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Charkhi Dadri News: चकबंदी वाले गांवों में अटकी किसानों की एग्री स्टैक यूनिक आईडी, पांच माह बाद भी प्रक्रिया अधूरी
Thu, 13 Aug 2026 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:03 AM IST
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गांव ढाणी फोगाट का कृषि क्षेत्र।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले में किसानों की जमीन की एग्री स्टैक (यूनिक आईडी) बनाने की प्रक्रिया शुरू होने के करीब पांच माह बाद भी कई गांवों में काम पूरा नहीं हो पाया है। खासकर जिन गांवों में अब तक चकबंदी नहीं हुई है वहां राजस्व रिकॉर्ड और आधार कार्ड के विवरण में अंतर होने के कारण यूनिक आईडी तैयार नहीं हो रही है।
इस समस्या को लेकर कृषि विभाग दो बार कृषि निदेशालय को पत्र लिख चुका है लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। इससे किसान कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। जिले में करीब 67 हजार किसान हैं और कुल कृषि योग्य भूमि लगभग 2 लाख 73 हजार एकड़ है। सरकार ने जनवरी माह में किसानों की जमीन की एग्री स्टैक यूनिक आईडी बनाने का अभियान शुरू किया था। शुरुआत में यह कार्य पंचायत विभाग के माध्यम से कराया गया, लेकिन बाद में इसकी जिम्मेदारी राजस्व विभाग को सौंप दी गई। वर्तमान में 92 नए और 36 पुराने पटवारियों को गांव स्तर पर किसानों से संपर्क कर यूनिक आईडी तैयार करने का दायित्व दिया गया है।
मेल नहीं खा रहे नाम
हालांकि कई गांवों में चकबंदी न होने के कारण जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज किसान का नाम, पिता का नाम और अन्य विवरण आधार कार्ड से मेल नहीं खा रहे हैं। कहीं नाम के आगे सिंह या कुमार दर्ज नहीं है तो कहीं अन्य त्रुटियां हैं। ऐसे में ऑनलाइन पोर्टल पर आधार सत्यापन नहीं हो पा रहा और यूनिक आईडी बनने की प्रक्रिया रुक रही है।
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तकनीकी खामियां आ रही सामने
विभागीय अधिकारियों के अनुसार ढाणी फोगाट, गुडाना सहित कई गांवों में ऑनलाइन रिकॉर्ड में तकनीकी और राजस्व संबंधी खामियां सामने आई हैं। इन त्रुटियों के कारण किसानों की एग्री स्टैक आईडी तैयार करने में लगातार दिक्कत आ रही है। विभाग ने इस संबंध में मुख्यालय को दो बार पत्र भेजकर समाधान की मांग की है।
कई योजनाओं का मिलता है काम
सरकार की योजना है कि भविष्य में किसानों को अधिकांश सरकारी योजनाओं का लाभ एग्री स्टैक यूनिक आईडी के माध्यम से ही दिया जाए। इसके जरिए किसान अपनी जमीन का पूरा ऑनलाइन रिकॉर्ड देख सकेंगे। साथ ही जमीन की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री, स्वामित्व की पुष्टि और अन्य राजस्व कार्यों में भी पारदर्शिता आएगी।
कई परिवारों के नाम दर्ज
वर्तमान में जिले के अनेक गांवों में एक ही खतौनी में कई परिवारों के नाम दर्ज हैं। इससे जमीन के बंटवारे, मुआवजे और स्वामित्व को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती है। अधिकारियों का मानना है कि प्रत्येक किसान की अलग यूनिक आईडी बनने के बाद उसकी हिस्सेदारी स्पष्ट रूप से दर्ज होगी और ऐसे विवादों में काफी कमी आएगी।
रिकॉर्ड का मिलान होना जरूरी
यूनिक आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और भूमि रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। लेकिन जिन किसानों के आधार कार्ड और जमाबंदी में नाम अलग-अलग दर्ज हैं उन्हें सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार से इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने और वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि सभी किसानों की यूनिक आईडी समय पर तैयार हो सके और भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की बाधा न आए।
यूनिक आईडी बनने के प्रमुख लाभ
किसान की जमीन का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा, सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत पहचान के आधार पर मिलेगा, जमीन की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री प्रक्रिया होगी आसान, खतौनी और हिस्सेदारी संबंधी विवादों में आएगी कमी, मुआवजा वितरण और राजस्व कार्यों में बढ़ेगी पारदर्शिता।
वर्सन:
हमारे गांव में एक भी किसान की यूनिक आईडी नहीं बनी है। उम्मीद है कि विभाग जल्द ही किसानों की तकनीकी दिक्कतों को दूर करवा आईडी बनाने का काम करेगा।-डिंपल देवी, सरपंच, ढाणी फोगाट
वर्सन:
किसानों की पोर्टल संबंधी समस्या को दूर करवाने के लिए विभाग के निदेशक की ओर से दो बार पत्र लिखा जा चुका है। अब तक गाइडलाइन नहीं मिली है। जल्द इस समस्या का समाधान होगा। किसानों को यूनिक आईडी बनवाने में दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। जल्द ही इस काम को सिरे चढ़ाया जाएगा।-कृष्ण कुमार, एसडीओ
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इस समस्या को लेकर कृषि विभाग दो बार कृषि निदेशालय को पत्र लिख चुका है लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। इससे किसान कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। जिले में करीब 67 हजार किसान हैं और कुल कृषि योग्य भूमि लगभग 2 लाख 73 हजार एकड़ है। सरकार ने जनवरी माह में किसानों की जमीन की एग्री स्टैक यूनिक आईडी बनाने का अभियान शुरू किया था। शुरुआत में यह कार्य पंचायत विभाग के माध्यम से कराया गया, लेकिन बाद में इसकी जिम्मेदारी राजस्व विभाग को सौंप दी गई। वर्तमान में 92 नए और 36 पुराने पटवारियों को गांव स्तर पर किसानों से संपर्क कर यूनिक आईडी तैयार करने का दायित्व दिया गया है।
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मेल नहीं खा रहे नाम
हालांकि कई गांवों में चकबंदी न होने के कारण जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज किसान का नाम, पिता का नाम और अन्य विवरण आधार कार्ड से मेल नहीं खा रहे हैं। कहीं नाम के आगे सिंह या कुमार दर्ज नहीं है तो कहीं अन्य त्रुटियां हैं। ऐसे में ऑनलाइन पोर्टल पर आधार सत्यापन नहीं हो पा रहा और यूनिक आईडी बनने की प्रक्रिया रुक रही है।
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तकनीकी खामियां आ रही सामने
विभागीय अधिकारियों के अनुसार ढाणी फोगाट, गुडाना सहित कई गांवों में ऑनलाइन रिकॉर्ड में तकनीकी और राजस्व संबंधी खामियां सामने आई हैं। इन त्रुटियों के कारण किसानों की एग्री स्टैक आईडी तैयार करने में लगातार दिक्कत आ रही है। विभाग ने इस संबंध में मुख्यालय को दो बार पत्र भेजकर समाधान की मांग की है।
कई योजनाओं का मिलता है काम
सरकार की योजना है कि भविष्य में किसानों को अधिकांश सरकारी योजनाओं का लाभ एग्री स्टैक यूनिक आईडी के माध्यम से ही दिया जाए। इसके जरिए किसान अपनी जमीन का पूरा ऑनलाइन रिकॉर्ड देख सकेंगे। साथ ही जमीन की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री, स्वामित्व की पुष्टि और अन्य राजस्व कार्यों में भी पारदर्शिता आएगी।
कई परिवारों के नाम दर्ज
वर्तमान में जिले के अनेक गांवों में एक ही खतौनी में कई परिवारों के नाम दर्ज हैं। इससे जमीन के बंटवारे, मुआवजे और स्वामित्व को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती है। अधिकारियों का मानना है कि प्रत्येक किसान की अलग यूनिक आईडी बनने के बाद उसकी हिस्सेदारी स्पष्ट रूप से दर्ज होगी और ऐसे विवादों में काफी कमी आएगी।
रिकॉर्ड का मिलान होना जरूरी
यूनिक आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और भूमि रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। लेकिन जिन किसानों के आधार कार्ड और जमाबंदी में नाम अलग-अलग दर्ज हैं उन्हें सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार से इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने और वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि सभी किसानों की यूनिक आईडी समय पर तैयार हो सके और भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की बाधा न आए।
यूनिक आईडी बनने के प्रमुख लाभ
किसान की जमीन का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा, सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत पहचान के आधार पर मिलेगा, जमीन की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री प्रक्रिया होगी आसान, खतौनी और हिस्सेदारी संबंधी विवादों में आएगी कमी, मुआवजा वितरण और राजस्व कार्यों में बढ़ेगी पारदर्शिता।
वर्सन:
हमारे गांव में एक भी किसान की यूनिक आईडी नहीं बनी है। उम्मीद है कि विभाग जल्द ही किसानों की तकनीकी दिक्कतों को दूर करवा आईडी बनाने का काम करेगा।-डिंपल देवी, सरपंच, ढाणी फोगाट
वर्सन:
किसानों की पोर्टल संबंधी समस्या को दूर करवाने के लिए विभाग के निदेशक की ओर से दो बार पत्र लिखा जा चुका है। अब तक गाइडलाइन नहीं मिली है। जल्द इस समस्या का समाधान होगा। किसानों को यूनिक आईडी बनवाने में दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। जल्द ही इस काम को सिरे चढ़ाया जाएगा।-कृष्ण कुमार, एसडीओ