत्र में मानसून आगमन का समय जून अंतिम या जुलाई प्रथम सप्ताह माना जाता है। मानसून की विदाई का समय आमतौर पर सितंबर अंतिम सप्ताह तक है। ऐसे में मानसून की बारिश सेे खेतों में अक्तूबर अंत तक नमी बनी रहती है।
जिले में 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रेतीला
जिले में रबी की फसलों में सरसों, गेहूं, चना, जौ, मेथी की खेती की जाती है जबकि खरीफ की फसलों में बाजरा, ज्वार, ग्वार, मूंग, मोठ, अरहर, तिल, सोयाबीन आदि की खेती की जाती है। जिले में करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रेतीला है। इस क्षेत्र में मानसून की बारिश की और भी ज्यादा जरूरत होती है।
बारिश पर निर्भर खेती
रेतीले क्षेत्र में खरीफ की फसलें तो बारिश पर ही निर्भर करती हैं। इस क्षेत्र में किसान बिजली के ट्यूबवेल से जमीनी पानी का उठान कर खेतों की सिंचाई करते हैं। जिले के करीब 20 प्रतिशत क्षेत्र में ही नहरी पानी से सिंचाई होती है। जिले को नहरी पानी वैसे ही कम मात्रा में मिलता रहा है। नहरों मेंं 24 दिन में 16 दिन के लिए पानी छोड़ा जाता है।
ट्यूबवेल दे देते हैं जवाब
किसान टेकराम, नरेश शर्मा, रामअवतार व नरेश फोगाट का कहना है कि जिले में मानसून की बारिश कई सालों से बेहद कम मात्रा में हो रही है। सावन-भाद्रपद मास में भी सोखा बना रहता है। मानसून की कमी की वजह से जमीनी पानी की मात्रा भी कम होने लगी है। बोरिंग ट्यूबवेल भी अब जवाब देने लगे हैं। किसानों का कहना है कि इस बार मानसून सीजन बढिय़ा बीतने की उम्मीद है। अगर मानसून सीजन में बारिश बढ़िया हो जाती है तो भूमिगत जल भी रिचार्ज हो सकता है।
बारिश का आंकड़ा
2014- 207 एमएम
2015- 309 एमएम
2016- 576 एमएम
2017 - 315 एमएम
2018 - 311 एमएम
2019- 183 एमएम
2020- 289 एमएम
2021- 512 एमएम
2022- 347 एमएम
2023- 352 एमएम
2024 - 453 एमएम
2025 - 500 एमएम
वर्सन:
मानसून सीजन में बढ़िया बारिश का होना जरूरी है। बारिश के पानी से ही जमीनी वाटर रिचार्ज होता है। इस बार मानसून की बारिश सामान्य के करीब होने की उम्मीद है। - जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी
वर्सन:
इस बार मानसून की बारिश 96 प्रतिशत तक होने का पूर्वानुमान है। जुलाई व अगस्त माह में बारिश ज्यादा हो सकती है। इस बार मानसून केरलम में 31 मई तक पहुंचने की उम्मीद है। केरलम से हरियाणा पहुंचने में एक माह का समय लग जाता है।
- डॉ.चंद्रमोहन, मौसम विशेषज्ञ
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जिले में पिछले एक दशक से मानसून फीका रहा है। इस बार मानसून से काफी उम्मीदें हैं। जिले का कृषि योग्य रकबा 1.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है और जिले में करीब 68 हजार किसान हैं। रबी व खरीफ सीजन की तकरीबन सभी प्रकार की फसलों की खेती होती है। करीब 30 प्रतिशत बरानी क्षेत्र तो पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करता है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी है कि इस बार मानसून सामान्य से थोड़ा कम रहने का अनुमान है।
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खरीफ फसलों को होगा फायदा
अगर मानसून की बारिश समय पर अच्छी हो जाती है तो खरीफ की फसलों से अच्छी पैदावार मिल सकती है। क्षेत्र में मानसून आगमन का समय जून अंतिम या जुलाई प्रथम सप्ताह माना जाता है। मानसून की विदाई का समय आमतौर पर सितंबर अंतिम सप्ताह तक है। ऐसे में मानसून की बारिश सेे खेतों में अक्तूबर अंत तक नमी बनी रहती है।
जिले में 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रेतीला
जिले में रबी की फसलों में सरसों, गेहूं, चना, जौ, मेथी की खेती की जाती है जबकि खरीफ की फसलों में बाजरा, ज्वार, ग्वार, मूंग, मोठ, अरहर, तिल, सोयाबीन आदि की खेती की जाती है। जिले में करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रेतीला है। इस क्षेत्र में मानसून की बारिश की और भी ज्यादा जरूरत होती है।
बारिश पर निर्भर खेती
रेतीले क्षेत्र में खरीफ की फसलें तो बारिश पर ही निर्भर करती हैं। इस क्षेत्र में किसान बिजली के ट्यूबवेल से जमीनी पानी का उठान कर खेतों की सिंचाई करते हैं। जिले के करीब 20 प्रतिशत क्षेत्र में ही नहरी पानी से सिंचाई होती है। जिले को नहरी पानी वैसे ही कम मात्रा में मिलता रहा है। नहरों मेंं 24 दिन में 16 दिन के लिए पानी छोड़ा जाता है।
ट्यूबवेल दे देते हैं जवाब
किसान टेकराम, नरेश शर्मा, रामअवतार व नरेश फोगाट का कहना है कि जिले में मानसून की बारिश कई सालों से बेहद कम मात्रा में हो रही है। सावन-भाद्रपद मास में भी सोखा बना रहता है। मानसून की कमी की वजह से जमीनी पानी की मात्रा भी कम होने लगी है। बोरिंग ट्यूबवेल भी अब जवाब देने लगे हैं। किसानों का कहना है कि इस बार मानसून सीजन बढिय़ा बीतने की उम्मीद है। अगर मानसून सीजन में बारिश बढ़िया हो जाती है तो भूमिगत जल भी रिचार्ज हो सकता है।
बारिश का आंकड़ा
2014- 207 एमएम
2015- 309 एमएम
2016- 576 एमएम
2017 - 315 एमएम
2018 - 311 एमएम
2019- 183 एमएम
2020- 289 एमएम
2021- 512 एमएम
2022- 347 एमएम
2023- 352 एमएम
2024 - 453 एमएम
2025 - 500 एमएम
वर्सन:
मानसून सीजन में बढ़िया बारिश का होना जरूरी है। बारिश के पानी से ही जमीनी वाटर रिचार्ज होता है। इस बार मानसून की बारिश सामान्य के करीब होने की उम्मीद है। - जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी
वर्सन:
इस बार मानसून की बारिश 96 प्रतिशत तक होने का पूर्वानुमान है। जुलाई व अगस्त माह में बारिश ज्यादा हो सकती है। इस बार मानसून केरलम में 31 मई तक पहुंचने की उम्मीद है। केरलम से हरियाणा पहुंचने में एक माह का समय लग जाता है।
- डॉ.चंद्रमोहन, मौसम विशेषज्ञ

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