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Charkhi Dadri News: छह साल से फाइलों में कैद फायर ब्रिगेड केंद्र, एक जर्जर गाड़ी के भरोसे 60 गांव
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:50 PM IST
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कस्बे की अनाज मंडी में खड़ा फायर ब्रिगेड वाहन।
- फोटो : 1
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बाढड़ा। उपमंडल मुख्यालय बाढड़ा में आधुनिक सुविधाओं से युक्त फायर ब्रिगेड केंद्र स्थापित करने की वर्षों पुरानी मांग आज भी अधूरी है। करीब छह साल पहले शुरू हुई यह योजना अब तक फाइलों में ही उलझी हुई है। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि उपमंडल बनने के बाद यहां दमकल विभाग का अपना कार्यालय और आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन उपलब्ध होंगे लेकिन अभी तक केवल एक पुरानी और जर्जर हो चुकी दमकल गाड़ी के सहारे ही आगजनी की घटनाओं से निपटने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्ष 2020 में तत्कालीन विधायक नैना चौटाला की पहल पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने पंचायत विभाग को उपमंडल स्तर पर आधुनिक फायर ब्रिगेड केंद्र निर्माण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद परियोजना का एस्टीमेट तैयार कर वित्त विभाग से बजट भी स्वीकृत करा लिया गया था। बावजूद इसके चार साल बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
60 गांवों पर एक गाड़ी
बाढड़ा उपमंडल के अंतर्गत 60 से अधिक गांव आते हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां खेतों, ढाणियों और गांवों में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। गर्मी के मौसम में बिजली शॉर्ट सर्किट, ट्रांसफार्मर फॉल्ट या अन्य कारणों से आग लगने पर किसानों और आम लोगों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद दादरी या भिवानी से दमकल वाहन पहुंचने में काफी समय लग जाता है तब तक फसलें, पशुओं का चारा, मकान या अन्य सामान जलकर राख हो जाता है।
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बुनियादी सुविधाओं का अभाव
भाकियू अध्यक्ष हरपाल भांडवा, किसान नेता गिरधारी, ओमप्रकाश, रामअवतार, कमल सिंह, ऋषिपाल, धर्मबीर ने कहा कि हर साल लाखों की फसलें आग की भेंट चढ़ जाती हैं।
उपमंडल बनने के बावजूद कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। जिला मुख्यालय से उपमंडल के अंतिम गांवों की दूरी 50 से 60 किलोमीटर तक है। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता समय पर नहीं हो पाती। पिछले डेढ़ साल से यहां केवल एक स्थायी कर्मचारी और एक पुराना वाहन उपलब्ध है, जिससे पूरे क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
अनाज मंडी में खड़ी करनी पड़ रही गाड़ी
फायर ब्रिगेड कार्यालय के लिए विभागीय अधिकारियों ने ढिगावा रोड, जुई रोड, श्मशान घाट के समीप और गांव चांदवास सहित कई स्थानों का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्थान का अंतिम चयन नहीं हो सका है। कार्यालय भवन नहीं होने के कारण दमकल विभाग के कर्मचारियों को अनाज मंडी परिसर में अस्थायी रूप से रहकर कार्य करना पड़ रहा है।
क्षेत्र के किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों ने कई बार उपायुक्त और एसडीएम को ज्ञापन देकर जल्द फायर ब्रिगेड केंद्र स्थापित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि उपमंडल मुख्यालय पर आधुनिक दमकल केंद्र स्थापित हो जाए तो आगजनी की घटनाओं में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फायर ब्रिगेड केंद्र के निर्माण के लिए वर्ष 2020 से प्रक्रिया शुरू हुई थी। विभागीय स्तर पर कई स्थानों का निरीक्षण भी किया गया लेकिन छह साल बाद भी निर्माण के लिए जमीन का अंतिम चयन नहीं हो पाया है।
वर्सन:
कार्यालय निर्माण संबंधी मांग और प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं। जैसे ही विभागीय स्तर से आदेश प्राप्त होंगे, कार्यालय निर्माण और अन्य आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।- रमन मिश्रा, फायर ब्रिगेड अधिकारी।
वर्ष 2020 में तत्कालीन विधायक नैना चौटाला की पहल पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने पंचायत विभाग को उपमंडल स्तर पर आधुनिक फायर ब्रिगेड केंद्र निर्माण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद परियोजना का एस्टीमेट तैयार कर वित्त विभाग से बजट भी स्वीकृत करा लिया गया था। बावजूद इसके चार साल बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
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60 गांवों पर एक गाड़ी
बाढड़ा उपमंडल के अंतर्गत 60 से अधिक गांव आते हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां खेतों, ढाणियों और गांवों में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। गर्मी के मौसम में बिजली शॉर्ट सर्किट, ट्रांसफार्मर फॉल्ट या अन्य कारणों से आग लगने पर किसानों और आम लोगों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद दादरी या भिवानी से दमकल वाहन पहुंचने में काफी समय लग जाता है तब तक फसलें, पशुओं का चारा, मकान या अन्य सामान जलकर राख हो जाता है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
भाकियू अध्यक्ष हरपाल भांडवा, किसान नेता गिरधारी, ओमप्रकाश, रामअवतार, कमल सिंह, ऋषिपाल, धर्मबीर ने कहा कि हर साल लाखों की फसलें आग की भेंट चढ़ जाती हैं।
उपमंडल बनने के बावजूद कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। जिला मुख्यालय से उपमंडल के अंतिम गांवों की दूरी 50 से 60 किलोमीटर तक है। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता समय पर नहीं हो पाती। पिछले डेढ़ साल से यहां केवल एक स्थायी कर्मचारी और एक पुराना वाहन उपलब्ध है, जिससे पूरे क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
अनाज मंडी में खड़ी करनी पड़ रही गाड़ी
फायर ब्रिगेड कार्यालय के लिए विभागीय अधिकारियों ने ढिगावा रोड, जुई रोड, श्मशान घाट के समीप और गांव चांदवास सहित कई स्थानों का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्थान का अंतिम चयन नहीं हो सका है। कार्यालय भवन नहीं होने के कारण दमकल विभाग के कर्मचारियों को अनाज मंडी परिसर में अस्थायी रूप से रहकर कार्य करना पड़ रहा है।
क्षेत्र के किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों ने कई बार उपायुक्त और एसडीएम को ज्ञापन देकर जल्द फायर ब्रिगेड केंद्र स्थापित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि उपमंडल मुख्यालय पर आधुनिक दमकल केंद्र स्थापित हो जाए तो आगजनी की घटनाओं में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फायर ब्रिगेड केंद्र के निर्माण के लिए वर्ष 2020 से प्रक्रिया शुरू हुई थी। विभागीय स्तर पर कई स्थानों का निरीक्षण भी किया गया लेकिन छह साल बाद भी निर्माण के लिए जमीन का अंतिम चयन नहीं हो पाया है।
वर्सन:
कार्यालय निर्माण संबंधी मांग और प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं। जैसे ही विभागीय स्तर से आदेश प्राप्त होंगे, कार्यालय निर्माण और अन्य आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।- रमन मिश्रा, फायर ब्रिगेड अधिकारी।