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साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के लिए अभेद्य एप, ड्यूल ओटीपी सिस्टम सुरक्षित कदम : एसपी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 01 May 2026 12:55 AM IST
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चरखी दादरी। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और आमजन को वित्तीय चपत से बचाने के लिए हरियाणा पुलिस ने कमर कस ली है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के दिशा-निर्देशानुसार दादरी जिला पुलिस अधीक्षक लोगेश कुमार ने जिले के नागरिकों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। इस मुहिम का मुख्य केंद्र अभेद्य एप और ड्यूल ओटीपी सिस्टम है जो ठगों के खिलाफ सुरक्षा की एक मजबूत दीवार का काम करेंगे।
डिजिटल अरेस्ट के डर से न घबराएं
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वर्तमान में डिजिटल अरेस्ट नामक नया अपराध तेजी से पैर पसार रहा है। इसमें अपराधी खुद को सीबीआई, पुलिस या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और लोगों को डरा-धमका कर घर में ही नजरबंद होने का नाटक रचते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से ऐसी कार्रवाई नहीं करती। यह केवल पैसे ऐंठने का एक हथकंडा है।
अभेद्य एप से संदिग्ध कॉल्स पर पहले ही लगेगा अंकुश
साइबर अपराधों को रोकने के लिए अभेद्य एप एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है। यह एप अंतरराष्ट्रीय, वर्चुअल और मास्क किए गए अज्ञात नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल्स और व्हाट्सएप संदेशों को उपयोगकर्ता तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक कर देता है। एसपी लोगेश कुमार ने बताया कि इसके माध्यम से अपराधियों की ओर से फैलाई जाने वाली ब्लैक मेलिंग और दहशत को रोका जा सकता है। कॉल ब्लॉक होने के बावजूद पुलिस के पास बैकएंड पर इन नंबरों का डेटा सुरक्षित रहता है जिससे अपराधियों को पकड़ने में आसानी होती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए ड्यूल ओटीपी सुरक्षा
ठग अक्सर मानसिक दबाव बनाकर या निवेश का लालच देकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए एचडीएफसी बैंक के सहयोग से ड्यूल ओटीपी सिस्टम शुरू किया गया है। यह विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और उन खातों के लिए है जिनमें 25 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा है। इसके तहत बड़े ट्रांजेक्शन के दौरान ओटीपी केवल खाताधारक को ही नहीं बल्कि उनके परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को भी जाएगा। जब तक दोनों ओटीपी दर्ज नहीं होंगे, पैसा ट्रांसफर नहीं होगा। इससे परिवार के सदस्य तुरंत सचेत हो जाएंगे और जल्दबाजी में होने वाली ठगी रुक जाएगी।
सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां
= अपनी बैंक डिटेल्स, पासवर्ड या ओटीपी किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें
= इनाम, लॉटरी या डराने वाले संदेशों के झांसे में आने से बचें
= किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक करने से परहेज करें
= सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।
पुलिस अधीक्षक लोगेश कुमार ने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है और जनता की सक्रिय भागीदारी से ही साइबर अपराधियों को मात दी जा सकती है।
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डिजिटल अरेस्ट के डर से न घबराएं
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वर्तमान में डिजिटल अरेस्ट नामक नया अपराध तेजी से पैर पसार रहा है। इसमें अपराधी खुद को सीबीआई, पुलिस या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और लोगों को डरा-धमका कर घर में ही नजरबंद होने का नाटक रचते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से ऐसी कार्रवाई नहीं करती। यह केवल पैसे ऐंठने का एक हथकंडा है।
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अभेद्य एप से संदिग्ध कॉल्स पर पहले ही लगेगा अंकुश
साइबर अपराधों को रोकने के लिए अभेद्य एप एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है। यह एप अंतरराष्ट्रीय, वर्चुअल और मास्क किए गए अज्ञात नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल्स और व्हाट्सएप संदेशों को उपयोगकर्ता तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक कर देता है। एसपी लोगेश कुमार ने बताया कि इसके माध्यम से अपराधियों की ओर से फैलाई जाने वाली ब्लैक मेलिंग और दहशत को रोका जा सकता है। कॉल ब्लॉक होने के बावजूद पुलिस के पास बैकएंड पर इन नंबरों का डेटा सुरक्षित रहता है जिससे अपराधियों को पकड़ने में आसानी होती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए ड्यूल ओटीपी सुरक्षा
ठग अक्सर मानसिक दबाव बनाकर या निवेश का लालच देकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए एचडीएफसी बैंक के सहयोग से ड्यूल ओटीपी सिस्टम शुरू किया गया है। यह विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और उन खातों के लिए है जिनमें 25 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा है। इसके तहत बड़े ट्रांजेक्शन के दौरान ओटीपी केवल खाताधारक को ही नहीं बल्कि उनके परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को भी जाएगा। जब तक दोनों ओटीपी दर्ज नहीं होंगे, पैसा ट्रांसफर नहीं होगा। इससे परिवार के सदस्य तुरंत सचेत हो जाएंगे और जल्दबाजी में होने वाली ठगी रुक जाएगी।
सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां
= अपनी बैंक डिटेल्स, पासवर्ड या ओटीपी किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें
= इनाम, लॉटरी या डराने वाले संदेशों के झांसे में आने से बचें
= किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक करने से परहेज करें
= सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।
पुलिस अधीक्षक लोगेश कुमार ने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है और जनता की सक्रिय भागीदारी से ही साइबर अपराधियों को मात दी जा सकती है।
