{"_id":"6a32e7937bfe9ad0b50768de","slug":"sowing-in-fields-complete-department-now-wakes-up-to-soil-testing-charkhi-dadri-news-c-126-1-shsr1012-156663-2026-06-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: खेतों में बिजाई पूरी, अब मिट्टी जांच के लिए जागा विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: खेतों में बिजाई पूरी, अब मिट्टी जांच के लिए जागा विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
बिजाई के लिए तैयार खेत।
- फोटो : 1
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चरखी दादरी। खरीफ सीजन की अधिकांश फसलों की बिजाई पूरी होने के बाद कृषि विभाग को मिट्टी जांच के लिए 44 हजार सैंपल का लक्ष्य मिला है। लक्ष्य पांच दिन पहले जारी होने से इस बार अधिकांश किसानों के खेतों की मिट्टी की समय पर जांच नहीं हो सकी। ऐसे में किसान फसल की जरूरत के अनुसार रासायनिक खाद के उपयोग का वैज्ञानिक आकलन नहीं कर पाएंगे। जिले के 2.73 लाख एकड़ कृषि योग्य रकबे में केवल 600 जागरूक किसानों ने ही पिछले दो माह के दौरान स्वयं मिट्टी के नमूनों की जांच करवाई है।
बड़े स्तर पर बनाई योजना
वैसे तो सरकार ने किसान के खेत की मिट्टी की जांच के लिए बड़े स्तर पर कार्य योजना बना रखी है। इसके लिए हर साल मिट्टी के नमूनों की जांच का लक्ष्य तय किया जाता है। किसान का भूमि स्वास्थ्य कार्ड भी बना रखा है। लैब में मिट्टी की जांच होने के बाद किसान को मोबाइल पर संदेश के जरिए रिपोर्ट भी मिल जाती है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही खाद आदि का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
देरी से जारी किया गया आंकड़ा
सरकार प्रति वर्ष मिट्टी की जांच का लक्ष्य निर्धारित करती है। इस बार लक्ष्य के रूप में सैंपल जांच का आंकड़ा देरी से जारी किया गया है। प्री-मानसून की बारिश होने से अधिकतर किसानों ने खेतों में खरीफ सीजन की फसलों की बिजाई शुरू कर रखी है। कपास की बिजाई मई माह में पूरी हो चुकी थी। मार्च में रबी की फसलों की कटाई होने के बाद खेत खाली हो जाते हैं। खेत खाली होने पर ही मिट्टी की जांच की जाती है। जांच के लिए सैंपल खेत के अलग-अलग पांच भागों से लिए जाते हैं।
विज्ञापन
जांच के बाद होता है रसायनाें का इस्तेमाल
सरकार की योजना है कि किसान मिट्टी की जांच करवाकर जरूरत के अनुसार ही रासायनिक खादों का कम से कम इस्तेमाल करें। सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर बल दे रही है ताकि धरती की उर्वरा शक्ति बनी रहे। रासायनिक खाद के फसलों में अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से मिट्टी का पीएच मान भी बढ़ गया है, जो बेहद नुकसानदायक माना जाता है। पीएच मान से ही मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्वों के संतुलित होने का पता चलता है। इस समय मिट्टी में किसी पोषक तत्व की मात्रा अधिक है तो किसी की मात्रा कम बनी हुई है। मिट्टी में जिंक, फास्फोरस, फास्फेट, नाइट्रोजन,सोडियम, जिप्सम सहित अनेक प्रकार के फसल पोषक तत्व होते हैं। इस समय जिले की मिट्टी में फास्फोरस की मात्रा असंतुलित बनी हुई है।
बारिश होने पर बिजाई जोरो पर
प्री-मानसून की बारिश होने के बाद किसानों ने बाजरा व ग्वारी की बिजाई शुरू कर दी है। अधिकतर किसान चार दिन पहले हुई बारिश से बिजाई कर चुके हैं। जिले में खरीफ सीजन में किसान ज्वार, बाजरा, ग्वार, मूंग आदि की बिजाई करते हैं। बिजाई का समय 15 जून से 15 जुलाई तक माना जाता है।
वर्सन:
मिट्टी जांच करने के लिए सैंपल का लक्ष्य पांच दिन पहले ही पहुंचा है। अब तो खेतों में बिजाई का काम शुरू हो चुका है। कुछ जागरूक किसानों ने खुद ही मिट्टी की जांच जरूर करवाई है। -डॉ. रविंद्र मलिक, भूमि परीक्षण अधिकारी।
बड़े स्तर पर बनाई योजना
वैसे तो सरकार ने किसान के खेत की मिट्टी की जांच के लिए बड़े स्तर पर कार्य योजना बना रखी है। इसके लिए हर साल मिट्टी के नमूनों की जांच का लक्ष्य तय किया जाता है। किसान का भूमि स्वास्थ्य कार्ड भी बना रखा है। लैब में मिट्टी की जांच होने के बाद किसान को मोबाइल पर संदेश के जरिए रिपोर्ट भी मिल जाती है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही खाद आदि का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
देरी से जारी किया गया आंकड़ा
सरकार प्रति वर्ष मिट्टी की जांच का लक्ष्य निर्धारित करती है। इस बार लक्ष्य के रूप में सैंपल जांच का आंकड़ा देरी से जारी किया गया है। प्री-मानसून की बारिश होने से अधिकतर किसानों ने खेतों में खरीफ सीजन की फसलों की बिजाई शुरू कर रखी है। कपास की बिजाई मई माह में पूरी हो चुकी थी। मार्च में रबी की फसलों की कटाई होने के बाद खेत खाली हो जाते हैं। खेत खाली होने पर ही मिट्टी की जांच की जाती है। जांच के लिए सैंपल खेत के अलग-अलग पांच भागों से लिए जाते हैं।
जांच के बाद होता है रसायनाें का इस्तेमाल
सरकार की योजना है कि किसान मिट्टी की जांच करवाकर जरूरत के अनुसार ही रासायनिक खादों का कम से कम इस्तेमाल करें। सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर बल दे रही है ताकि धरती की उर्वरा शक्ति बनी रहे। रासायनिक खाद के फसलों में अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से मिट्टी का पीएच मान भी बढ़ गया है, जो बेहद नुकसानदायक माना जाता है। पीएच मान से ही मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्वों के संतुलित होने का पता चलता है। इस समय मिट्टी में किसी पोषक तत्व की मात्रा अधिक है तो किसी की मात्रा कम बनी हुई है। मिट्टी में जिंक, फास्फोरस, फास्फेट, नाइट्रोजन,सोडियम, जिप्सम सहित अनेक प्रकार के फसल पोषक तत्व होते हैं। इस समय जिले की मिट्टी में फास्फोरस की मात्रा असंतुलित बनी हुई है।
बारिश होने पर बिजाई जोरो पर
प्री-मानसून की बारिश होने के बाद किसानों ने बाजरा व ग्वारी की बिजाई शुरू कर दी है। अधिकतर किसान चार दिन पहले हुई बारिश से बिजाई कर चुके हैं। जिले में खरीफ सीजन में किसान ज्वार, बाजरा, ग्वार, मूंग आदि की बिजाई करते हैं। बिजाई का समय 15 जून से 15 जुलाई तक माना जाता है।
वर्सन:
मिट्टी जांच करने के लिए सैंपल का लक्ष्य पांच दिन पहले ही पहुंचा है। अब तो खेतों में बिजाई का काम शुरू हो चुका है। कुछ जागरूक किसानों ने खुद ही मिट्टी की जांच जरूर करवाई है। -डॉ. रविंद्र मलिक, भूमि परीक्षण अधिकारी।