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Charkhi Dadri News: एनसीआर से बाहर होने की उम्मीदों को झटका, दादरी फिलहाल रहेगा एनसीआर का हिस्सा

संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 17 Jun 2026 11:39 PM IST
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Hopes of exclusion from NCR dashed; Dadri to remain part of NCR for now
गांव खेड़ी बत्तर स्थित क्रशर जोन।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से दादरी जिले को बाहर किए जाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। 16 जून को नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की 42वीं बैठक में हरियाणा सरकार की ओर से एनसीआर का दायरा कम करने और कुछ जिलों को बाहर करने का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। बैठक में मौजूदा एनसीआर सीमा को यथावत रखने का निर्णय लिया गया। इसके बाद चरखी दादरी समेत अन्य जिले फिलहाल एनसीआर का हिस्सा बने रहेंगे।

इस फैसले के बाद जिले के लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लंबे समय से दादरी के लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की मांग रही है कि जिले को एनसीआर से बाहर किया जाए क्योंकि यहां एनसीआर के नियम तो लागू होते हैं लेकिन इसके अनुरूप विकास और सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। हरियाणा सरकार ने भी यही तर्क देते हुए एनसीआर का दायरा कम करने की मांग की थी कि दिल्ली से दूर स्थित जिलों को लाभ कम और नियमों का बोझ ज्यादा उठाना पड़ रहा है लेकिन बोर्ड ने फिलहाल एनसीआर की मौजूदा भौगोलिक सीमा बरकरार रखने का फैसला लिया है।
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मनोहर लाल कर चुके घोषणा
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान दादरी और भिवानी को एनसीआर से बाहर करने की घोषणा की थी। इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही जिले को एनसीआर के दायरे से राहत मिलेगी लेकिन विडंबना यह रही कि अब उन्हीं की अध्यक्षता में हुई एनसीआर योजना बोर्ड की बैठक में सीमा परिवर्तन का प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पाया।
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लोगों में फैसले से नाराजगी
जिले के लोगों का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर लागू होने वाले कई प्रतिबंधों का सीधा असर दादरी पर भी पड़ता है। विशेष रूप से क्रशर जोन और खनन गतिविधियों पर पर्यावरणीय प्रतिबंध लगने से हजारों परिवार प्रभावित होते हैं। उद्योग एवं क्रशर व्यवसाय से जुड़े लोगों का दावा है कि ऐसे प्रतिबंधों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब एक लाख लोगों के रोजगार पर असर पड़ता है।

वाहनों की मियाद घटी
वाहन मालिकों को भी एनसीआर के नियमों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। एनसीआर क्षेत्र में डीजल वाहनों की 10 वर्ष और पेट्रोल वाहनों की 15 वर्ष की आयु सीमा लागू होने से पुराने वाहनों की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अन्य जिलों की तुलना में उनके वाहनों का पुनर्विक्रय मूल्य काफी कम हो जाता है।

एनसीआर की नहीं मिली सुविधाएं
हालांकि एनसीआर में शामिल होने से जमीनों के दामों में जरूर भारी बढ़ोतरी हुई है लेकिन जिलावासियों का आरोप है कि इसके अनुरूप बुनियादी सुविधाओं, उद्योग, परिवहन और निवेश में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। जिले में न तो बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट आए और न ही एनसीआर के प्रमुख शहरों जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित हो सकीं। अब दादरी को एनसीआर से बाहर करने की राह अभी आसान नहीं दिख रही है।
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