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Charkhi Dadri News: उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को इलाज का खर्च और मुआवजा देने के दिए आदेश
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चरखी दादरी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्लेम खारिज करने के एक मामले में बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया है। साथ ही आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह शिकायतकर्ता को इलाज का खर्च 27,826 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ व मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में भी 10 हजार रुपये देने के निर्देश दिए।
यह था मामला
झज्जर जिले के गांव कालियावास निवासी सुनील कुमार ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड से दो लाख रुपये की ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। मार्च 2023 में सीने में दर्द की शिकायत के बाद उसे दादरी के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां उन्हें प्रिंजमेटल एनजाइना नामक बीमारी का निदान हुआ। इलाज के बाद सुनील कुमार ने 27,826 रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए दावा पेश किया।
आयोग ने यह की टिप्पणी
बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि सुनील कुमार ने अपनी पुरानी बीमारी (उच्च रक्तचाप) के बारे में जानकारी छिपाई और मांगे गए जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए। हालांकि आयोग ने पाया कि कंपनी के पास ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि पॉलिसी लेते समय शिकायतकर्ता को पुरानी बीमारी थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले रक्तचाप का बढ़ा हुआ स्तर पाया जाना किसी पुरानी बीमारी को जानबूझकर छिपाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आयोग ने ये दिए आदेश
उपभोक्ता आयोग ने माना कि दस्तावेजों की कमी की बात कहकर एक वास्तविक क्लेम को रोकना तकनीकी रूप से गलत और मनमाना कदम है। उन्होंने कंपनी को 27,826 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक पीड़ा और परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में भी 10 हजार रुपये देने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों के अंदर इस आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो पूरी राशि पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज लागू होगा।
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यह था मामला
झज्जर जिले के गांव कालियावास निवासी सुनील कुमार ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड से दो लाख रुपये की ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। मार्च 2023 में सीने में दर्द की शिकायत के बाद उसे दादरी के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां उन्हें प्रिंजमेटल एनजाइना नामक बीमारी का निदान हुआ। इलाज के बाद सुनील कुमार ने 27,826 रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए दावा पेश किया।
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आयोग ने यह की टिप्पणी
बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि सुनील कुमार ने अपनी पुरानी बीमारी (उच्च रक्तचाप) के बारे में जानकारी छिपाई और मांगे गए जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए। हालांकि आयोग ने पाया कि कंपनी के पास ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि पॉलिसी लेते समय शिकायतकर्ता को पुरानी बीमारी थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले रक्तचाप का बढ़ा हुआ स्तर पाया जाना किसी पुरानी बीमारी को जानबूझकर छिपाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आयोग ने ये दिए आदेश
उपभोक्ता आयोग ने माना कि दस्तावेजों की कमी की बात कहकर एक वास्तविक क्लेम को रोकना तकनीकी रूप से गलत और मनमाना कदम है। उन्होंने कंपनी को 27,826 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक पीड़ा और परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में भी 10 हजार रुपये देने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों के अंदर इस आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो पूरी राशि पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज लागू होगा।
