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Charkhi Dadri News: हरियाली की ओर बड़ा कदम... जिले में 2.71 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय

संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 30 Mar 2026 01:19 AM IST
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A big step towards greenery... A target of planting 2.71 lakh saplings in the district has been set
जिले के गांव बिंद्रावन स्थित नर्सरी, जहां पौधे तैयार किए जा रहे हैं।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संतुलन को बेहतर बनाने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। प्रकृति को संजीवनी देने के उद्देश्य से विभाग ने आगामी वर्ष 2026-27 के लिए पौधरोपण का विस्तृत खाका तैयार किया है। इसके तहत इस वित्त वर्ष के दौरान जिलेभर में कुल 2,71,752 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग की इस मुहिम का मुख्य केंद्र न केवल सरकारी भूमि पर हरियाली विकसित करना है बल्कि आम जनमानस और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाना है।
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वन विभाग की योजना के अनुसार, इस लक्ष्य में से 1,71,752 पौधे विभाग स्वयं विभिन्न चिह्नित स्थानों पर रोपित करेगा। इसके साथ ही, सामाजिक उत्तरदायित्व को समझते हुए करीब एक लाख पौधे शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को निशुल्क वितरित किए जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हर कोने में हरियाली का विस्तार हो सके और जिले के ऑक्सीजन स्तर में सुधार आए।
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पिछले वर्ष से 43 हजार अधिक पौधों का लक्ष्य
विभाग द्वारा इस सीजन में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 43 हजार अधिक पौधे तैयार किए जा रहे हैं। गत वर्ष विभाग ने जहां 1,32,000 हजार पौधे रोपित किए थे और 96,000 पौधों का वितरण किया था। वहीं इस बार लक्ष्यों में बढ़ोतरी की गई है। इन पौधों को तैयार करने के लिए जिले की सात प्रमुख नर्सरियों बरसाना, झोझू कलां, कादमा, रामनगर, बिंद्रावन, बाढड़ा और नीमड़ बडेसरा में काम चल रहा है। यहां बीज अंकुरण के साथ-साथ कलम विधि से भी उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
छायादार और दीर्घायु पौधों पर विशेष जोर
नर्सरियों में जैव विविधता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। यहां बरगद, नीम, पीपल, जामुन, पिलखम, बेरी, कीकर और लेहसुआ जैसी 35 से अधिक प्रजातियों के पौधे विकसित किए जा रहे हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि छायादार और लंबी आयु वाले पेड़ वातावरण को अधिक समय तक शुद्ध रखने में सक्षम होते हैं। इस बार की योजना में 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं छायादार वृक्षों का रखा गया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत प्राकृतिक कवच का काम करेंगे।
वर्सन :
हमारा मुख्य उद्देश्य जिले के हरित क्षेत्र में वृद्धि कर प्रदूषण के स्तर को न्यूनतम करना है। इस बार हमने अपना ध्यान उन प्रजातियों पर केंद्रित किया है जो दीर्घायु होने के साथ-साथ अधिक ऑक्सीजन प्रदान करती हैं। नर्सरियों में पौधों की सेहत का विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि रोपण के बाद उनकी उत्तरजीविता दर उच्च रहे। हम जिलावासियों से अपील करते हैं कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और वितरित किए जाने वाले पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाएं।- सतीश कुमार, जिला वन मंडल अधिकारी, दादरी।
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